भारत का सबसे बड़ा सेप्टिक टैंक -परसराम झील (श्याम चौरसिया )

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नरसिंहगढ़- राजधानी भोपाल की कोख में बसी धार्मिक, इतिहासिक नगरी मालवा ए कश्मीर नरसिंहगढ़ की खूबसूरती की वीनस परसराम झील को पूर्व विधायक राजवर्धन सिंह,सीनियर समाजसेवी, चिंतक,प्रकर्ति प्रेमी श्याम उपध्याय, बीके गुप्ता, जीएस परमार आदि भारत का सबसे बड़ा सेप्टिक टैंक मानते है। इसकी ठोस वजह भी है।

पिछले 40 सालों में आबादी के विस्फोट, अवैध निर्माण, झील को दूषित करने के जिम्मेदार 06 नाले। ये नाले 40 हजार आबादी की गंदगी सीधे झील में उंडेल देते है। सेकड़ो भवन सेप्टिक टैंक बनाने की बजाय सीधे झील के हवाले कर देते है। नतीजन जल में पारा सहित अन्य घातक रसायनों ने ऑक्सीजन का बंटाधार कर दिया। जल जीव पनप ही नही पाते। किसी जमाने मे आबाद रहने वाले घाट अब उठती बदबू की वजह से किसी को चहल कदमी नही करने देते।
बारिस में जरूर झील जिंदा हो उठती है।
झील का कायाकल्प करने के लिए पूर्व विधायक राजवर्धन सिंह ने कार्ययोजना को अंतिम रूप दिया था।उम्मीद बंधी थी। मगर विभागीय दाव पेंच ने बलि ले ली।पेश कार्ययोजना को बिंदुवार अमली जामा पहनाया था।श्याम उपाध्याय, बीके गुप्ता आदि ने। एसडीएम भी चेतन्य ओर सक्रिय रहे। मौजूद विधायक मोहन शर्मा भी मालवा ए कश्मीर के इस कोहिनूर को तराशने में लगे है। मगर नोकरशाही की किंतु, परन्तु सबसे बड़ा रोड़ा लगता है।

झील को शुद्ध,निर्मल करना कठिन नही है। जरूरत है। झील में गंदगी उंडेलने वाले 06 नालों का रुख झील के नाके की तरफ करने ओर मल्ल फेकने वाले घरो की मुश्के कसने की। पूर्व विधायक श्री सिंह का दावा है कि यदि नगर के व्यापक हित ओर भविष्य को देखते हुए निर्णय ले तो कोई बहुत बड़े खर्च की जरूरत नही लगती। बाल अब शासन/प्रशासन के पाले मे है। प्रशासन तकनीकी ज्ञाताओं को सक्रिय कर दे तो मंसूबे बरदान में बदल सकते है।
यदि झील जिंदा कर दी तो ये सैलानियों के लिए चुम्बक साबित होकर नरसिंहगढ़ के बाजार को पंख लगा सकती है।

श्याम चोरसिया

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