केरल में BJP का खाता खुलना मुश्किल, लेकिन मोदी पॉपुलर:कांग्रेस गठबंधन जीत सकता है 15-18 सीटें, लेफ्ट को 2 से 4 सीट
‘मोदी पसंद हैं, लेकिन BJP नॉर्थ में जो कर रही है, वो केरल में नहीं चाहिए। यहां सब मिल-जुलकर रहना चाहते हैं।’
‘लेफ्ट की सरकार करप्ट है। हर जगह करप्शन है। सरकार के पास सैलरी-पेंशन देने के पैसे भी नहीं हैं।’
‘फिलहाल कांग्रेस ही ऑप्शन है। कांग्रेस के फैन नहीं हैं, लेकिन धर्म के नाम पर भेदभाव करने वाले नहीं चाहिए।’
केरल की राजधानी तिरुवनंतपुरम और कोच्चि में लोगों से बात करने पर बार-बार लोग यही बातें दोहराते हैं। चुनाव से जुड़े सवालों के जवाब में जो पहली बात वे जोर देकर कहते हैं, वो है, ‘ये पढ़े-लिखे लोगों का स्टेट है, यहां सब बराबर हैं। भेदभाव या लड़ाई-झगड़े की पॉलिटिक्स किसी को नहीं चाहिए।’ एक पक्ष ये भी है कि लोगों को बतौर लीडर मोदी पसंद जरूर हैं, लेकिन डेवलपमेंट कर रहे हैं सिर्फ इसलिए।

केरल की सभी 20 लोकसभा सीटों पर दूसरे फेज में 26 अप्रैल को वोटिंग होनी है। केरल की हवा का रुख जानने दैनिक भास्कर की टीम ग्राउंड पर पहुंची। नेताओं, एक्सपर्ट्स और आम लोगों से मिलकर ये 4 बातें समझ में आती हैं…
1. यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट, यानी UDF इस बार भी सबसे ज्यादा सीटें जीतने की स्थिति में है। कांग्रेस मजबूत स्थिति में है और उसने 15 सीटों पर पुराने कैंडिडेट को ही टिकट दिया है। UDF के खाते में 15-18 सीटें आ सकती हैं। इस गठबंधन ने 2019 में 19 सीटें जीती थीं।
2. BJP केरल के तटीय इलाकों में पकड़ मजबूत कर रही है। त्रिचूर और तिरुवनंतपुरम सीट पर BJP कड़ी टक्कर दे सकती है। पार्टी का वोट बैंक 13% से बढ़कर 17% तक हो सकता है। सीट जीतना इस बार भी मुश्किल ही नजर आ रहा है। NDA का स्कोर 0-2 रह सकता है।
3. राज्य में लगातार दूसरी बार लोगों ने लेफ्ट की सरकार को चुना था। करप्शन के आरोपों के बाद लोग लेफ्ट से काफी नाराज हैं। हालांकि, कई सीटों पर लेफ्ट के मजबूत उम्मीदवार हैं। LDF का स्कोर 2-4 सीट हो सकता है।
4. PM मोदी लोगों के बीच लोकप्रिय हैं। लोग उन्हें मजबूत लीडर मानते हैं और डेवलपमेंट को लेकर उनकी सोच से प्रभावित हैं। हालांकि, BJP की इमेज एक धर्म विशेष को टारगेट करने वाली पार्टी की है, इससे लोग नाराज हैं। आने वाले 10 साल में BJP और मजबूत होती नजर आ रही है।

BJP केरल में आगे बढ़ रही है, ये अब किसी से नहीं छिपा है
केरल में इस चुनाव में क्या होने जा रहा है, ये समझने के लिए हम सबसे पहले अंग्रेजी अखबार ‘द हिंदू’ के पूर्व एडिटर गौरी दास नायर के पास पहुंचे। वे कहते हैं, ‘अब तक केरल में सिर्फ UDF और LDF ही प्रमुख अलायंस थे। इस बार एक तीसरा प्लेयर NDA भी है। BJP भले ही कुछ सीटों पर असर रखती हो, लेकिन उसे सीरियसली लिया जा रहा है।’

