अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी संचार विभाग के प्रमुख जयराम रमेश ने प्रधानमंत्री जी से पूछे प्रश्न
दिल्ली/ भोपाल, 24 अप्रैल, 2024
आज मध्यप्रदेश जा रहे प्रधानमंत्री से हमारे सवाल:-
1. भाजपा ने मध्यप्रदेश में आदिवासी समुदाय की उपेक्षा क्यों की है?
2. एमपी में दलितों के ख़िलाफ़ अपराध दर सबसे ज्यादा है। यह क्यों लगातार बढ़ता जा रहा है?
3. विधानसभा चुनाव से पहले प्रधानमंत्री ने लाडली बहना योजना को लेकर एमपी की महिलाओं से झूठ क्यों बोला?
जुमलों का विवरण:
1. 2006 में कांग्रेस ने क्रांतिकारी वन अधिकार अधिनियम (FRA) पारित किया था। इस कानून ने आदिवासियों और वन में रहने वाले अन्य समुदायों को अपने ख़ुद के जंगलों का प्रबंधन करने और उनसे प्राप्त उपज से आर्थिक रूप से लाभ उठाने का कानूनी अधिकार दिया था। लेकिन भाजपा सरकार FRA के कार्यान्वयन में बाधा डालती रही है, जिससे लाखों आदिवासी इसके लाभों से वंचित हो रहे हैं। कुल फाइल किए गए 6,27,513 व्यक्तिगत क्लेम्स में से केवल 47 % (2,94,877 क्लेम्स) मंजूर किए गए हैं। वहीं इसके तहत वितरित की गई भूमि, स्वामित्व सामुदायिक अधिकारों के लिए पात्र 57,948 वर्ग किलोमीटर का केवल 10 प्रतिशत (5,931 वर्ग किमी) है। मध्य प्रदेश में भाजपा सरकार राज्य के आदिवासी समुदायों को उनका अधिकार देने में क्यों विफल रही है?
2. राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) के आंकड़ों के अनुसार, मध्य प्रदेश में दलितों के ख़िलाफ़ अपराध दर देश में सबसे अधिक है। 2021 में (जिसका सबसे ताज़ा डेटा उपलब्ध है), अनुसूचित जाति के ख़िलाफ़ अपराध दर 63.6 थी, जबकि राष्ट्रीय औसत 25.3 है। राज्य में 2019 और 2020 में भी दलितों के ख़िलाफ़ उच्च अपराध दर थी-राष्ट्रीय औसत 22.8 और 25 के मुक़ाबले क्रमशः 46.7 और 60.8। दरअसल, दलितों के ख़िलाफ़ अपराध की दर साल-दर-साल बढ़ी है। मध्य प्रदेश में भाजपा लगभग दो दशक से अधिक समय से सत्ता में है। ऐसा क्यों है कि दलितों को अपनी सुरक्षा को लेकर डर बढ़ रहा है? क्या प्रधानमंत्री मोदी को उन अनगिनत अत्याचारों पर कोई शर्म महसूस नहीं होती जो उनके सत्ता में रहते दलितों ने सहे हैं
3. चुनाव में महिलाओं का वोट लेने के लिए लाडली बहना योजना के तहत 3000 रुपए प्रति महीने देने का वादा किया गया था। चुनाव जीतने के बाद सरकार ने यह वादा पूरा करने की दिशा में कोई कदम नहीं उठाया है। हाल ही में विधानसभा में उसने कहा कि इस वादे के लिए कोई समय सीमा निर्धारित करना ‘संभव नहीं’ है। क्या यह ‘मोदी की गारंटी’ एक और चुनावी जुमला है
