पर्यटकों पर गोली धर्म की बोली

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धर्म पूछ कर पहलगाम में हिंदू पर्यटकों के नरसंहार ने इस्लामिक टेररिज्म का पाकिस्तानी रक्तरंजित कायराना चेहरा उजागर कर दिया है. भारतीयों में गम के साथ गुस्सा है. हिंदुस्तान के हर कोने से पाकिस्तान को सबक सिखाने की मांग उठ रही है.
पाकिस्तान के खिलाफ प्रदर्शन हो रहे हैं. पीएम नरेंद्र मोदी अरब का अपना दौरा बीच में छोड़कर भारत लौट आए हैं. घटना के तुरंत बाद गृहमंत्री ने श्रीनगर पहुंच शहीद पर्यटकों को श्रद्धांजलि दी. पीड़ित परिवारों को सांत्वना दी. उस स्थान का जायजा लिया, जहां आतंकवादियों ने पर्यटकों पर हमला किया था.
प्रधानमंत्री और गृहमंत्री की प्रतिक्रियाओं में आक्रोश और दोषियों को सबक सिखाने के संकेत साफ दिख रहे हैं. भारत इस्लामिक आतंकवादी पाकिस्तान से बदला चाहता है. इजरायल जैसा हमला चाहता है. छुटपुट सर्जिकल स्ट्राइक से आगे बढ़कर पाकिस्तान को ऐसा सबक सिखाना पड़ेगा कि, भविष्य में फिर ऐसी हिमाकत न कर सकें.
निर्विवाद रूप से यह तो तय है कि, हमला पाकिस्तान प्रायोजित है. धीरे-धीरे इसके पुख्ता प्रमाण भी सामने आ रहे हैं. पाकिस्तान के सेना प्रमुख ने हाल ही में हिंदू-मुस्लिम धर्म के आधार पर तकरीर करते हुए हिंदुओं के लिए हेट स्पीच दी थी.
पाकिस्तान आज अपने आंतरिक संकटों से ग्रस्त है. पाकिस्तानी सेना के खिलाफ खुला विद्रोह हो रहा है. बलूचिस्तान तो सेना के हाथों से निकल गया है. पीओके में भी पाकिस्तानी सेना के खिलाफ आंदोलन हो रहे हैं. इस देश की अर्थव्यवस्था रसातल में पहुंच गई है. महंगाई सारी सीमाएं पार कर चुकी है. लोगों का जीना दूभर हो गया है.
पाकिस्तान के आर्मी चीफ को अमेरिका अपने देश में घुसने नहीं देता. यही दुनिया का अकेला देश है, जिसका हवाई जहाज पर कर्ज देने वाले देश ने कब्जा कर लिया. पाकिस्तान कटोरा लेकर भीख मांग रहा है. यहां तक कि इस्लामिक देश भी पाकिस्तान का साथ नहीं दे रहे हैं. उसकी धार्मिक आतंकवादी एक्टिविटीज के कारण ही पाकिस्तान दुनिया में अलग-अलग पड़ा हुआ है.
कश्मीर में शांति बहाली और पाकिस्तान में फैली अशांति से पाकिस्तान का जीना दूभर हो गया है. पाकिस्तान जब भी अपने आतंरिक मामलों से घिरता है तब ध्यान भटकाने के लिए इसी प्रकार की आतंकवादी गतिविधियों को अंजाम देता है. उसका केरेक्टर और उसकी चालबाजियां पूरी दुनिया को पता चल गई हैं.
प्रगति के मामले में भारत और पाकिस्तान में जमीन आसमान का अंतर है. आजादी के समय अगर धर्म पर बंटवारा हो गया था तो इसे पूरी तरह से अमल में लाना था. अगर ऐसा हुआ होता तो भारत आज अमेरिका से ज्यादा विकसित देशों की श्रेणी में होता और दूसरी तरफ पाकिस्तान के हालात सीरिया से भी बदतर होते.
इजरायल भारत के लिए मॉडल हो सकता है. इस्लामी आतंकवाद का जितने लंबे समय तक और जिस ताकत के साथ इस देश ने मुकाबला किया है, इसका दूसरा कोई उदाहरण नहीं हो सकता. भारत के साथ भी पड़ौसी पाकिस्तान वैसे ही आतंकवादी गतिविधियां करता है, जैसा इस्लामी आतंकवादी संगठन इजराइल में करते हैं. लेकिन भारत अपनी नैतिक सीमाओं में खुद अपने को बाँध लेता है, यही भारत की कमजोरी साबित हो जाती है. पाकिस्तान के साथ जब भी युद्ध हुआ है तब भारत की सेना ने हर बार पाकिस्तान को धूल चटाई है. लेकिन हर बार कूटनीतिक रूप से भारत की सरकारें पाकिस्तान को कोई न कोई रास्ता दे देती हैं.