केरल हाईकोर्ट में सीनियर लॉयर और पॉलिटिकल एनालिस्ट जयशंकर भी तकरीबन ऐसा ही मानते हैं। वे कहते हैं, ‘केरल में फिलहाल नॉर्थ की तरह BJP का कोई खास प्रभाव नहीं है। हालांकि, 3-4 सीटें ऐसी हैं, जहां BJP के कैंडिडेट सेकेंड या थर्ड पोजिशन पर आ सकते हैं।’
‘2 सीटें ऐसी हैं, जहां BJP काफी मजबूत है। BJP का वोट शेयर बढ़ना तय है। ये बढ़कर 17% हो सकता है। केरल के लोग अब मोदी को पसंद करने लगे हैं।’

BJP किन इलाकों में मजबूत हो रही है, इस सवाल के जवाब में जयशंकर कहते हैं, ‘पत्तरडटा, अलपुरा, कोझिकोड, कासरगोड और पल्लकड़ जैसी सीटों पर भी BJP के वोट बढ़ते नजर आ रहे हैं। नायर कम्युनिटी के ज्यादातर लोग BJP के सपोर्टर बन रहे हैं। अपर क्लास क्रिश्चियन में भी BJP के लिए सपोर्ट नजर आ रहा है।’

‘केरल में न मजबूत लीडर, न कार्यकर्ता, BJP कोई चमत्कार नहीं करेगी’
अंग्रेजी अखबार इंडियन एक्सप्रेस के एडिटर रहे एमके दास की राय गौरी दास और जयशंकर से थोड़ी अलग है। वे कहते हैं, ‘इस बार भी BJP का केरल में खाता नहीं खुलने वाला है। अब भी मोदी यहां बहुत पॉपुलर लीडर नहीं बन पाए हैं। सिर्फ शहर के लोग उन्हें जानते हैं।’
‘BJP के साथ सबसे बड़ी समस्या है कि यहां उनके पास कोई मजबूत लीडर नहीं है। BJP इस बार भी कोई चमत्कार नहीं करने वाली है।’

केरल में BJP के लगातार फेल होने के सवाल का जवाब हमें दनम बिजनेस मैगजीन के एडिटर कुरियन अब्राहम देते हैं। वे कहते हैं, ‘कांग्रेस या UDF के फिर से जीतने के पीछे सबसे बड़ी वजह है केरल के आम लोगों का सेकुलर होना। यहां लोग धर्म-जाति की राजनीति नहीं चाहते हैं। नॉर्थ में BJP के आने के बाद से जो माहौल बना हुआ है, वैसा माहौल केरल के लोग यहां नहीं चाहते हैं।’
कांग्रेस केरल में मजबूत, लेकिन लड़ाई पिछली बार की तरह आसान नहीं
पॉलिटिकल एनालिस्ट जयशंकर इस सवाल के जवाब में कहते हैं, ‘कांग्रेस के लोग मुस्लिम, क्रिश्चियन और हिंदू सभी के आयोजनों में जाते हैं। इसे केरल में काफी अच्छा माना जाता है। यहां पिछले कुछ चुनाव से लोगों का रुझान साफ रहा है। विधानसभा चुनावों के लिए वे LDF को सपोर्ट करते हैं, जबकि लोकसभा में वो UDF को अपना वोट देना पसंद करते हैं।’
‘इस बार ये रुझान बदला है। लोगों को पता है कि BJP की सरकार आने वाली है। पिछली बार उन्हें कांग्रेस के अच्छा करने की उम्मीद थी और UDF को 19 सीटें मिली थीं। अब इस बात का कितना इम्पैक्ट पड़ेगा, ये नतीजों के बाद ही पता चल सकेगा। कम्युनिस्ट पार्टियों की नेशनल पॉलिटिक्स में कोई जगह ही नहीं है, इसलिए भी कांग्रेस का अपर हैंड है।
हालांकि, दनम बिजनेस मैगजीन के एडिटर कुरियन अब्राहम कहते हैं, ‘कांग्रेस के पास केरल में अपर हैंड जरूर है, लेकिन इस बार उनके पास फंड नहीं है। पार्टी में काफी अंदरूनी लड़ाई है। इस वजह से उसका कैडर भी कम्युनिस्ट की तरह समर्पित नहीं है।’

