नेताओ को भी पत्रकार कोटे से आवंटित सरकारी आवास बकाया लाखो में ?

मध्यप्रदेश शासन पत्रकारो का पत्रकारों के साथ ये कैसा उचित व्यवहार है ।
शासन ख़ुद ही अपनी योजनो एवं नियमो को खुद ही मुँह चिढ़ा रहे है । नियम अनुसार भोपाल सीमा में अगर पत्रकार का या उसके माता पिता का स्वयं का मकान है तो उसे प्रेसकोटे से मकान आवंटन नही किया जा सकता साथ ही अगर वो संस्था छोड़ चुका है तो उसे बाज़ार की कीमत से किराया देना होगा ?
ये बात यही खत्म नही होती जंसम्पर्क में आवास आवंटन के 70 से ऊपर फॉर्म पेंडिंग है जिसमे से 10 महिला पत्रकारो के है जिन्हें सच मे आवास की आवश्यक्ता है लेक़िन गृह मंत्री मोहन यादव के गृह विभाग में फाइल धूल खा रही है ।
साथ ही 2024 के आंकड़ों को आप स्वयं देखे की किसका कितना बकाया है । और यह भी देखे की नेताओ को कैसे प्रेस कोटे से मकान आज भी आवंटित है । जिसका किराया लाखो में है ?
बाकी मोहन की सरकार सब मोहन की लीला है ?
