विराशा हाइट्स का मामला:ज्यादा किराए के लालच में बिना पुलिस वेरिफिकेशन दे दिया अनजान लोगों को फ्लैट, सटोरिए खिला रहे थे ऑनलाइन सट्टा; 10 गिरफ्तार

कोलार इलाके के पाॅश सोसायटी कैंपस विराशा हाइट्स के एक फ्लैट में रेड्डीबुक डाॅट क्लब के माध्यम से जालसाजों द्वारा ऑनलाइन सट्टा खिलाया जा रहा था। मकान मालिक ने ज्यादा किराए के लालच में अनजान लोगों को बिना पुलिस वेरिफिकेशन फ्लैट 30 हजार रुपए महीने के हिसाब से किराए पर दिया था। पुलिस ने फ्लैट पर दबिश देकर मौके से 10 जालसाजों को गिरफ्तार किया है। आरोपी रीवा, बिहार और ओडिशा के रहने वाले हैं। फ्लैट किराए पर लेने का मकसद केवल वहां से ऑनलाइन सट्टा संचालित करना था। पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ धोखाधड़ी और जुआ एक्ट के तहत मामला दर्ज किया है।
जानकारी के मुताबिक सटोरियों द्वारा आमतौर पर पाॅश सोसायटियों में फ्लैट किराए पर लेकर अवैध रूप से ऑनलाइन सट्टा खिलाया जाता है। इससे यह पुलिस की नजर से बचे रहते हैं। ऐसा ही फ्लैट सटोरियों ने कोलार इलाके के विराशा हाइट्स में 30 हजार रुपए किराए पर लिया था। पुलिस को फ्लैट नंबर एन-303 में कुछ संदिग्ध लोगों के होने की सूचना मिली थी। इसके बाद पुलिस की टीम ने रविवार सुबह विराशा हाइट्स के फ्लैट नंबर एन-303 पर दबिश दी। पुलिस ने दरवाजा खटखटाया तो बद्री प्रसाद साकेत ने दरवाजा खोला।
फ्लैट में 10 युवक मौजूद थे। फ्लैट में भारी मात्रा में अलग-अलग बैंकों की चेकबुक, पासबुक, एटीएम/डेबिड कार्ड, मोबाइल, लैपटाॅप और सिम पुलिस को मिलीं। मौके से पुलिस ने ग्राम पहिलपार रीवा निवासी सूरज साकेत, बद्रीप्रसाद साकेत, कुलदीप साकेत, पंकज साकेत, अरुण कुमार शाक्य, ग्राम पदमपुर ओडिशा निवासी राकेश नाग यादव, ग्राम बनीर सीतामढ़ी बिहार निवासी विनोद कुमार, ग्राम लोरी मनगवां रीवा निवासी सुदीप साकेत, ग्राम भदावर रीवा निवासी प्रदीप साकेत और ग्राम बंधवा भाईपाट रीवा निवासी दिलीप साकेत को गिरफ्तार किया है।
पूछताछ में आरोपियों ने ऑनलाइन रेड्डीबुक डाॅट क्लब के माध्यम से अलग-अलग गेम में दो से तीन गुना लाभ का लालच देकर लोगों को सट्टा खिलाना बताया।
रायपुर से होता है रेड्डीबुक डाॅट क्लब संचालित..
पूछताछ में आरोपियों ने रेड्डीबुक डाॅट क्लब के माध्यम से सट्टा खिलाना बताया है। आरोपियों द्वारा फर्जी तरीके से सिम जुटाई जाती थीं। अलग-अलग शहरों के लोगों से उनके बैंक खाते किराए पर लेकर या खरीदते हैं। आरोपियों द्वारा रेड्डीबुक डाॅट क्लब के माध्यम से कस्टमर्स का डाटा दिया जाता है।
इसके बाद अलग-अलग सिम से काॅल करके फर्जी नाम बताकर वेबसाइट पर अलग-अलग खेलों में दांव लगवाते हैं। उन्हें 2 से 3 गुना लाभ का प्रलोभन देकर सट्टा लगवाया जाता है। यह रकम किराए या खरीदे गए बैंक खातों में ट्रांसफर कराई जाती है। बैंक खातों में जमा राशि निकालकर टीम के सरगना रायपुर, छत्तीसगढ़ निवासी विक्की मित्तल और उसके साथी अनिल लालवानी को भेजी जाती है। सट्टे का संचालक विक्की और अनिल के कहने पर हो रहा था।
