अहमदाबाद प्लेन हादसा : चूक ने ली 241 की बलि (श्याम चौरसिया )

अहमदाबाद एयरपोर्ट से उड़ान भरने के बाद सिर्फ 32 सेकंड में बोइंग ने आग के गोले में बदल 241 यात्रियों की बलि ले भारत सहित विश्व को सकते में डाल दिया। विमान हादसों के इतिहास में ये सबसे भयावह, दुर्भाग्यपूर्ण, हैरतंगेज हादसों में से एक है। देझते देखते 241 अपने लोग दुनिया से जुड़ा हो यादे छोड़ गए। उनमें गुजरात के पूर्व cm रूपानी भी थे।
मन को विचलित कर देने वाली इस घटना पर pm मोदी, सोनिया गांधी, राहुल गांधी, अभी केंद्रीय मंत्रियों, पूर्व cm, कांग्रेस,आप, शिवसेना आदि के तमाम नेताओ ने शोक व्यक्त किया। दुख,शोक में अनेक हस्तियों ने अपने पारिवारिक मांगलिक उत्सव, धार्मिक अनुष्ठान, राजनेतिक समारोह टाल दिए।
गृह मंत्री अमित शाह, नागरिक उड्डयन मंत्री, गुजरात के cm सहित तमाम जिम्मेदार घटना स्थल का वीभत्स दृश्य देख पीड़ा,दुख, से उभर नही पाए। पहली प्राथमिकता चिकित्सीय सेवाएं सुलभ करवा कर घायलों को राहत पहुचाने, मृत शरीरों की सही शिनाख्त करवा कर परिजनों को सोपने की जिम्मेदारी निभाने में शासन, प्रशासन जुट गया था।
जिस मैडिकल छात्रों के हॉस्टल से विमान टकराया था। यदि उस हॉस्टल में लोग होते तो मृतको की संख्या काफी बढ़ जाती।
फिर भी 50 से ज्यादा लोग घायल हुए है। उनका इलाज सिविल हॉस्पिटल में जारी है।
टाटा संस् ने हर मृतक के बदले बतौर क्षति 01 करोड़ रुपये परिजनों को देने का मानवीय धर्म निभा मिशाल पेश की।
देश गमगीन है । शोक में डूबा हुआ है।
ये तो जांच तय करेगी कि हादसा मानवीय या यांत्रिकी चूक से हुआ है। हादसे में एक मात्र बचे सौभाग्यशाली रमेश विश्वास के अनुसार कुछ समझ पाते उसके पूर्व ही हए विस्फोट में सब कुछ तबाह हो गया।
इस हादसे को लेकर बहस चलनी तय है। कमियां गिनाई जाएंगी। कोसा जायेगा।
फिलहाल इस हादसे की जिमनेदारी pm मोदी, गृह मंत्री अमित शाह,नागरिक उड्डयन मंत्री पर डाल कांग्रेस के कुछ नेताओं ने उनसे स्तीफा मांग लिया तब तो विश्व मे भारत भाल को ऊंचा करने वाले आप्रेशन सिंधुर को सफल बनाने वाले सभी रथी- महारथियों को भारत रत्न मिलना चाहिए।