क्या अपर कास्ट क्रिश्चियन भी BJP की तरफ झुकने लगे हैं?
इस सवाल के जवाब में पॉलिटिकल एनालिस्ट जयशंकर कहते हैं, ‘केरल में अलग-अलग चर्च हैं। जैसे- लैटिन कैथलिक, सीरियन या चर्च ऑफ साउथ इंडिया। यहां अपर कास्ट, OBC और दलित तीनों तरह के क्रिश्चियन हैं। BJP के लिए अपर कास्ट क्रिश्चियन में सपोर्ट नजर आ रहा है।’
‘क्रिश्चियन कम्युनिटी को लगने लगा है कि वे काफी समय से कांग्रेस को सपोर्ट करते रहे हैं, लेकिन कांग्रेस का पूरा ध्यान सिर्फ मुस्लिम कम्युनिटी पर रहता है। कहीं-कहीं क्रिश्चियन और मुस्लिम में तनाव के हालात भी बन रहे हैं। BJP इसी का फायदा उठा रही है।’
कांग्रेस को हराने के लिए BJP को साइलेंट सपोर्ट कर रही CPM
केरल में इस बात की भी चर्चा है कि कई सीटों पर लेफ्ट ने BJP के साथ डील कर ली है। इस चर्चा पर द हिंदू के पूर्व एडिटर गौरी दास नायर कहते हैं, ‘LDF इस बार कुछ और सीटें जीत सकती है। CPM 6-8 सीटों का दावा कर रही है, लेकिन ये मुश्किल नजर आ रहा है।’
‘CPM के लिए ये लड़ाई पार्टी का नेशनल स्टेटस बचाने की भी है। इसलिए ऐसी अफवाह भी है कि कहीं-कहीं CPM चुपचाप BJP को सपोर्ट कर रही है।
नायर आगे कहते हैं, ‘हालांकि मैं आपको बता दूं कि केरल में ऐसा करना आसान नहीं है। यहां लोग पढ़े-लिखे हैं और किसी भी पार्टी को आंख बंद करके सपोर्ट नहीं करते हैं। यहां लोग केंद्र सरकार को लेकर एक राय रखते हैं कि वो जानबूझकर स्टेट गवर्नमेंट को सपोर्ट नहीं करती। ये BJP के खिलाफ जाता है।’
लोग लेफ्ट से खुश नहीं, मोदी पसंद, लेकिन BJP की पॉलिटिक्स नहीं
तिरुवनंतपुरम में हमारी मुलाकात केरल यूनिवर्सिटी की स्टूडेंट नंदना से हुई। चुनाव के सवाल पर नंदना कहती हैं, ‘मैं केरल सरकार के काम से खुश नहीं हूं, लेकिन मैं BJP को भी पसंद नहीं करती। मैं यहां और देश में कांग्रेस का समर्थन करती हूं। मुझे BJP का अथॉरिटेटिव एटीट्यूड पसंद नहीं है।’

तिरुवनंतपुरम के एक नामी सिविल सर्विस कोचिंग इंस्टीट्यूट में टीचर अच्युत गंगाधरन को मोदी पसंद हैं। वे कहते हैं, ‘हम लेफ्ट की सरकार से अब खुश नहीं हैं, सिर्फ फाइनेंशियल क्राइसिस की बात नहीं है। विकास को लेकर किए गए वादे पूरे नहीं हुए। PM मोदी मुझे पसंद हैं और उन्होंने दुनिया में देश का नाम ऊंचा किया है।’ हालांकि अच्युत ये भी मानते हैं कि BJP इस बार भी केरल में कोई सीट नहीं जीत पाएगी।
हालांकि, ऐसा भी नहीं है कि लेफ्ट को लेकर सभी नाराज हैं। चुनाव के बारे में आम लोगों से बात करते देख सिक्योरिटी गार्ड की जॉब करने वाले ओम कुमार हमसे खुद मिलने आ जाते हैं। वे कहते हैं, ‘मुझे लेफ्ट की सरकार पसंद है। यहां वे लोग ही अच्छे हैं। पेंशन, सस्ता खाना और राशन देते हैं। सब्सिडी भी देते हैं। मोदी-राहुल नहीं चाहिए। यहां लेफ्ट ही अच्छा है।’

सिविल सर्विसेज की तैयारी कर रहे इम्तियाज के मुताबिक, ‘एक-दो सीटें छोड़ दें तो NDA मुकाबले में नहीं है। यहां BJP के लिए समर्थन नहीं है, लेकिन मोदी की मजबूत लीडर की छवि से लोग प्रभावित हैं। हमें ऐसा लीडर चाहिए, जो डेवलपमेंट तो करे, लेकिन सभी को साथ लेकर भी चले।’
कोवलम बीच पर हमारी मुलाकात म्यूजिक टीचर मोहन से हुई। वो राज्य में लेफ्ट की सरकार से काफी नाराज हैं। कहते हैं, ‘लेफ्ट की सरकार का काम बहुत ही खराब है। हर जगह करप्शन है, कोई विकास नहीं हुआ है। लेफ्ट नेताओं के परिवार के लोग पैसा कमा रहे हैं। लोगों को कुछ नहीं मिल रहा।’

