भोपाल में आबकारी उपायुक्त के घर ईडी का छापा

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आलोक खरे। - Dainik Bhaskar

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने आबकारी विभाग के उपायुक्त आलोक खरे भोपाल, इंदौर, जबलपुर और रीवा के ठिकानों पर आज सुबह छापेमारी की है। भोपाल में खरे के साथ आबकारी विभाग के एक और अधिकारी के यहां भी सर्चिंग की सूचना है। यह कार्रवाई आबकारी विभाग के फर्जी एफडी मामले से भी जुड़ी बताई जा रही है। हालांकि अभी तक इस मामले में ईडी की ओर से अधिकृत तौर पर कुछ नहीं कहा गया है।

ईडी ने यह कार्रवाई लोकायुक्त छापे के आधार पर शुरू की है। लोकायुक्त पुलिस ने छह साल पहले आलोक खरे के सात ठिकानों पर छापेमारी की थी। इनमें भोपाल में दो, इंदौर में दो, रायसेन में दो और छतरपुर में एक जगह शामिल थी। लोकायुक्त जांच में करीब 100 करोड़ से अधिक की संपति का खुलासा हुआ था। लोकायुक्त की जांच में इंदौर के पॉश इलाके में एक पैंट हाउस और एक बंगला पता चला था। भोपाल के चूनाभट्टी और बाग मुंगालिया में दो बड़े बंगले और कोलार में फार्म हाउस की जमीन है।

रायसेन में दो फार्म हाउस हैं। लोकायुक्त जांच में इंदौर के बंगले से 10 लाख रुपए और रायसेन के फार्म हाउस से पांच लाख रुपए कैश मिले थे। सहायक आबकारी आयुक्त खरे का छतरपुर स्थित निवास की कीमत भी करोड़ों रुपए है। खरे के छतरपुर स्थित निवास से विदेशी मुद्रा भी मिली थी। खरे ने अपनी पत्नी के नाम पर रायसेन में फलों की खेती करना बताया था। खरे का भोपाल में बंगला नंबर 45 फेस 1 गार्डन सिटी जाटखेड़ी होशंगाबाद रोड स्थित घर पर है।

कांग्रेस ने उठाए सवाल, कहा-संजीव दुबे सरगना

प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने आबकारी आयुक्त और शराब कारोबारियों के ठिकानों पर ईडी की कार्यवाही के बाद सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए हैं। पार्टी का कहना है कि इंदौर के फर्जी चालान कांड का मुख्य आरोपी एवं सरगना तत्कालीन आबकारी अधिकारी संजीव दुबे है। पार्टी ने सवाल किया है कि लोकायुक्त और ईओडब्ल्यू में कई शिकायतों और 10 साल से चल रही जांच के बाद भी भ्रष्ट अधिकारी को मुख्यमंत्री ने जबलपुर में पदस्थ क्यों किया। पोल खुलने के बाद चंदा इकट्‌ठा कर अधिकारियों ने 22 करोड़ रुपए सरकार के खाते में जमा करा दिए, पर सवाल यह है कि यह धन आया कहां से।

पार्टी ने कहा है कि पीएमओ के बगैर ईडी एक इंच भी नहीं सरक सकती है। इसलिए या तो मोदी सरकार की रुचि अवैध भागीदारी की हिस्सेदारी में है या प्रदेश भाजपा सरकार की चौकीदारी में। पार्टी ने कहा कि शराब कारोबार में अवैध वसूली के लिए भाजपा का डबल इंजन अब ईडी के जरिए बड़ी वसूली का बड़ा खेल खेलना चाहता है। वरना अपने क्लाइंट पर छापे नहीं मारते।

इंदौर में 18 ठिकानों पर कार्रवाई

इंदौर में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने सोमवार को एक साथ 18 ठिकानों पर छापे मारे हैं। इनमें ज्यादातर शराब कारोबारी हैं। अल सुबह पहुंची ईडी की टीमों ने सर्चिंग शुरू कर दी है। ईडी के सूत्रों के मुताबिक बसंत बिहार कॉलोनी, तुलसी नगर और महालक्ष्मी नगर में कार्यवाही की है। फर्जी चालान और आबकारी घोटाले को लेकर यह कार्यवाही की जा रही है। यह मामला साल 2018 में सामने आया था। आरोप है कि घोटाले को आबकारी अफसरों की मिलीभगत से अंजाम दिया गया था। घोटाले का आंकड़ा 100 करोड़ रुपए तक पहुंचने के आसार हैं।

ईडी ने इंदौर के तुलसी नगर में भी छापे मारे है।
ईडी ने इंदौर के तुलसी नगर में भी छापे मारे है।

आबकारी घोटाला, फर्जी चालान मामले में हुई छापेमारी

इंदौर जिला आबकारी अधिकारी कार्यालय में साल 2015 से 2018 के बीच सरकारी गोदाम से शराब लेने के लिए इस्तेमाल हुए 194 बैंक चालानों में गड़बड़ी सामने आई थी, जिसमें हजारों के बैंक चालानों को लाखों रुपए का बनाकर गोदामों से उतनी शराब उठाकर ठेकेदारों ने अपनी सरकारी शराब दुकान से बेच दी थी।

इसी मामले में ईडी को शिकायत की गई थी, जिसके बाद ईडी ने इस मामले की जांच 2024 में शुरू कर दी थी।

इनके ठिकानों पर पड़े छापे

शराब ठेकेदार एमजी रोड समूह के अविनाश और विजय श्रीवास्तव, जीपीओ चौराहा समूह के राकेश जायसवाल, तोपखाना समूह के योगेंद्र जायसवाल, बायपास चौराहा देवगुराड़िया समूह राहुल चौकसे, गवली पलासिया समूह सूर्यप्रकाश अरोरा, गोपाल शिवहरे, लवकुश और प्रदीप जायसवाल के ठिकानों पर छापे पड़े हैं।

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