कबुलो, राहुल बनेंगे pm। इंकार किया तो बेदखली का रुक्का थमा दिया- लक्ष्मण सिंह ( श्याम चौरसिया)

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दमदार और व्यापक जनाधार वाले बेबाक जननेता लक्ष्मण सिंह ने कांग्रेस से अपनी 06 साल की बेदखली के बाद गुना में ली प्रेस कांफ्रेंस में कांग्रेस के ताजा हिटलरी चाल चरित्र को बयान करते हुए कहाकि मैंने कुनेन गटकने से इंकार कर दिया तो बदले में मुझे बाहर का रास्ता दिखा दिया मुझ से कहा गया। बोलो, लिखो- राहुल गांधी प्रधानमंत्री बनेंगे? राष्ट्रवाद और सनातनी की बहती गंगा में ये असम्भव है। मेरे इंकार करने पर मुझे बेदखल कर दिया।
लक्ष्मण सिंह मानते हे कि बोलने की आजादी पर ताला लगाने वालों का समर्थन करने वाले कांग्रेस के हितैषी नही हो सकते है? लक्ष्मण सिंह अपने अंदाज में खूब गर्जे, बरसे। तेवर सख्त थे। वे अब कांग्रेस को कांग्रेस से बाहर रह कर ही दुरुस्त करेंने का विंध्याचल उठाएंगे। उन्हें विश्वास है। कांग्रेस में अभी भी उनके विचारों, तेवरों को समर्थन देने वालों की कमी नही है। वे ही कांग्रेस को राजपथ से फिर पगडंडी पर लाएंगे। उन्होंने फिर से बीजेपी का केशरिया थामने से इंकार करते हुए कहाकि बीजेपी ने उनके सनातन और आप्रेशन सिंधुर के समंध में रखे विचारों का समर्थन तो किया लेकिन किसी भाजपाई ने उनसे संपर्क नही किया।
सनद रहे। यदि लक्ष्मण सिंह 2009 में राजगढ़ लोकसभा सीट से बतौर बीजेपी प्रत्याशी हार कर बलि नही देते तो शायद उनके अग्रज राजा दिग्गी का डंका दिल्ली दरबार मे नही बजता। इस चुनाव में वे कांग्रेस प्रत्याशी नारायण सिंह आमला बे से मात्र 25 हजार वोटों से हारे थे। यानी बीजेपी तो उनको वैतरणी पार लगाना चाहती थी। मगर वे खुद आहुति दे अग्रज दिग्गी को बलवान बनाना चाहते थे। यदि लक्ष्मण सिंह भावना में बह बलि नही देते तो आज केंद्र में मंत्री होते। और न वे चाचौड़ा से बीजेपी प्रत्याशी श्रीमती मीना जैसी नोसिखिया से 65 हजार मतों से विधानसभा चुनाव हारते।
लक्ष्मण सिंह को मलाल तो है। मगर वे प्रकट करने से कतरा जाते है।
सबसे हैरत की बात ये हे कि जिस कांग्रेस में राजा दिग्गविजय सिंह के बिना पत्ता नही हिलता। उसी कांग्रेस ने उनके अनुज पूर्व सांसद- विधायक लक्ष्मण सिंह को बेदखल करके राजा दिग्गी की सत्ता,प्रभाव, कद पर सवालिया निशान लगा दिया। क्या वजह हे? राजा दिग्गविजय सिंह जैसी विराट हस्ती भी अपने अनुज की बेदखली को रोक नही सकी??
सीनियर कांग्रेस नेता शशि थरूर, आनंद शर्मा सहित अन्य कांग्रेस नेताओं ने भारत ने ही नही बल्कि विदेशों में आप्रेशन सिंधुर के पक्ष में जमकर तराने गाए। कसीदे पढ़े। यदि ये नेता गलत नही है तो फिर लक्ष्मण सिंह कैसे गलत हो सकते है?
इस असामान्य,अनपेक्षित,अनचाही बेदखली की तह में अंदरूनी कलह ओर चलती राजनीतिक वर्चस्व की जंग के रूप में आंका जा रहा है।
अनेक विश्लेषक बीजेपी के मुकाबले कांग्रेस को हर स्तर पर खोखली होती मानते है। यदि राहुल गांधी लँगड़े घोड़ों से मुक्ति की नसियत देते है तो गलत नही करते है। राजा दिग्गविजय सिंह भी पिछले 12 सालों में अनेक मंचो से फूल छाप कांग्रेसियों से सावधान,चौकस रहने की नसियत देते आ रहे है। मगर कांग्रेस का नक्कारखाना छोटा तो है नहीं।
इन्ही फूल छाप कांग्रेसियों की वजह से 2024 के लोकसभा चुनाव में उनको अपनी कर्मभूमि राजगढ़ से करीब 03 लाख वोटो से शर्मनाक हार झेलनी पड़ी थी।
शायद राजा दिग्गी को सनातन ओर आप्रेशन सिंधुर की पुरजोर पैरवी करने वाले अपने अनुज लक्ष्मण सिंह में ही फूल छाप दिखता हो।कयासों की चलती आंधी में बहुत कुछ सम्भव हो सकता है। मगर कांग्रेस ने लक्ष्मण सिंह को बेदखल करके आधी कांग्रेस में करंट का संचार कर दिया। साथ ही बीजेपी को एक नया मुद्दा थमा दिया।
इससे बीजेपी को तो कोई नुकसान होना नही है मगर कांग्रेस की फजियत और बढ़ गयी।

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