अब पढ़िए पॉलिटिकल पार्टियां क्या कह रहीं…
कांग्रेस (UDF): BJP केरल को नहीं समझती, उसका वोट शेयर इस बार और कम होगा
तिरुवनंतपुरम सीट से UDF उम्मीदवार और सीनियर कांग्रेस लीडर शशि थरूर इन दिनों अपने चुनावी कैंपेन में बिजी हैं। केरल में चुनावी रिजल्ट के सवाल पर वे कहते हैं, ‘BJP ने जो उत्तर भारत में किया है, उसे साउथ में सब देख रहे हैं। यहां के लोग इस तरह का माहौल और चीजें नहीं चाहते हैं। किसी एक वर्ग के खिलाफ बोलना हमारे कल्चर में नहीं है।’

तिरुवनंतपुरम कांग्रेस ऑफिस में हमारी मुलाकात कांग्रेस की राष्ट्रीय प्रवक्ता लावण्या बल्लाल जैन से हुई। वे कहती हैं, ‘BJP केरल में एक भी सीट नहीं जीत पाएगी। उसका वोट शेयर भी पहले से कम हो जाएगा। हाल ये है कि CPM और BJP पर्दे के पीछे हाथ मिला चुके हैं।’
लावण्या आगे कहती हैं, ‘केरल के CM पिनाराई विजयन के बेटे के खिलाफ कोई केस चल रहा है और सब जानते हैं कि BJP की वॉशिंग मशीन में जाने के बाद कैसे केस खत्म हो जाते हैं। वोटर बहुत स्मार्ट हैं और सब देख रहे हैं। केरल में वोटर्स BJP के खिलाफ हैं और लेफ्ट के मिसमैनेजमेंट से परेशान हैं। वे कांग्रेस की तरफ देख रहे हैं।’

लेफ्ट (LDF): राहुल गांधी भागकर वायनाड क्यों आए, किसी मजबूत नेता से लड़ते
CPI-M के पोलित ब्यूरो मेंबर और केरल के पूर्व एजुकेशन मिनिस्टर एमए बेबी दावा करते हैं, ‘केरल में LDF इस बार 20 साल पुराना इतिहास दोहराने जा रहा है। 2004 में हमने 19 सीटें जीती थीं और 1 सीट UDF के खाते में गई थी। इस बार भी कुछ ऐसा ही रिजल्ट आएगा।’
बेबी आरोप लगाते हैं, ‘कांग्रेस केरल में BJP को ही मजबूत कर रही है। आखिर राहुल गांधी वायनाड से चुनाव क्यों लड़ रहे हैं। यहां तो BJP कोई ताकत ही नहीं है। वे किससे लड़ रहे हैं। उन्हें ऐसी सीट चुननी चाहिए थी, जहां अलायंस की मजबूती नजर आ सके या सामने BJP का कोई मजबूत नेता हो। इससे लोगों में अच्छा मैसेज जाता।’
‘मैं ये नहीं कहना चाहता कि वे BJP के खिलाफ सीधे लड़ने से डर रहे हैं, लेकिन BJP ऐसा ही कह रही है। इससे साफ है कि कांग्रेस को पता ही नहीं कि उसे क्या चाहिए।’

