भारत की नई स्टार्टअप: मौत भी अब आउटसोर्स!

भारत की नई स्टार्टअप: मौत भी अब आउटसोर्स!
कल्पना कीजिए – किसी प्रदर्शनी हॉल में एक चमकदार स्टाल लगा है।
बड़े-बड़े अक्षरों में लिखा है:
SUKHANT FUNERAL MANAGEMENT PVT LTD
(सुखांत फ्यूनरल मैनेजमेंट प्राइवेट लिमिटेड)
स्टाल के ठीक सामने एक सजी हुई अर्थी रखी है – लकड़ी, सफेद कपड़ा, गुलाब की पंखुड़ियां बिछी हुईं।
लोग रुक-रुक कर फोटो खींच रहे हैं, ब्रोशर ले रहे हैं, और सेल्समैन बड़े आराम से समझा रहे हैं:
“सर, सिर्फ 37,500 रुपये में लाइफटाइम मेंबरशिप।
मौत के बाद कुछ नहीं सोचना पड़ेगा।
हम देंगे –
– अर्थी
– पंडित जी
– नाई
– चार कंधे देने वाले प्रोफेशनल
– राम नाम सत्य है बोलने वाली पूरी टीम
– अंत में अस्थि-विसर्जन भी हम ही करवा देंगे, हरिद्वार या जहाँ कहें।”
यानी अब अंतिम संस्कार भी “प्लग एंड प्ले” पैकेज बन गया है।
कंपनी ने अब तक 5,000 से ज्यादा अंतिम संस्कार करवा दिए हैं और सिर्फ कुछ सालों में 50 लाख से ज्यादा का प्रॉफिट कमा लिया है।
एक्सपर्ट्स कह रहे हैं कि आने वाले कुछ सालों में यह इंडस्ट्री 2,000 करोड़ रुपये की हो सकती है।
हमने मय्यत का सामान बेचने वाली दुकानें तो बहुत देखीं – कपड़े, फूल, कलश, अगरबत्ती।
पर पहली बार किसी प्रदर्शनी में “मौत का स्टाल” देखकर रोंगटे खड़े हो गए।
यह सिर्फ एक बिज़नेस नहीं है।
यह उस समाज का आईना है जहाँ:
– बेटे के पास वक्त नहीं,
– भाई दूर शहर में जॉब कर रहा है,
– पड़ोसी भी “सॉरी, मीटिंग है” बोलकर निकल लेते हैं,
– और रिश्ते सिर्फ व्हाट्सएप फॉरवर्ड तक सिमट गए हैं।
अब दुख की इस आखिरी घड़ी में भी इंसान अकेला रह जाता है,
तो उसकी जगह “प्रोफेशनल मॉर्नर्स” और “पेड शोल्डर कैरियर्स” ले लेते हैं।
संदेश बहुत साफ है –
हम तेज़ी से पैसे कमा रहे हैं,
पर रिश्तों का दिवाला निकाल चुके हैं।
जिस समाज में मरने के बाद भी अपने नहीं मिलते,
उस समाज को जीते जी बहुत कुछ मर चुका है।
कहीं ऐसा न हो कि एक दिन हम इतने “आधुनिक” हो जाएं
कि अपने बूढ़े माँ-बाप को भी कोई स्टार्टअप “रिटायरमेंट होम पैकेज” में ले जाए
और अंतिम संस्कार के लिए भी हमें कोई ऐप से बुक करना पड़े –
“4.8 ★ रेटेड पंडित जी, 30 मिनट में पहुँचेंगे।”
वक्त है सोचने का।
पैसा कमाइए, तरक्की कीजिए,
पर उन दो-चार रिश्तों को मत मारिए
जो रोते वक्त आपके कंधे पर सर रख सकें
और आपके कंधे पर आपका जनाज़ा उठा सकें।
वरना एक दिन सच में
“राम नाम सत्य है” भी कोई किराए का आदमी चिल्लाएगा
और हम चुपचाप सुनते रह जाएंगे।
