“अधिकतर जनता पार्टी के मंत्रीगण, विधायक खादी नहीं पहनते

“अधिकतर जनता पार्टी के मंत्रीगण, विधायक खादी नहीं पहनते हैं, क्या यही कारण है कि मध्यप्रदेश खादी ग्रामोद्योग का नाम हटा कर मध्यप्रदेश ग्रामोद्योग कर दिया है, ऐसा प्रतीत होता है कि इस जनता पार्टी का शासन खादी का महत्व कम करना चाहता है।
खादी का नाम हटाया जा रहा है, यदि यह गांधीवादी कहलाते हैं, अगर राजघाट पर जाकर कसम खा सकते हैं तो मेरा निवेदन है कि खादी का महत्व इसमें कम न करें।”
अपने वक्तव्य में ये शब्द थे, 1977 में मध्य प्रदेश विधानसभा में पहली बार विधायक बन कर पहुंचे आदरणीय राजा साहब श्री दिग्विजय सिंह जी के, जिन्होंने अपनी राजनैतिक शैली, दूरदर्शी सोच और प्रभावशाली वक्तव्य से भाजपा और कांग्रेस के दिग्गज नेताओं को प्रभावित किया, ये राजा साहब द्वारा विरोध का परिणाम था कि बाद में संशोधन विधेयक में खादी शब्द पुनः जोड़ा गया।
दिनांक 26 अप्रैल 1978, मध्य प्रदेश विधानसभा में जब तत्कालीन मुख्यमंत्री श्री वीरेंद्र कुमार सखलेचा जी थे और विधानसभा में भाजपा सरकार द्वारा प्रस्तुत मध्यप्रदेश ग्रामोद्योग विधेयक 1978 पर चर्चा की जा रही थी।
अपने वक्तव्य में आदरणीय राजा साहब ने कहा कि “यदि इस विधेयक के माध्यम से खादी का महत्व कम नहीं किया जाता तो इस विधेयक का समर्थन करने में हमें कोई आपत्ति नहीं है।
सभापति महोदय, जहां तक मध्यप्रदेश खादी बोर्ड के ठीक से संचालन करने की बात है, यह केवल विधेयक लाने से ठीक नहीं किया जा सकता, इसके लिये हमें ग्रामोद्योग की गहराई में जाकर देखना चाहिये, एबिलिटी कैसे बढ़ाई जाये, संचालन कैसे सुधारा जाये।
मेरा अगला सुझाव यह है कि इस बोर्ड के गठन के बाद सर्वेक्षण करवाएं कि जो लोग भूमिहीन हैं, जिनके पास और कोई साधन जीविका का नहीं है, जो पैतृक धंधे करते चले आ रहे है, जैसे बढ़ई, लोहार, बुनकर, इनमें से ऐसे लड़कों को छांटना चाहिए, जो थोड़ा पढ़े-लिखे भी हों, ऐसे लोगों को प्रशिक्षणार्थ भेजना चाहिए और प्रशिक्षण का पूरा खर्च शासन को उठाना चाहिए, इसके बाद इन्हें ग्रामोद्योग के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए।
मेरा निवेदन यह है कि पिछले बजट में जनता पार्टी की सरकार ने बड़े-बड़े उद्योगपतियों को मिनी-स्टील प्लांटस लगाने के लिए रियायतें दी हैं, यदि जनता पार्टी का शासन चाहते है कि वह ग्रामोन्मुखी बनें, ग्रामोद्योग खुलें, तो मैं निवेदन करूंगा कि इसके लिए फाइनेंस की व्यवस्था की जाएं, इसके लिए कम से कम 25 प्रतिशत ऋण दिया जाए और यह ऋण ब्याज मुक्त होना चाहिए ताकि अदायगी आसानी से हो सके।
सभापति महोदय, ऐसा देखा गया है कि हमारे यहां के बुनकरों को हथकरघा लगाने के लिये ऋण स्टेट बैंक आफ इंदौर से दिया गया था, ऋण मिलने के बाद अगले साल से वसूली चालू कर दी, जिससे न वे काम कर पाये और न ऋण ही पटा पायें। जब आप बड़े उद्योगपतियों को रियायत दे रहे हैं 2-2, 4-4 वर्ष तक, तब ग्रामोद्योग में लगे व्यक्तियों को भी रियायत देनी चाहिए।
कच्चा माल उपलब्ध कराने की ओर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए, बढ़ई को लकड़ी नहीं मिल सकती मैंने वन विभागों की चर्चा के समय वन मन्त्री जी से निवेदन किया था बढ़ई के लिए निस्तारी डिपो से कमर्शियल रेट पर लकड़ी दी जा सकती हैं जो गरीब बढ़ई हैं उनका रजिस्ट्रेशन करा लें और सस्ती दरों पर कच्चा माल उपलब्ध करायें।
यह ख्याल भी रखा जाना चाहिए कि कुम्हारों को मिट्टी की जरूरत होती है तो खदानों की नीलामी होती है तो कई विचौलिये खदान का ठेका, बोली लगाते हैं जिनका निर्वाह मिट्टी से होता हैं उन्हें ठेका नहीं मिल पाता बीच में लोग खरीद लेते हैं व अधिक रायल्टी लेते हैं, कुम्हारों को ही मिट्टी की नीलामी लेने का अधिकार होना चाहिए, बसोड़ों को वांस उपलब्ध कराये जाने चाहिए।
बोर्ड की तरफ से ऐसी व्यवस्था होनी चाहिए कि बना हुआ माल बोर्ड अपने माध्यम से खरीदे यह नीति बननी चाहिये कि पूरे प्रदेश में बोर्ड अपने माध्यम से माल खरीदे व बिक्री करे।”
वर्ष 1985 में तत्कालीन प्रधानमंत्री श्री राजीव गांधी जी ने आदरणीय राजा साहब श्री दिग्विजय सिंह जी की राजनैतिक योग्यता, नेतृत्व क्षमता और अद्भुत संगठनात्मक क्षमता को पहचानते हुए उन्हें मध्य प्रदेश कांग्रेस संगठन की जिम्मेदारी दी और जिनके नेतृत्व का ही करिश्मा था कि मध्य प्रदेश में कांग्रेस पार्टी की सरकार बनी और फिर सरकार का नेतृत्व मुख्यमंत्री के रूप में आदरणीय राजा साहब ने किया।
