ऑपरेशन सिंदूर के दौरान घर में घुसकर पाकिस्तान को मारने की जितनी चर्चा है, उतनी ही अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप की भी

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ऑपरेशन सिंदूर के दौरान घर में घुसकर पाकिस्तान को मारने की जितनी चर्चा है, उतनी ही अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप की भी. ट्रंप का नाम ना भारत के प्रधानमंत्री ले रहे हैं, ना विदेश मंत्री और ना ही सेना और विदेश मंत्रालय ले रहा है.
ट्रंप के नाम की माला कांग्रेस जप रही है. कांग्रेस जितनी बार राहुल गांधी का नाम नहीं लेती, उतनी बार ट्रंप का नाम ले रही है. हर देश का अपना ट्रंपकार्ड है. पाकिस्तान को छोड़ कोई भी देश किसी दूसरे के ट्रंप कार्ड पर न कभी चला है और ना ही चल सकेगा. ट्रंप को अपनी राजनीति का ट्रंपकार्ड बनाने में कांग्रेस कितनी भी मेहनत करे लेकिन भारत के न्यू नॉर्मल में वह कहीं टिक नहीं पाएगा.
लगातार कहा जा रहा है कि, भारत की विदेश नीति फेल हो गई है. आजादी के बाद से भारत की विदेश नीति की दिशा एक ही रही है. भारत बिना गुटों में फंसे हुए अपने हितों की रक्षा के लिए सभी देशों से बेहतर संबंध की कूटनीति पर चलता रहा है. यही कूटनीति अभी भी चल रही है. बार-बार कहा जा रहा है कि, पाकिस्तान के साथ तो कुछ देश खड़े थे लेकिन भारत के साथ कोई भी खुलकर क्यों नही खड़ा हुआ.
यह तो सफलता है, कि बिना किसी देश के खुलकर खड़े होने के बावजूद पाकिस्तान को घर में घुसकर मारने की क्षमता भारत ने दिखाई. आतंक के खिलाफ अपने सेट टारगेट को हासिल किया. भारत को किसी भी देश से सैन्य शक्ति की सहायता की जरूरत नहीं है. भारत जिस आतंकवाद से लड़ रहा है, वह पूरी दुनिया के लिए चुनौती है. अमेरिका ने भी आतंकवाद भोगा है.
अमेरिका जानता है कि पाकिस्तान आतंकवादी देश है. ओसामा बिन लादेन को पाकिस्तान में घुसकर अमेरिका ने मारा था. यूएनओ में जिन्हें आतंकवादी घोषित किया है, वह पाकिस्तान में ही रहते हैं.
हर देश अपने हितों के मुताबिक कूटनीति और विदेश नीति पर आगे बढ़ता है. अमेरिका ने कभी भी भारत का वक्त पर साथ नहीं दिया. इसके बावजूद देश के हर प्रधानमंत्री ने सुपर पावर अमेरिका से बेहतर रिश्ते बनाने के प्रयास ज़ारी रखे. इसी निरंतरता में पीएम नरेंद्र मोदी ने भी अमेरिका के साथ भारत के रिश्तों को बेहतर करने के लिए हर संभव प्रयास किया. चाहे व्यापारिक हो या सामरिक, भारत ने अमेरिका के साथ बराबरी से दोस्ताना रिश्ते रखने के प्रयास किए.
आतंकवाद से युद्ध के लिए ऑपरेशन सिंदूर पहला मौका था जब भारत और पाकिस्तान के बीच अमेरिका को अपनी विदेश नीति चलने का मौका मिला. ट्रंप ने वही किया जो अमेरिका के सभी राष्ट्रपति करते रहे हैं. भारत और पाकिस्तान की कोई तुलना नहीं है. भारत आज दुनिया की चौथी अर्थव्यवस्था बन गया है. वही दूसरी तरफ पाकिस्तान दर-दर कटोरा लेकर भीख मांग रहा है.
जो प्रगति के रास्ते पर आगे बढ़ रहा हो उसे युद्ध से बचने की नीति पर चलना आवश्यक है. अगर पीएम नरेंद्र मोदी यह कह रहे हैं कि, पाकिस्तान की आर्मी और सरकार आतंक के जरिए पैसा कमाई कर रहे हैं, तो यह उन देशों के लिए भी संदेश है जो पैसे देकर पाकिस्तान को सहयोग कर रहे हैं. पाकिस्तान आर्मी तो किराए पर लड़ने के आर्मी बन गई है.
