दसवीं शताब्दी के उदयेश्वर मंदिर के संरक्षण और संरक्षण की आज आवश्यकता है
दसवीं शताब्दी के उदयेश्वर मंदिर के संरक्षण और संरक्षण की आज आवश्यकता है: इंडियन कंक्रीट इंस्टीट्यूट, इंडियन इंस्टीट्यूट आफ आर्किटेक्ट एवं काउंसिल ऑफ कंसलटिंग सिविल इंजीनियर एवं अल्ट्राटेक सीमेंट के द्वारा आयोजित 25 वीं तकनीकी उद्बोधन श्रंखला में मेरे द्वारा विदिशा जिले के गंज बासौदा तहसील के उदयपुर ग्राम स्थित उदयेश्वर मंदिर के बारे में जानकारी दी ।
यह मंदिर महाराजा उदयेश्वर द्वारा लगभग दसवीं शताब्दी में निर्मित कराया गया था जो कि राजा भोज के भाई थे।
यह मंदिर 8 सहायक मंदिरों से घिरा हुआ था जिनमें से अधिकांश मंदिर अब खंडहर हो चुके हैं और एक मुख्य मंदिर चबूतरे की पर निर्मित है।
मंदिर का मुख्य द्वार पूर्व की ओर है और इसमें गर्भ ग्रह और मंडप का निर्माण किया गया है।
जबकि गर्भगृह में शिखर 7 मंजिला है ।
जिसमें पत्थरों पर आकर्षित नक्काशी की गई ।मंदिर के स्तंभ पर आकर्षित करने वाली मूर्तियां उकेरी गई है,।
वर्तमान समय में इस मंदिर में नियमित रूप से पूजन होता है यद्यपि इस मंदिर की पहुंच मार्ग आसानी से उपलब्ध किंतु इसको अभी और संरक्षण की आवश्यकता है ।
इस मंदिर में शिवलिंग 5 फीट ऊंचाई का है जिसकी सुरक्षा के लिए सिंधिया राजवंश द्वारा पीतल का कवर किया गया है।ऐसी किवदंती है कि यह मंदिर एक रात का मंदिर माना जाता है क्योंकि इससे पुष्य नक्षत्र में ही बनाया गया शेष दिनों में मंदिर के पत्थरों के साथ-साथ सामान्य का काम होता रहा होगा और सिर्फ पुष्य नक्षत्र के दिन ही इस मंदिर का निर्माण कार्य किए जाता रहा है।
इस मंदिर का संरक्षण राष्ट्रीय पुरातत्व विभाग द्वारा किया जा रहा है किंतु इसके पश्चात भी इसके आसपास के क्षेत्र में मंदिर के भवन मूर्तियां इधर-उधर बिखरी हुई पड़ी है आवश्यक है कि इन मूर्तियों को सुरक्षित किया जाए तथा संग्रहालय में स्थापित किया जाए
इसी के साथ ही आसपास का क्षेत्र अतिक्रमण से घिरा हुआ है उसको भी विकसित करने की आवश्यकता है साथ ही यात्रियों के लिए आवश्यक सुविधा उपलब्ध कराना भी आवश्यक है।