बांग्लादेश में हिंदुओं के खिलाफ वातावरण में भी पाकिस्तान भूमिका निभा रहा है. पहलगाम की आतंकवादी घटना में भी हिंदू धर्म को टारगेट किया गया है. नापाक आतंकवादियों ने पर्यटकों का धर्म पूछ कर गोली मारी है. जहां उन्हें धर्म स्पष्ट नहीं हुआ वहां उन्होंने आइडेंटी कार्ड भी देखा. यहां तक कि, कलमा पढ़ने के लिए भी कहा गया.
धर्म के नाम पर अगर इतना बड़े धार्मिक नरसंहार को अंजाम दिया जा सकता है, तो फिर अधर्म के नाम पर तो कुछ करने की जरूरत नहीं है. अगर आतंकवादियों के लिए यह धर्म की बात है तो फिर उनके लिए अधर्म की बात क्या हो सकती है?
आतंकवादी घटना के खिलाफ़ जम्मू-कश्मीर में प्रदर्शन हो रहे हैं. ऐसी घटना कश्मीरियों की रोजी-रोटी पर हमला है. अगर कश्मीर में पर्यटन बंद हो जाएगा तो फिर इस जन्नत में जीना मुहाल हो जाएगा. पाकिस्तान यही चाहता है कि, कश्मीरियों की प्रोस्पेरिटी को बाधित किया जाए जिससे फिर उनमें पाकिस्तान की गुलामी की मनोवृति विकसित हो.
अब तो यह सोचने की कोई गुंजाइश ही नहीं है कि, आतंकवाद का कोई धर्म होता है. भारत वैसे हमेशा मानता रहा है कि, आतंकवाद का कोई धर्म नहीं होता लेकिन इस बार तो आतंकवादियों ने सारी हदें पार कर दी. चुन-चुन कर हिंदुओं को मारा गया है. हिंदू अचानक आतंकवादियों के निशाने पर शायद इसीलिए आए हैं, क्योंकि भारत में राजनीतिक ताकत हिंदुओं ने बनाई है. हिंदुत्व की विचारधारा सत्ता पर काबिज़ है. जब से हिंदुत्व की सरकार आई हैं तब से पाकिस्तान से बातचीत बंद है. यहां तक कि, व्यापार भी बंद है.
बीजेपी सरकार का स्पष्ट मानना है, कि आतंकवाद और संवाद साथ-साथ नहीं चल सकते. इस आतंकवादी घटना के बाद अब तो भारत और पाकिस्तान के बीच आत्मरक्षा के युद्ध का माहौल है. भारत बदला जरूर लेगा. इस बार का बदला पाकिस्तान को बहुत दिनों तक याद रहेगा.
आतंकवादी घटना का दिल दहलाने वाला दृश्य पूरे भारत ने देखा है. एक भारतीय नारी अपने पति को गोली लगने के बाद आतंकवादियों से गुहार लगाती सुनाई पड़ रही हैकि, उसे भी गोली मार दें. लेकिन आतंकवादी कह रहे हैंकि उसे नहीं मारेंगे वह जाकर मोदी को बताएं. पाकिस्तान के आतंक की गोली की आवाज़ मोदी के दिल तक पहुंच गयी हैं.
अब पाकिस्तान को भारत और मोदी के एक्शन का इंतजार करना चाहिए. अभी भारत की ओर से किसी भी अधिकृत प्रवक्ता या मंत्री ने पाकिस्तान पर आरोप नहीं लगाया है लेकिन फिर भी पाकिस्तान के रक्षा मंत्री प्रीआम्ट करके इस घटना में पाकिस्तान का रोल नहीं होने की बात कर चोर की दाढ़ी में तिनका वाली कहावत सही साबित कर रहें हैं.
पीएम नरेंद्र मोदी भारत के विश्वास के प्रतीक हैं. इस आतंकवादी हमले ने भारत के विश्वास पर चोट की है. अब भारत सरकार को देश की भावनाओं पर मरहम लगाने की जरूरत है. अब, तब तक एक्शन की जरूरत है जब तक पाकिस्तान के आतंकवादी ठिकाने और बेसकैम्प बर्बाद ना हो जाए. भारत को अब साबित करना हैकि, आखिरकार भारत पाकिस्तान का बाप है.

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