पहले भारत ने यूके को पीछे छोड़ा और अब जापान को. भारत दुनिया की तीसरी अर्थव्यवस्था बनने के रास्ते पर तेजी से आगे बढ़ रहा है. जो राष्ट्र आर्थिक प्रगति की रेस में सुपर पावर देशों की बराबरी की तरफ पहुंच रहा है, वह तो दोस्ती होने के बाद भी अखरता ही है. भारत केवल दुनिया के सुपर पावर देशों को ही नहीं अखर रहा है बल्कि भारत में भी उन ताकतों को अखर रहा है जो अपने आपको राजनीति का सुपर पावर समझते है.
ऑपरेशन सिंदूर के ज़रिये घर में घुसकर मारने के भारतीय सैन्य अभियान से दुनिया चौकन्नी हो गई है. जो देश परंपरागत रूप से भारत के साथ दुश्मनी का व्यवहार करते हैं, जिनके साथ सीमाएं लगती हैं. और जिनके साथ हमारे सीमा विवाद बने हुए हैं, उनको जवाब देने के लिए भारत की दक्षता और क्षमता अब किसी विकसित शक्ति के सहयोग पर निर्भर नहीं है.
भारत आत्मनिर्भर हो रहा है. खास कर सैन्य इक्विपमेंट मैन्युफैक्चरिंग में भारत के प्रयासों को ऑपरेशन सिंदूर की सफलता से नई गति मिली है. आकाश और ब्रह्मोस ने दुनिया को भारत की क्षमता दिखा दी है. अब भविष्य भारत में मिलेट्री इक्विपमेंट मैन्युफैक्चरिंग की आत्मनिर्भरता का है. अब सारे प्रयास यह मानकर करने के हैं कि, उभरते भारत का अब साथ लेने का नहीं बल्कि साथ देने का समय है. अब भारत जिसका साथ देगा, वह विश्व की शक्ति माना जाएगा. भारत का साथ देना विश्व शक्तियों की मजबूरी है.
रूस परंपरागत रूप से भारत का दोस्त रहा है. अमेरिका ने तो वक्त पर अपने देश की राजनीति ही की है. पाकिस्तान में उसके कई इंटरेस्ट हो सकते हैं. भारत अपनी भूमि का एक टुकड़ा किसी भी देश को नहीं दे सकता. लेकिन पाकिस्तान अपने देश में अमेरिका और चीन को सामरिक अड्डे बनाने के लिए जगह देता है. उनको मातृभूमि से कोई मतलब नहीं है. उनको तो कर्ज से मतलब है. जबकि भारत के लोग भारत माता और भारत भूमि के लिए सर्वस्व बलिदान करने के लिए तैयार रहते हैं.
भारत अगर पाकिस्तान को खुली चुनौती दे रहा है तो वह किसी के भरोसे नहीं दे रहा है. पाकिस्तान को दी जाने वाली चुनौती हर उस देश के लिए भी है, जो पाकिस्तान को सीधे और पीछे से सपोर्ट करता है.
पीएम नरेंद्र मोदी ऑपरेशन सिंदूर के बाद लगातार देश के विभिन्न क्षेत्रों की जनसभाओं में पाकिस्तान की जनता को भी आगाह कर रहे हैं कि, उनकी सेना और सरकार में उनका भविष्य तबाह कर दिया है. पाकिस्तान के अवाम को अपने भविष्य के लिए खड़े होना पड़ेगा.
यह भारत की ताकत है कि देश का प्रधानमंत्री खुले आम चुनौती दे रहा है कि, पाकिस्तान के लोग सुख के साथ रोटी खाएं या भारत की गोली.
पाक प्रायोजित आतंकवाद के सर्वनाश का खुला शंखनाद भारत कर चुका है. यह शंखनाद किसी दूसरे के भरोसे नहीं बल्कि भारत ने अपनी क्षमता के भरोसे किया है. आतंक के खिलाफ युद्ध भारत जीतेगा. यही जीत भारत को विश्व में सुपर पावर के रूप में स्थापित करेगी.

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