यह कहानी है दिए और तूफान की…

यह कहानी है दिए और तूफान की… हम लाए हैं तूफान से कश्ती निकाल कर…। आज भारतीय जनता पार्टी का स्थापना दिवस है। मैं सौभाग्यशाली हूं कि मैं भी उन देश भर से 3500 आमंत्रित प्रतिनिधियों में दिल्ली के फिरोजशाह कोटला में उपस्थित था। मेरे साथ साथ इंदौर से उपस्थित श्री भंवर सिंह शेखावत
उस समय जनता पार्टी के महामंत्री थे तथा आदरणीय स्वर्गीय श्री उत्सवचंद्र जी पोरवाल जनता पार्टी के जिला अध्यक्ष।) तथा राजगढ़ जिले से श्री नारायण सिंह जी केसरी , आदरणीय मेघराज जी जैन जो उस भारतीय जनता युवा मोर्चा के प्रदेश के अध्यक्ष थे, वहां उपस्थित थे। अब जीवित शेष साथ उपस्थित हमारे इंदौर के सभी तपस्वी नेता स्वर्गीय श्री राजेंद्र जी धारकर, पंडित श्री वल्लभ जी शर्मा, नारायण राव जी धर्म, स्वर्गी भेरुलाल जी पाटीदार, स्वर्गीय निर्भय सिंह पटेल आदि अब दिवंगत हो चुके हैं। जब भारतीय जनता पार्टी की स्थापना हुई। नीचे दिए गए चित्र भाजपा स्थापना तथा प्रथम अधिवेशन के हैं।
समस्त देशवासियों को बधाई, शुभकामनाएं। जनसंघ की स्थापना के समय से हमारा सपना था की कश्मीर से धारा 370 समाप्त होगी, देश में एक ही समान नागरिक संहिता होगी, भारत में राष्ट्रवाद का सूर्योदय होगा। आज हमारा यह सपना पूरा होता दिख रहा है।
एक अखिल भारतीय राजनीतिक दल जनसंघ के रूप में कार्य करते हुए जनसंघ उत्तरोत्तर अपने संगठन का तथा जनाधार का विस्तार कर रहा था। 1973 से ही तत्कालीन प्रधानमंत्री, श्रीमती इंदिरा गांधी तथा राज्यों में उनके मुख्यमंत्रियों के विरुद्ध जन विरोधी तथा भ्रष्टाचारी शासन चलाने के कारण, आंदोलन प्रारंभ हुए। इन आंदोलनों में मूल रूप से छात्र नेतृत्व कर रहे थे। किंतु पश्चात लोकनायक जयप्रकाश नारायण ने इस आंदोलन को अखिल भारतीय स्वरूप देते हुए इसका नेतृत्व करना स्वीकार किया। एवं राजनीतिक दल के नाते भारतीय जनसंघ भी जयप्रकाश जी के नेतृत्व में आंदोलन में सम्मिलित हुआ। कम्युनिस्ट पार्टी के छात्र संगठन स्टूडेंट फेडरेशन के दोनों घटक इस आंदोलन से दूर रहे। समाजवादी विचारधारा के छात्र, उत्तर प्रदेश तथा बिहार तथा छुटपुट रूप से कुछ अन्य प्रदेशों में सक्रिय थे। किंतु अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद, जो राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का एक अनुषांगिक संगठन है, तथा वर्तमान की तरह ही उसका संगठन देश के प्रत्येक प्रांत में उस समय भी था, तथा छात्र कार्यकर्ताओं की संख्या भी अत्यधिक थी, ने भी इस आंदोलन में नेतृत्व कर्ता की भूमिका निभाते हुए बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया। इसी बीच श्रीमती इंदिरा गांधी के खिलाफ चुनाव में भ्रष्ट आचरण के आरोप सिद्ध होने के कारण, उनका लोक सभा का निर्वाचन निरस्त हो गया। बढ़ते जनाक्रोश से डरकर इंदिरा जी ने देश में 25 जून 1975 को आपातकाल की घोषणा कर दी। तथा श्री जयप्रकाश नारायण, अटल बिहारी वाजपेई, लालकृष्ण