देहावसान के पूर्व देश और समाज का ऋण चुकाना भी धर्म

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देहावसान के पूर्व देश और समाज का ऋण चुकाना भी धर्म

सेवानिवृत्ति को बनाए देश और समाज का ऋण चुकाने की उम्र, प्रायः सेवानिवृत्ति तक घर -परिवार के दायित्व पूर्ण हो जाने पर व्यक्ति अधिक एकाग्रता और निष्ठा से कर सकता है उऋण होने के प्रयास

व्यक्ति रामायण के ही दो पात्र जटायु और सम्पाति से सीख लेकर अपना शेष जीवन व्यतीत कर सकता है।

परमार्थ और परोपकार में लगाई गई सम्पत्ति संसार को सुंदर बनाकर आपके परलोक को भी सुंदर बना सकती है।
भोपाल। प्रायः व्यक्ति मृत्यु तक कोई काम नहीं कर पाता जिससे समाज और देश का हित हो। देहावसान के पूर्व देश और समाज का ऋण चुकाना भी धर्म होता है। जो व्यक्ति यह धर्म निभाता है मृत्यु के बाद उसके चेहरे पर संतोष के भाव देखे जा सकते हैं।

ब्रह्मचर्य और गृहस्थ आश्रम प्रायः देश और समाज के ऋणी होने की अवस्था होती है। इन दोनों आश्रमों में देश और समाज के ऋण से उऋण होने का प्रयास कम ही किया जाता है। शिक्षा दीक्षा प्राप्त करने और रोजगार ढूँढने के लिए प्रयासरत होने तथा गृहस्थ आश्रम में प्रवेश करने पर घर परिवार और बीवी बच्चों की जवाब दारी पूरी करते ही समय कब निकल जाता है, पता नहीं चलता।

समय प्रबंधन करके कुछ लोग ब्रह्मचर्य और गृहस्थ आश्रम में भी देश और समाज के ऋण से उऋण होने का प्रयास करते दिखाई दे जाते हैं, पर ऐसे सदस्य विरले होते हैं।

वानप्रस्थ और सन्यास आश्रम देश और समाज का ऋण चुकाने के लिए सर्वोत्तम समय होता है। इस अवस्था में व्यक्ति रामायण के दो पात्र जटायु और सम्पाति से सीख लेकर अपना शेष जीवन व्यतीत कर सकता है।

अपने आसपास पेड़ पौधे लगाकर, बच्चों को ट्यूशन पढ़ाकर, पशु- पक्षियों के लिए दाना -पानी की व्यवस्था कर, रविवार या किसी निश्चित दिन बच्चों को नैतिक शिक्षा देकर और कहानी सुना कर ,देश और समाज के ऋण से उऋण होने का प्रयास किया जा सकता है। इस उम्र में अपनी पसंद का कोई भी काम करके व्यक्ति अपनी अपूर्ण इच्छाओं को पूरा करने का प्रयास कर सकता है। इससे व्यक्ति को खुशी तो मिलती ही है, समाज तथा देश की सेवा में समय का सदुपयोग भी सुनिश्चित किया जा सकता है।

व्यक्ति अपनी कमाई का कुछ अंश समाज सेवा के लिए भी व्यय करके अपने पुरुषार्थ और परिश्रम की कमाई को पुण्य कार्य में लगा सकता है। घर परिवार के लिए संजोयी सम्पत्ति घर परिवार तक सीमित रहती है पर परमार्थ और परोपकार में लगाई गई सम्पत्ति संसार को सुंदर बनाकर आपके परलोक को भी सुंदर बना सकती है।
सुखवाड़ा आश्रम, भोपाल
9425392656

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