भोपाल की हिन्दू उत्सव समिति: सामाजिक दायित्‍वों से दूर हिन्‍दुओं की ये समिति !

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भोपाल की हिन्दू उत्सव समिति: सामाजिक दायित्‍वों से दूर हिन्‍दुओं की ये समिति !

 

– डॉ. मयंक चतुर्वेदी

 

भोपाल, मध्यप्रदेश की राजधानी, सांस्कृतिक और धार्मिक दृष्टि से अत्यंत समृद्ध शहर है। यहाँ हर साल अनेक हिन्दू उत्सव मनाए जाते हैं, जिनमें गणेश उत्सव और दुर्गा स्थापना प्रमुख हैं। ये उत्सव न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक हैं बल्कि सामाजिक एकता, सांस्कृतिक जागरूकता और सामूहिक चेतना के विकास का माध्यम भी हैं।

 

इस संदर्भ में हिन्दू उत्सव समितियों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होती है। सामान्यतः इन्हें हिन्दू समाज के हित में काम करने और समाज को जागृत करने के लिए स्थापित किया गया है। लेकिन वर्तमान परिदृश्य में यह देखा जा रहा है कि कई बार यह उद्देश्य गौण हो जाता है और समिति अपने राजनीतिक या व्यक्तिगत हितों को प्राथमिकता देने लगती है।

 

1. उत्सव और उनकी सामाजिक महत्ता

 

यह हर हिन्‍दू को समझना होगा कि गणेश उत्सव और दुर्गा उत्सव सिर्फ धार्मिक अनुष्ठान नहीं हैं, ये समाज में एकता, संस्कृति और परंपरा को जीवित रखने के साधन भी हैं। गणेश उत्सव में भक्ति और सामूहिकता का संदेश है। यह परिवार और समुदाय के बीच प्रेम और सहयोग को बढ़ाता है, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी और सेवा भाव की भावना भी विकसित करता है।

 

दुर्गा उत्सव का उद्देश्य केवल देवी की पूजा नहीं है। यह शक्ति, धर्म, संस्कृति और कन्‍या, स्त्री शक्ति के महत्व का प्रतीक है। इन उत्सवों के माध्यम से समाज को यह समझाने का अवसर मिलता है कि धर्म केवल आस्था का विषय नहीं है, बल्कि यह जीवन के प्रत्येक पहलू को प्रभावित करने वाला मार्गदर्शक भी है।

 

ऐसे में किसी भी हिन्‍दू समिति की भूमिका केवल उत्सव का आयोजन करना नहीं है, बल्कि समाज को यह समझाना भी है कि इन उत्सवों का वैज्ञानिक, सामाजिक और आध्यात्मिक महत्व क्या है। उदाहरण के लिए, गणेशोत्सव में मिट्टी के गणेश प्रतिमाओं का उपयोग पर्यावरण और स्थिरता की शिक्षा देता है। इसी प्रकार, दुर्गा स्थापना में शक्ति और सामूहिकता के महत्व का संदेश दिया जा सकता है।

 

2. विसर्जन और पर्यावरणीय जिम्मेदारी

 

भोपाल में गणेश और दुर्गा प्रतिमाओं का विसर्जन अक्सर असंगठित और अव्यवस्थित रूप से होता है। प्रतिमाओं के विसर्जन के समय पानी प्रदूषण, गंदगी और अव्यवस्था स्पष्ट रूप से दिखाई देती है।

 

यहां प्रश्न उठता है कि क्या यह हिन्दू उत्सव समिति की जिम्मेदारी नहीं है कि वह समाज को इस दिशा में जागृत करे और ठोस कदम उठाए? समिति को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि विसर्जन में पर्यावरण की सुरक्षा संभव हो, मिट्टी और प्राकृतिक रंगों का उपयोग बढ़ाया जाए, प्लास्टिक और रासायनिक रंगों का निषेध किया जाए।

 

व्यवस्थित विसर्जन स्थल की चिंता हो। प्रत्येक क्षेत्र में सुनिश्चित किया जाए कि विसर्जन स्थल साफ-सुथरा और सुरक्षित होगा। सामूहिक जागरूकता अभियान की भी आवश्‍यकता है। स्थानीय लोगों को, विशेषकर बच्चों और युवाओं को, यह समझाने का प्रयास कि यह केवल पूजा का हिस्सा नहीं है, बल्कि पर्यावरण और समाज के प्रति जिम्मेदारी भी है।

 

कहना होगा कि यदि समिति केवल उत्सव का दिखावा करती है और विसर्जन की अव्यवस्था पर ध्यान नहीं देती, तो यह स्पष्ट है कि वह समाज को जागृत करने में असफल हो रही है।

 

3. आयोजन की सही संरचना और सत्संग की आवश्यकता

 

भोपाल में गणेश और दुर्गा उत्सव बड़े पैमाने पर मनाए जाते हैं। लेकिन अक्सर ये आयोजन केवल भौतिक रूप में ही संपन्न होते हैं। पुजारियों की व्यवस्था, सत्संग, प्रवचन और सांस्कृतिक कार्यक्रमों की गुणवत्ता पर बहुत कम ध्यान दिया जाता है। ये भी कहें कि ध्‍यान नहीं दिया जाता तो कुछ अनुचित नहीं होगा।