आडवाणी, वयोवृद्ध नेता आचार्य कृपलानी, पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर, चरण सिंह, मोरारजी देसाई, श्री बाला साहब देवरस श्री दत्तोपंत ठेंगड़ी श्री नानाजी देशमुख ,श्री मधु लिमए आदि सहित लाखों राजनीतिक कार्यकर्ता जिसमें सर्वाधिक संघ के स्वयंसेवक, जन संघ के कार्यकर्ता तथा विद्यार्थी परिषद के छात्र नेता थे ,तथा वनवासी कल्याण परिषद से लेकर विद्या भारती के विद्यालयों में पढ़ाने वाले शिक्षक तक थे, को कारावास में डाल दिया। अन्य दलों के भी हजारों कार्यकर्ता मीसा के कानून में नीरुद्ध हुए। भूमिगत आंदोलन प्रारंभ हुए, इसी तरह लगभग डेढ़ वर्ष बीत गया, जनवरी 1977 में इंदिरा जी के गुप्तचर विभाग द्वारा किए गए सर्वे में यह बताया गया था, यदि तत्काल लोकसभा चुनाव हुए तो इंदिरा गांधी की कांग्रेस को लगभग साडे चार सौ सीटों पर विजय प्राप्त होगी। श्रीमती गांधी ने लोकसभा चुनाव की घोषणा कर दी। और थोड़ा थोड़ा करके राजनीतिक कार्यकर्ताओं को कारावास मुक्त करना प्रारंभ किया। किंतु संघ के अधिकारियों को और सक्रिय कार्यकर्ताओं को उन्होंने जेल से नहीं छोड़ा। दुर्गा जी के हार के बाद ही 21 महीनों का कारावास भुगतने के पश्चात जेल से छूट पाएं। जब कुछ राजनीतिक दलों के नेता जेल में थे, और कुछ बाहर, तब सभी राजनीतिक दलों ने निर्णय कि आपकी वे एक ही चुनाव चिन्ह पर एक दल बनाकर चुनाव लड़ेंगे। तभी तानाशाही से मुक्ति मिलेगी। लोक दल का चुनाव चिन्ह हलदर किसान लेकर जनता पार्टी का गठन हुआ और कारावास से निकले लोग चुनाव में उतरे। जनसंघ उस समय पिछले चुनाव परिणामों को देखते हुए सभी दलों में सबसे बड़ा दल था। जनसंघ ने भी अपना विलय नई बनने वाली पार्टी जनता पार्टी में कर दिया। चुनाव हुए, आपातकाल हटा, एवं श्री मुरार जी देसाई को प्रधानमंत्री चुना गया। जनता पार्टी का प्रथम विघटन कैसे हुआ यह एक पृथक अध्याय है। कांग्रेस की मदद से उप प्रधानमंत्री चरण सिंह तथा समाजवादी विचार के अधिकांश सांसदों ने मुरारजी देसाई को अपदस्थ कर श्री चरण सिंह को प्रधानमंत्री चुन लिया। कुछ माह पश्चात ही कांग्रेस ने चरण सिंह जी से समर्थन वापस लेकर सरकार को गिरा दिया। फिर से लोकसभा के मध्यावधि चुनाव हुए, लोकसभा चुनाव में मोरारजी के नेतृत्व वाले जनता पार्टी एवं चरण सिंह के नेतृत्व वाले लोकदल को बहुमत प्राप्त नहीं हुआ। एवं श्रीमती गांधी फिर से सत्तारूढ़ हुई। जनता पार्टी के प्रथम विघटन के समय से ही भारतीय जनसंघ के नेता एवं कार्यकर्ताओं पर यह दबाव डाला जाने लगा कि वे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से अपने संबंध तोड़ ले। जनसंघ को उसकी शक्ति के अनुपात से ,ना तो केंद्रीय मंत्रिमंडल में और ना ही राज्यों में उचित प्रतिनिधित्व दिया गया था। जनता पार्टी के संगठन में भी जनसंघ घटक के कार्यकर्ताओं का तिरस्कार होता रहा। यह सब सहते हुए भी जनसंघ के कार्यकर्ताओं ने संयम बनाए रखा। देश में पहली बार एक दलित श्री जगजीवन राम जी को प्रधानमंत्री बनाने के लिए जनसंघ और संघ के कार्यकर्ता संपूर्ण शक्ति से जुटे थे। लोकसभा चुनाव में पराजय के बाद भी जनता पार्टी के मुरारजी वाले संगठन में दोहरी सदस्यता का मुद्दा थोड़ी यंत्र पूर्वक जिंदा रखा गया। 