बेबी सिर्फ इतने पर ही नहीं रुकते। वे आगे कहते हैं, ‘कांग्रेस के केसी वेणुगोपाल राजस्थान से राज्यसभा मेंबर हैं। वो केरल में CPM के खिलाफ चुनाव लड़ रहे हैं। इससे यही मैसेज जाएगा कि जो नेशनल लेवल पर साथ में हैं, वो स्टेट में एक-दूसरे के खिलाफ हैं। केरल कांग्रेस के नेता चुनाव लड़ें तो समझ में आता है, लेकिन नेशनल लीडर्स यहां क्यों आ रहे हैं। वेणुगोपाल जीत भी जाते हैं तो क्या वो राज्यसभा सीट से रिजाइन करेंगे।’
‘राजस्थान में BJP सरकार में है। ऐसे में वो सीट भी BJP को मिल जाएगी। न चाहते हुए भी वेणुगोपाल राज्यसभा में BJP को मजबूत कर देंगे। अभी राज्यसभा में BJP के पास बहुमत नहीं है, लेकिन कांग्रेस उसे प्लेट में राज्यसभा सीट दे रही है। ये क्या बेवकूफी है।’
बेबी आगे कहते हैं, ‘हम लोगों से कह रहे हैं कि UDF के लोगों ने जनता की लड़ाई नहीं लड़ी, इसलिए उन्हें वोट न दें। इसके अलावा कई राज्यों में ऐसा हुआ कि जहां कांग्रेस मेजॉरिटी में थी और BJP के नंबर कम थे, फिर भी कांग्रेस के बजाय BJP ने सरकार बना ली। उन्होंने कांग्रेस के विधायकों को तोड़ लिया।’
‘हम लोगों को बता रहे हैं कि जब आप कांग्रेस और UDF के मेंबर को इलेक्ट करें तो यह सोच लें कि BJP को बहुमत नहीं मिला तो वो इन UDF सांसदों को खरीद सकती है। इसकी पूरी आशंका है।’
वो आगे कहते हैं, ‘अभी BJP में 100 से भी सांसद ज्यादा ऐसे हैं, जो कभी कांग्रेस में थे। ये भी लोगों को बताया जा रहा है। कुछ जगह कांग्रेस, BJP की रिक्रूटमेंट एजेंसी की तरह काम कर रही है। लीडर कांग्रेस जॉइन करते हैं और बाद में BJP में चले जाते हैं। केरल में कांग्रेस के बड़े नेता एके एंटनी की बेटी और बेटे ने BJP जॉइन कर ली और एंटनी कांग्रेस की तरफ से चुनावी मैदान में हैं।’

BJP: सब जानते हैं मोदी फिर PM बनेंगे, हमें इसका फायदा होगा
तिरुवनंतपुरम में हमारी मुलाकात यूनियन मिनिस्टर राजीव चंद्रशेखर से हुई। वे तिरुवनंतपुरम सीट से NDA के उम्मीदवार भी हैं। केरल में सीट जीतने के सवाल पर वो कहते हैं, ‘मैं नंबर गेम में नहीं पड़ता। मैं यहां जीतने के लिए आया हूं। एक मिशन पर आया हूं। यहां पर बदलाव लाना है और वो मैं लाकर रहूंगा।’

पेशे से वकील और BJP के केरल स्टेट ट्रेजरर कृष्णादास कहते हैं, ‘केरल के लोग ये समझ रहे हैं कि इस बार I.N.D.I. ब्लॉक का दिल्ली में आने का कोई चांस नहीं है। पिछले लोकसभा चुनाव में यहां ऐसी हवा बनाई गई थी कि कांग्रेस चुनाव जीतने वाली है और राहुल गांधी PM बनेंगे। इसलिए UDF ने राज्य की 20 में से 19 सीटें जीत ली थीं और एक सीट लेफ्ट के खाते में गई थी।’

कृष्णादास आगे कहते हैं, ‘इस बार केरल में हमें बड़ा ब्रेकथ्रू मिलने वाला है। केरल के लोगों से PM मोदी ने डबल डिजिट में सीटें देने की रिक्वेस्ट की है। हम मैक्सिमम सीटें जीतने की कोशिश कर रहे हैं। इस बार हमारे प्रदेश अध्यक्ष के सुरेंद्रन वायनाड से राहुल गांधी के खिलाफ मैदान में हैं। वहीं पथानामथिट्टा सीट से अनिल एंटनी मैदान में हैं। तिरुवनंतपुरम, अटि्टंगल, त्रिशूर सहित तमाम सीटों पर हवा BJP के पक्ष में है।’
वे कहते हैं, ‘केरल में वोट शिफ्टिंग का ट्रेंड रहा है। CPM-कांग्रेस को जब भी लगता है कि कहीं BJP जीतने वाली है तो वहां वे दोनों वोटों को आपस में शिफ्ट कर लेते हैं, ताकि किसी भी तरह BJP को हराया जा सके।’
‘पिछले विधानसभा चुनाव में पलक्कड़ से BJP कैंडिडेट ई श्रीधरन जीतने वाले थे, तब इन दोनों पार्टियों ने यही खेल करके उन्हें हराया था। इसलिए इस बार हमारा फोकस हर सीट पर 51% वोट लाने का है।’