 

समिति चाहे तो पूरे शहर को 20 या 40 क्षेत्रों में बांटकर प्रत्येक उत्सव स्थल पर पुजारियों की सही व्यवस्था सभी स्‍थानों पर सभी के लिए सुनिश्‍चित कर सकती है।

 

सत्संग और मुख्य प्रवचन आयोजित कर यह बताया जाए कि यह उत्सव क्यों मनाया जा रहा है, इसका आध्यात्मिक और सामाजिक महत्व क्या है।

 

लोगों को समझाया जाए कि हिन्दू होने का मतलब केवल पूजा करना नहीं है, बल्कि विज्ञान, दर्शन और संस्कृति के अनुसार जीवन जीना है। हिन्‍दू होने के भाव एवं सनातन धर्म के गूढ़ रहस्‍यों को सरल भाषा में सभी को समझाना चाहिए, ताकि हम अपने परिवार एवं समाज को संगठित सहजता के साथ रख पाएंगे।

 

यहां केवल जुलूस निकालना, भजन-कीर्तन करना या सांस्कृतिक कार्यक्रम करना पर्याप्त नहीं है। समाज को जागरूक करने वाला, शिक्षाप्रद और सांस्कृतिक दृष्टि से संवेदनशील आयोजन होना चाहिए।

 

4. हिन्दू उत्सव समिति और राजनीति का खतरा

 

आज कई हिन्दू उत्सव समितियों में राजनीतिक हस्तक्षेप देखा जा रहा है। इस स्थिति में समिति का मूल उद्देश्य समाज को जागृत करना और सांस्कृतिक मूल्यों को बढ़ावा देना गौण हो जाता है। यदि समिति केवल अपने पदाधिकारियों को चुनाव जीतने, समाज में अपनी राजनीतिक छवि बनाने और जुलूस आयोजित करने में व्यस्त हो जाती है, तो यह स्पष्ट रूप से हिन्दू समाज के हित में नहीं है। यह तो अपने समाज के साथ धोखा करने जैसा व्‍यवहार है।

 

5. जागरूकता और शिक्षा का महत्व

 

धार्मिक और वैज्ञानिक दृष्टिकोण: उत्सवों का धार्मिक महत्व समझाने के साथ-साथ उनके पीछे के वैज्ञानिक और सामाजिक तर्क भी प्रस्तुत करने चाहिए।

 

सांस्कृतिक शिक्षा: बच्चों और युवाओं को यह सिखाना कि हमारी परंपराएँ केवल पूजा का माध्यम नहीं हैं, बल्कि ये सामाजिक और नैतिक मूल्यों को संरक्षित करने का माध्‍यम है, यह आज बताया जाना चाहिए।

 

सामूहिक जिम्मेदारी: प्रत्येक उत्सव स्थल पर स्थानीय लोगों को जिम्मेदारी सौंपकर उन्हें आयोजन और सफाई में सक्रिय बनाने का प्रयास होना चाहिए ताकि हम अपने स्‍थलों को पवित्र एवं साफ सुथरा रख सकेंगे।

 

पर्यावरणीय चेतना: मिट्टी के गणेश, प्राकृतिक रंग और स्थायी सामग्री का उपयोग बढ़ावा देना।

 

इस प्रकार, समिति केवल आयोजन करने वाली संस्था नहीं रहकर समाज में जागरूकता फैलाने वाली संस्था बन सकती है।

 

6. भोपाल की हिन्दू उत्सव समिति के सामने दो विकल्प हैं:

 

पहला ये कि सच्ची जिम्मेदारी निभाना: समाज को जागरूक करना, उत्सवों का सही आयोजन करना, सत्संग और प्रवचन के माध्यम से शिक्षा देना, पर्यावरण और सामाजिक जिम्मेदारी पर ध्यान देना।

 

दूसरा; दिखावा और राजनीति: केवल जुलूस निकालना, पदाधिकारियों को चुनाव जिताना और समारोह का केवल भौतिक प्रदर्शन करना।

 

कहना होगा कि यदि समिति वास्तविक जिम्मेदारी निभाती है, तो वह समाज के लिए प्रेरणा बन सकती है। यदि वह केवल दिखावा करती है, तो वह न केवल हिन्दू समाज के प्रति बल्कि अपने आप के प्रति भी धोखा कर रही है।

 

भोपाल में गणेश और दुर्गा उत्सव का सही आयोजन, सत्संग और जागरूकता अभियान केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं बल्कि समाजिक विकास का माध्यम है। हिन्दू उत्सव समिति का मुख्य लक्ष्य होना चाहिए कि समाज को यह समझाया जाए कि धर्म, संस्कृति और विज्ञान आपस में जुड़े हुए हैं, और प्रत्येक उत्सव का वास्तविक उद्देश्य केवल भक्ति नहीं बल्कि समाज को जागरूक करना और सांस्कृतिक चेतना बढ़ाना भी है। इस प्रकार, समिति की वास्तविक सफलता का मापदंड केवल जुलूस और समारोह की भव्यता नहीं, बल्कि समाज में जागरूकता, शिक्षा और नैतिकता फैलाना होना चाहिए। जिससे फिलहाल तो भोपाल की हिन्‍दू उत्‍सव समिति कोसों दूर नजर आती है !

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