4 अप्रैल 1980 को जनता पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक हुई। उसमें कुल 32 लोग शामिल हुए मोरारजी तटस्थ रहे 17 के विरुद्ध 14 मतों से भारतीय जन संघ के कार्यकर्ताओं को संघ के साथ संबंध रखने के कारण पार्टी से पृथक करने का निर्णय लिया गया। इस निर्णय के करने में मुख्य निभाने वाले श्री जगजीवन राम और दिनेश सिंह उसी श्याम 4 अप्रैल को ही जनता पार्टी छोड़कर पुनः कांग्रेस में शामिल हो गए। इस तरह के निर्णय की संभावना पूर्व से ही दिख गई थी। इसलिए जन संघ के अति प्रमुख लगभग साडे तीन हजार कार्यकर्ताओं का एक सम्मेलन, 5 एवं 6 अप्रैल 1980 को फिरोजशाह कोटला मैदान नई दिल्ली में पूर्व से ही आयोजित किया गया था। कुछ प्रमुख लोग 4 अप्रैल को ही दिल्ली पहुंच गए थे। 4 अप्रैल का निर्णय आने के पश्चात 5 अप्रैल को उपस्थित कार्यकर्ताओं ने अलग पृथक राजनीतिक दल बनाने का निर्णय किया। और जन्म हुआ भारतीय जनता पार्टी का, चुनाव चिन्ह उस समय खिलता हुआ कमल था। और ध्वज का स्वरूप एवं रंग वर्तमान जैसा ही था। बाद में खिलता हुआ कमल अष्ट पंखुड़ी कमल में परिवर्तित हुआ। भारतीय जनता पार्टी के गठन के पश्चात का प्रथम अधिवेशन दिसंबर 1980 में मुंबई में संपन्न हुआ तब विशेष अतिथि के रूप में उपस्थित, पूर्व कांग्रेस के केंद्रीय शिक्षा मंत्री रहे, श्री मोहम्मद करीम छागला मैं श्री अटल बिहारी वाजपेई को भावी प्रधानमंत्री निरूपित किया था। प्रसिद्ध स्तंभ लेखक श्री जनार्दन ठाकुर ने अपने लेख का शीर्षक दिया था “सिंहासन खाली करो, कि जनता आती है” । भारतीय जनता पार्टी के हमारे प्रथम अध्यक्ष थे श्री अटल बिहारी वाजपेई और तीन महामंत्री थे श्री लाल कृष्ण आडवाणी श्री सूरजभान तथा श्री सिकंदर बख्त। इसके पश्चात की यात्रा से हम सभी परिचित हैं आज विश्व के सबसे बड़े राजनीतिक दल के रूप में हम मानवता की सेवा कर रहे हैं। हमारा मूल मंत्र
है –
न त्वहं कामये राज्यं न स्वर्गं नापुनर्भवम् ।
कामये दुःखतप्तानां प्राणिनामार्तिनाशनम् ॥
हे प्रभु! मुझे राज्य की कामना नही, स्वर्ग-सुख की चाह नही तथा मुक्ति की भी इच्छा नही। एकमात्र इच्छा यही है कि दुख से संतप्त प्राणियों का कष्ट समाप्त हो जाये।
कोटि चरण बढ़ रहे, ध्येय की और निरंतर
आज बड़ा ही हर्ष का दिन हमारे भारतीय जनता पार्टी परिवार के लिए है। आज ही के दिन यानी 6 अप्रैल 1980 को भारतीय जनता पार्टी का गठन हुआ था ।
भारतीय जनता पार्टी का इतिहास हमारी पूर्वर्ती भारतीय जनसंघ पर आधारित है।
