“राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ” यह तीन शब्दों का एक समुच्चय है।
?!! संघ परिचय !!?
“राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ” यह तीन शब्दों का एक समुच्चय है।
(अ) राष्ट्रीय (ब) स्वयंसेवक (स) संघ
(अ) राष्ट्रीय :- जिसकी अपने देश, उसकी संस्कृति, उसकी परम्पराओं, उसके महापुरुषों, उसकी सुरक्षा एवं समृद्धि के प्रति निष्ठा हो, जो देश के साथ पूर्ण रूप से भावनात्मक मूल्यों से जुड़ा हो अर्थात जिसको सुख-दुःख, हार-जीत व शत्रु-मित्र की समान अनुभूति हो वह राष्ट्रीय कहलाता है।
अपने देश में राष्ट्रीयता हेतु सभी आवश्यक तत्वों की पूर्ति हिन्दु समाज के जीवन में हो जाती है। अतः हिन्दु समाज का जीवन ही राष्ट्रीय जीवन है अर्थात “हिंदुत्व? ही राष्ट्रीयत्व है” व्यवहारिक रूप से राष्ट्रीय, भारतीय व हिन्दु पर्यायवाची शब्द हैं। इसलिये संघ ने “राष्ट्रीय” शब्द को संघठन के नाम में प्रथम स्थान प्रदान किया ।
(ब) स्वयंसेवक :- जो स्वयं की प्रेरणा से बिना किसी प्रतिफल व पुरस्कार की इच्छा के, अनुशासन पूर्वक, निर्धारित पद्धति से नित्य, राष्ट्र, समाज, देश, धर्म, संस्कृति की सेवा करने, रक्षा करने और उसकी अभिबृद्धि के लिए प्रमाणिकता व निःस्वार्थ बुद्धि से कार्य करने को उत्सुक हो ऐसे व्यक्ति को स्वयंसेवक कहते हैं। क्योंकि संघ का कार्य राष्ट्रीय समाज में इन गुणों को जागृत व स्थापित करना है इसलिए संघठन का द्वितीय नाम “स्वयंसेवक” रखा गया।
(स) संघ :- संघ का शाब्दिक अर्थ संघठन, समूह तथा समुदाय, समान विचार, समान लक्ष्य को समर्पित एवं परस्पर आत्मीय भाव से युक्त जिनकी पद्धतियां, रीती परस्पर एक दूसरे से पूर्ण रूप से मिलती हैं व जो पूर्ण समर्पण भाव से कार्य करते हैं ऐसे व्यक्तियों के समूह को संघ कहते हैं।
