पेड़ों द्वारा उपलब्ध कराई गई झूलों के लिए अपनी मजबूत शाखाओं की बाहुएं

0
Spread the love

*पेड़ों द्वारा उपलब्ध कराई गई झूलों के लिए अपनी मजबूत शाखाओं की बाहुएं*

 

*लक्ष्मण झूला अपने कंधे पर बिठाकर कराता है अजनाल नदी पार*

 

*झूले झूलकर दी जाती है सपनों को नई ऊंचाइयां*

भोपाल। रविवार, 10 अगस्त 2025 । गम यहाँ गुदगुदाते हैं, गाते हैं। संकट यहाँ संकटमोचन बन जाते हैं। सांसारिक समस्याएं यहाँ सिर झुकाए सृजन करने लगती हैं । संताप यहाँ संतोष का अनुभव करने लगते हैं। मुश्किलें यहाँ मुस्कराने लगती हैं। विघ्न यहाँ विघ्न हर्ता विनायक बन जाते हैं। दुख यहाँ दुख हर्ता बन जाते हैं। निराशा यहाँ आशा बन जाती है। और प्रकृति की गोद में तन -मन दोनों सुकून पाने लगते हैं। बहन-बेटियां पेड़ों पर बंधें झूलों पर पेंगें भरती हैं। जी हाँ, यह सब सपना नहीं, सुखवाड़ा आश्रम का अनुष्ठान है।

 

इस पल के साक्षी बनने आते हैं कई परिवार और गाँव के बूढ़े से लेकर बच्चे भी।

 

*सुखवाड़ा आश्रम, भोपाल* 9425392656

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *


Notice: ob_end_flush(): failed to send buffer of zlib output compression (0) in /home2/lokvarta/public_html/wp-includes/functions.php on line 5481