– जवाहर लाल नेहरू जी की राष्ट्र विरोधी नीतियों के खिलाफ उनके मंत्रिमंडल से त्यागपत्र देकर डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी जी ने नए संगठन बनाने का निर्णय लिया, मुखर्जी जी ने उस समय के राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक श्री गुरु जी से चर्चा कर भारतीय जनसंघ के निर्माण करने का निर्णय लिया। शुरुआत दिनों में गुरुजी ने अपने अनेक स्वयंसेवक जनसंघ को सोंपे जिनमे प्रमुखता से पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी,अटल बिहारी वाजपेयी जी, श्री कुशाभाऊ ठाकरे जी, नाना जी देशमुख, सुंदर सिंह भंडारी जी, बलराज मधोक जी ने संगठन की रचना करी ।
जनसंघ अपने जड़े फैला ही रहा था किंतु मुखर्जी जी की असमय नज़रबंदी की अवस्था ने मृत्यु हो गयी। फिर अनेक अध्यक्षो ने पार्टी को संभाला दीनदयाल जी संगठन महामंत्री के रूप में कार्य कर ही रहे थे। फिर उन्हें अध्यक्ष चुना गया। मात्र 43 दिन की अध्यक्षयी कार्यकाल के बाद उनकी भी मृत्यु की खबर देशवासियों को सुनने को मिली। उपरांत अटल जी एवं आडवाणी जी ने 1975 तक पार्टी को संभाला।
– फिर आपातकाल के दौर आया सभी राष्ट्रवादियों को जेल भेजा गया। जेल में रहकर पूरे विपक्ष ने जनता पार्टी के गठन करने का निर्णय किया। लोकतंत्र बचाने के लिए हमने हमारी पार्टी का विलय जनता पार्टी में करा । 1977 में जनता पार्टी की सरकार बनी जनसंघ के कोटे से श्री अटल बिहारी वाजपेयी जी, श्री लालकृष्ण आडवाणी जी एवं श्री बृजलाल वर्मा जी ने मोरारजी देसाई जी के मंत्रिमंडल में शपथ ली। 2 साल पश्यात जनता पार्टी के अन्य दलों ने एक प्रस्ताव लाकर 17 – 14 के बहुमत से जनसंघ से आये हुए लोगो को पार्टी से अलग करने का दुस्साहस करा ।
– इसके बाद पुरे जनसंघ के धड़े ने भारतीय जनता पार्टी का निर्माण किया, अटल जी संस्थापक अध्यक्ष चुने गए 1980 से 1986 तक उन्होंने अध्यक्ष पद संभाला ।
– 1986 से 1991 तक श्री लालकृष्ण आडवाणी जी ने अध्यक्ष के रूप में कार्य किया एवं देश के अनेक राज्यो में सरकार भी आडवाणी जी के नैतृत्व में बनाई, श्री आडवाणी जी के नैतृत्व में हमने हमने अभूतपूर्व राम रथ यात्रा निकाल राम मंदिर के लिए अलख जगाई।
– 1991 से 1994 तक श्री मुरलीमनोहर जोशी जी ने पार्टी का अध्यक्ष पद संभाला जिसमें उनके नैतृत्व में हमने राष्ट्रीय एकता यात्रा निकाल कश्मीर के लाल चौक पर तिरंगा फहराया ।
– 1994 में पुनः आडवाणी जी अध्यक्ष चुने गए उनके कार्यालय में भा.ज.पा देश का सबसे बड़ा दल बनकर उभरी एवं 1996 में अटल जी 13 दिन के लिए प्रधानमंत्री बने।
– 1998 में देश मे मध्यावधि हुए भा.ज.पा सबसे बड़ा दल बन सरकार में आई श्री कुशाभाऊ ठाकरे जी ने अध्यक्ष का दायित्व संभाला श्री अटल जी प्रधानमंत्री बने, यह सरकार मात्र 13 महीने चली सिर्फ 13 महीने के कार्यकाल में हमने कारगिल युद्ध मे जीत प्राप्त करी एवं पोखरण में परमाणु परिक्षण कर पूरे विश्व को हिला दिया।
