यशस्वी पिता की याद!!!!

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पापा आज 90 साल के हो गए होते।
उनसे किसी भी विषय पर घंटों चर्चा और बहस हो सकती थी। इसके दो कारण थे – एक तो वे ज्ञान के भंडार थे, दूसरा, वे alternate viewpoints देने को प्रोत्साहित करते थे।
उस ज़माने में, जब इंटरनेट और गूगल नहीं था, वे असीमित ज्ञान के भंडार थे। मुझे काफ़ी हैरानी होती थी कि कितने विविध विषयों पर वे सहज रूप से चर्चा कर सकते थे। पढ़ना, बार-बार पढ़ना, विचार करना, और नए विचार गढ़ना – ये उनका प्रिय शौक था।
सिर्फ़ परीक्षा के समय उनका यह ज्ञान थोड़ी परेशानी में डाल देता था। चलते-फिरते पूछ लेते कि कौन-सा पेपर है, और फिर तुरंत एक सवाल दाग देते, कोई सा भी subject हो 😊। फिर एहसास होता कि अरे, ये तो पढ़ा ही नहीं।
मुझे याद है, मैं III year में Zoogeography (Zoology का एक पेपर) की परीक्षा देने जा रही थी। पापा ने यूँ ही casually पूछ लिया – किसका पेपर है? मैंने आत्मविश्वास से कहा – zoogeography। मुझे लगा, इसमें ऐसा क्या पूछेंगे! मैं बिलकुल ग़लत थी। अगला सवाल, तुरंत – “aardvark कहाँ रहता है?” मैं हैरान- “ये कैसे पता है और क्यों” ? मुस्कुराते हुए पापा बोले – “English डिक्शनरी के पहले पेज पर यह शब्द होता है…” अब बताइये! डिक्शनरी से भी जानकारी इकट्ठा की हुई थीi मेरा मसला ये भी था कि मैंने परीक्षा के ठीक पहले एक friend से notes लिए थे और उसमें handwriting की वजह से ‘aardvark’ का नाम समझ नहीं आया था। और संयोग देखिए, पापा ने वही पूछ लिया! मैंने मन ही मन उन्हें धन्यवाद भी दिया कि चलो exam के पहले नाम तो पता चल गया 😊
दूसरी खास बात थी उनकी यह अनोखी क्षमता कि वे किसी की राय से पूरी तरह असहमत होते हुए भी कभी व्यक्तिगत नहीं होते थे ( ability to disagree without disagreeing with the person) । घर में वे हमें अलग विचार रखने के लिए प्रेरित करते थे और सार्थक बहस का आनंद लेते थे। ऑफ़िस से जब वे घर लौटते थे तो जो उस दिन के अख़बार में एडिटोरियल पेज पर छपा होता था, उस पर मैं उनसे काफ़ी बहस करती थी। बिना वजह तर्क करना, या बहस के दौरान personal हो जाना उन्हें irritate करता था I हम उस समय इसे ज़्यादा समझते नहीं थे, लेकिन ऐसे समाज में जहाँ बच्चों का बड़ों के सामने मुँह खोलना भी rebellion माना जाता है, वहाँ हमारी परवरिश ऐसे घर में हुई – we are so fortunate. In papa, we had the best mentor that one can have.
ढेरों सुखद यादें हैं उन दिनों की… पापा आज 90 साल के हो गए होते। Fond remembrances 🙏Ritu Mathur, Meha Mathur Purva Mathur…

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