भोपाल-इंदौर मेट्रो में तुर्किए का ठेका, कांग्रेस का विरोध
भोपाल-इंदौर मेट्रो में तुर्किए की कंपनी ‘असिस गार्ड’ का ठेका है। वह स्टेशनों पर ऑटोमैटिक फेयर कलेक्शन सिस्टम लगा रही है। इसे लेकर नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय और भोपाल सांसद आलोक शर्मा का बयान सामने आ चुका है। वहीं, अब कांग्रेस भी मैदान में उतर गई है।
बुधवार को पूर्व मंत्री पीसी शर्मा के नेतृत्व में कांग्रेसियों ने मेट्रो ऑफिस का घेराव किया। यहां पर पाकिस्तान मुर्दाबाद के नारे भी लगाए गए। शर्मा ने कहा कि तुर्की ने पाकिस्तान का साथ दिया है। ऐसे में देश खतरे में है। सॉफ्टवेयर के जरिए तुर्की देश को संकट में डाल सकता है। सात दिन के अंदर टेंडर निरस्त होना चाहिए।

कांग्रेस नेता जेपी धनोपिया ने कहा कि 7 दिन का वक्त दिया है। इस अवधि में मेट्रो कॉर्पोरेशन तुर्की का सामान निकाल लें, वरना मेट्रो ऑफिस के सामने ही बड़ा प्रदर्शन किया जाएगा। मेट्रो जीएम प्रोजेक्ट अजय गुप्ता को कांग्रेस ने ज्ञापन दिया। प्रदर्शन के बीच कांग्रेस नेता योगेंद्र सिंह गुड्डू चौहान, प्रवीण सक्सेना, राहुल सिंह राठौड़ भी मौजूद रहे।

‘असिस’ को भोपाल-इंदौर में यह काम मिला एमपी मेट्रो कॉर्पोरेशन ने मेट्रो स्टेशनों पर ऑटोमैटिक फेयर कलेक्शन के लिए साल 2024 में इंटरनेशनल टेंडर कॉल किए थे। कुल 3 कंपनियों ने टेंडर भरे थे। इनमें से एक तुर्किए की असिस इलेक्ट्रॉनिक ब्लिसिम सिस्टमेलेरी भी शामिल है, जबकि दो अन्य कंपनी- एनईसी कॉर्पोरेशन इंडिया प्राइवेट लिमिटेड और शेलिंग फॉस्क ग्लोबल डिजिटल टेक्नोलॉजी थीं।
230 करोड़ रुपए के टेंडर कॉल के मुकाबले तुर्किए की कंपनी ने 186 करोड़ 52 लाख रुपए की राशि टेंडर में दी थी। दूसरे स्थान पर एनईसी कॉर्पोरेशन इंडिया लिमिटेड ने 204.57 करोड़ का प्रस्ताव सौंपा था। इस हिसाब से तुर्किए की कंपनी को टेंडर हासिल हो गया।

डीआरएम तिराहा, अलकापुरी, एम्स में काम चल रहा
टेंडर मिलने के बाद कंपनी ने स्टेशनों पर सिस्टम लगाने भी शुरू कर दिए। भोपाल में सुभाष नगर, केंद्रीय स्कूल, डीबी मॉल, एमपी नगर और रानी कमलापति स्टेशन पर गेट्स लगाए जा चुके हैं जबकि डीआरएम तिराहा, अलकापुरी और एम्स में काम चल रहा है।
इंदौर में भी 5 स्टेशन- गांधीनगर से सुपर कॉरिडोर-3 तक सिस्टम इंस्टॉल किया जा चुका है। भोपाल और इंदौर के पहले फेस के कुल 53 स्टेशनों पर कंपनी काम करेगी। कंपनी के जिम्मे सबसे महत्वपूर्ण ऑटोमैटिक फेयर कलेक्शन यानी किराया लेने की पूरी प्रक्रिया का सिस्टम तैयार करने का काम है। जिसमें कार्ड के जरिए किराया लेने के बाद ही गेट खुलना भी शामिल है। यह कंपनी सिस्टम का पूरा मेंटेनेंस भी करेगी।

ड्रोन और कई सुरक्षा उपकरण बनाती है असिस गार्ड कंपनी
तुर्की की कंपनी असिस गार्ड ड्रोन सहित कई तरह के उपकरण बनाती है। ये बॉर्डर पर सुरक्षा के काम भी आते हैं। ASİSGUARD रक्षा उद्योग के क्षेत्र में तकनीकी आवश्यकताओं के समाधान विकसित करने के लिए रोटरी विंग सशस्त्र/निरस्त्र ड्रोन सिस्टम, इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल विजन और सीमा सुरक्षा प्रणाली और सैन्य वाहन इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम विकसित करती है। यह कंपनी अनुकूलित और संशोधित डिजाइन आवश्यकताओं के लिए इंजीनियरिंग सॉल्यूशन देती है।

सोंगर ड्रोन 5 किमी के दायरे में काम करता है
पाकिस्तानी सेना ने 9 और 10 मई को भारत पर तुर्की निर्मित ‘सोंगर’ सशस्त्र ड्रोन लॉन्च किया था। केंद्र सरकार ने भी कहा था कि यह अंकारा स्थित रक्षा कंपनी असीसगार्ड द्वारा विकसित सोंगर ड्रोन है। यह तुर्की सेना का पहला सशस्त्र ड्रोन है। पाकिस्तानी ड्रोन भारत की सीमा के बहुत नज़दीकी इलाकों से लॉन्च किए गए थे।
एसिसगार्ड की वेबसाइट पर उत्पाद पोर्टफोलियो पृष्ठ पर दी गई जानकारी के अनुसार, सोंगर पांच प्रकारों में उपलब्ध है, जिसमें एक गैर-घातक भूमिका वाला भी शामिल है। पांचों वैरिएंट में उनके हथियारों के आधार पर अंतर किया गया है। 5.56 x 45 मिमी असॉल्ट राइफल, 2 x 40 मिमी ग्रेनेड लांचर, 6 x 40 ड्रम-प्रकार ग्रेनेड लांचर, और 3 x 81 मिमी मोर्टार ग्रिपर। गैर-घातक संस्करण में आठ आंसू गैस या धुंआ गैस के कनस्तर तक ले जाया जा सकता है।
ग्रेनेड-लॉन्चर संस्करण में नजदीकी हवाई सहायता क्षमता है और यह दो ग्रेनेड तक दाग सकता है। इनकी प्रभावी रेंज 400-450 मीटर है।