– 1999 में आम चुनाव हुए भारतीय जनता पार्टी को अभूतपूर्व जनसमर्थन प्राप्त हुआ एवं तीसरी बार अटल जी ने प्रधानमंत्री के दायित्वो के शपथ ली यह सरकार हमने पूरे 5 वर्ष चलाई, इस 5 वर्ष की सरकार में हमने सर्व शिक्षा अभियान की शुरुआत की, प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना की नींव रखी,स्वर्णिम चतुर्भुज मार्ग बनाने की संकल्पना करी, अंत्योदय योजना प्रारंभ हुई, टेलीकॉम पॉलिसी लायी गयी जिसके कारण मोबाइल की सुविधा देश को मिली ऐसे अनेक अभूतपूर्व लोकहितकारी कार्य करे एवं 2004 तक देश को संभाला एवं पार्टी में 2004 तक श्री जाना कृष्णमूर्ति जी, बंगारू लक्षमण एवं वेंकैया नायडू जी ने अध्यक्षता करी।
– 2004 के चुनाव में हम विजय प्राप्त नही कर पाए एवं कांग्रेस ने अपनी सरकार बनाकर आने वाले 10 वर्षों तक अनेक भ्रष्टाचार कर देश को अनेक दशको पीछे कर दिया।
– 2004 से 2006 तक लालकृष्ण आडवाणी जी अध्यक्ष रहे ।
– 2006 -2010 तक राजनाथ सिंह जी ने अध्यक्ष के रूप में संगठन को मजबूत करा ।
– 2010 से 2013 तक श्री नितिन गडकरी जी ने अध्यक्ष के रूप पार्टी को शक्तिशाली बनाने के लिए कार्य करे।
– 2013 में पुनः भाजपा अध्यक्ष का ताज श्री राजनाथ जी के सिर पर रखा गया। राजनाथ जी के अध्यक्षयी कार्यकाल में 2014 के आम चुनाव हुए एवं जनता ने 30 सालो बाद पूर्ण बहुमत की सरकार बनाई एवं श्री नरेन्द्र मोदी जी ने प्रधानसेवक पद को शपथ ली।
– 2014 में श्री नरेंद्र मोदी जी ने दायित्व संभालते ही अनेक ऐतिहासिक लोकहितकारी कार्य करे एवं अनेक योजनाओ का शुभारंभ करा जिसमे उज्ज्वला योजना, सौभाग्य योजना ,आयुष्मान योजना , सर्जिकल स्ट्राइक, एयर स्ट्राइक, स्पेस स्ट्राइक, मुद्रा योजना ऐसे अनेक अभूतपूर्व कार्य करने के लिए हमारी सरकार प्रतिबद्ध है।
2014 से पार्टी की कमान श्री अमित शाह जी के हांथो में है, श्री अमित जी के नेतृत्व में हमने संगठन का विस्तार किया है एवं अनेक राज्यो में विजयश्री प्राप्त करी है।
एवं ऐसी आशा और विश्वास है कि आने वालों लोकसभा चुनाव में आप सभी का आशीर्वाद भाजपा को ही मिलेगा ।
यह थी हमारे भाजपा परिवार की आज तक कि यात्रा।
धन्यवाद ?
भारतीय जनता पार्टी के स्थापना दिवस पर में श्रद्धांजलि अर्पित करता हूँ उन नेताओं को जिन्होंने पार्टी के संकल्प को कार्य मे परिवर्तित करने के लिए अपने प्राणों की आहुति दी है एवं शुभकामनाएं देता हूं उन कार्यकर्ताओ को जो भारतीय जनता पार्टी को शिखर पर ले जाने के लिए प्रयत्नरत है ।
स्वर्गीय श्री कृष्ण गोपाल जी माहेश्वरी
जन्म दिनांक:-23/04/1933
स्वर्गवास दिनांक:- 05/04/1999??देश की राजनीति में वैचारिक एवं सैद्धान्तिक दृष्टि से लौकतान्त्रिक परम्पराओं युक्त राजनीति की नींव रखने वाले राजनीतिक संगठन #भारतीय_जनसंघ_स्थापना_दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ।??भारतीय जनसंघ के स्थापना दिवस पर महू भारतीय जनसंघ के वरिष्ठ संस्थापक सदस्यों को शत् शत् नमन ??????इसमें चौथे नंबर पर जस्टिस उमेश चन्द्र माहेश्वरी के स्व० दादाजी श्री रामनारायण जी माहेश्वरी भी है ।??
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