गन्ने के रस के मुरीदों ने शीतल पेय निर्माताओं की निकली हेकड़ी ( जगदीश रघुवंशी/ श्याम चौरसिया )

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दिनोदिन चढ़ते तापमान से शरीर,मन को चेतन्य,स्थिर रखने में बहुराष्ट्रीय कंपनियों के ब्रांडेड शीतल पेय के मुकाबले गन्ने का रस ज्यादा तृप्त,सक्रिय करता/रखता है। इसके प्रकृतिक गुण स्वास्थ वर्धक पाए जाने से अब लोग गन्ने के रस की सजी दुकानों का रुख करने लगे।
करे क्यो न । आंखों के सामने एक दम ताजा रस निकाल बड़े मनुहार से सुलभ कराते है।इन अस्थाई दुकानों को सजाने में हजारो रुपये स्वाह हो जाते है। खर्चो से बचने के लिए आजकल राजस्थानी चलित जुगाड़ ओर हाथ ठेलों को ही दुकान में बदलने का चलन आम हो चला है।
जुगाड़ फर्राटे भर एक पल में एक कोने से दूसरे कोने,चौराहा, मोहल्ले में पहुच मुराद पूरी कर देती है।
जिन खेतों में गन्ना खड़ा है। उन किसानों की मौज है। इन दिनों 09 सो लेकर 11 सो प्रति क्विंटल के भाव मे मिलता है।
गन्ने की अपनी एक अलग तासीर है। जो अन्य शीतल पेय में संभव नही है।शीतल पेय के रसायन शरीर के लिए हितकर कम है। नुकसान ज्यादा है।अधिक उपयोग से लीवर प्रभावित हो सकता है। जबकि गन्ने के औषधीय गुण लीवर को तंदरुस्त करते है।पीलिया के इलाज के लिए ये रामबाण है।

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