मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना को तीन साल पूरे
मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना को तीन साल पूरे हो गए हैं। मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव नरसिंहपुर जिले के गोटेगांव से मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना की 36वीं किस्त जारी करने वाले हैं।
प्रदेश की लाड़ली बहनों के खाते में योजना की 1500 रुपए की किस्त 13 मई को आएगी। इस दिन प्रदेश की 1 करोड़ 25 लाख 22 हजार 542 लाड़ली बहनों के बैंक खातों में 1835 करोड़ 67 लाख 29 हजार 250 रुपए सिंगल क्लिक से ट्रांसफर किए जाएंगे।
पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान सरकार के कार्यकाल में मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना की शुरुआत हुई थी और लाड़ली बहनों के खाते में पहली किस्त 10 जून 2023 को ट्रांसफर की गई थी।
इसके बाद से योजना में लगातार राशि ट्रांसफर हो रही है और अब 13 मई को 36 वीं किस्त ट्रांसफर की जाने वाली है। इस महत्वाकांक्षी योजना में अप्रैल 2026 तक 35 मासिक किस्तें भेजी गई हैं। वैसे तो यह योजना मार्च 2023 में बनने के बाद लागू हो गई थी, लेकिन योजना में पात्र महिलाओं के खाते में पैसे जमा करने का काम जून 2023 से शुरू हुआ था।
अप्रैल तक 55,926 करोड़ रुपए बांट चुकी सरकार
जून 2023 से अप्रैल 2026 तक योजना की पात्र महिलाओं के खातों में कुल 55,926.51 करोड़ रुपए की राशि सीधे डीबीटी के माध्यम से जमा की जा चुकी है। योजना की शुरुआत में हर पात्र महिला को 1000 रुपये प्रतिमाह दिए जाते थे।
अक्टूबर 2023 में इसे बढ़ाकर 1250 रुपए प्रतिमाह किया गया। इसके बाद नवंबर 2025 से राशि में पुनः वृद्धि कर इसे 1500 रुपए प्रतिमाह कर दिया गया। सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजनाओं के अंतर्गत कम राशि प्राप्त करने वाली महिलाओं को भी इस योजना के माध्यम से अतिरिक्त सहायता देकर कुल देय राशि प्रदान की जा रही है।
वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए लाडली बहना योजना में 23,882.81 करोड़ रुपए का बजट प्रावधान किया गया है।
ऐसे बंटी साल दर साल योजना में राशि
- लाड़ली बहना योजना पर राज्य सरकार द्वारा वित्तीय वर्ष 2023-24 में 14,726.05 करोड़ रुपए दिए गए।
- वर्ष 2024-25 में 19,051.39 करोड़ रुपए दिए गए।
- वर्ष 2025-26 में 20,318.53 करोड़ रुपए की राशि दी गई है।
- वर्ष 2026-27 में अप्रैल 2026 तक 1830.54 करोड़ रुपए भेजे गए हैं।
सरकार का दावा, महिलाओं की आमदनी बढ़ा रही योजना
राज्य सरकार का दावा है कि इस योजना से लाड़ली बहना बनी महिलाओं की आमदनी बढ़ी है। योजना से मिलने वाली रकम ने अनेक महिलाओं को स्व-सहायता समूहों, लघु उद्योगों और स्व-रोजगार गतिविधियों से जुड़ने के लिये प्रेरित किया है।
योजना का लाभ ग्रामीण, आदिवासी, शहरी, कल्याणी, तलाकशुदा और परित्यक्त महिलाओं सहित व्यापक वर्ग को मिल रहा है। पात्र महिलाओं के सक्रिय और आधार-लिंक्ड बैंक खातों में राशि सीधे जमा होने से प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी और त्वरित बनी है।
