झोला छाप ख़बरी भेंस के गले का घंटा और वर्तमान पत्रकारिता ….?

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पत्रकारिता का भारत मे स्तर अब वैसा नही रहा जैसा कि पहले होता था पर इसके पीछे कारण यह भी है कि गिने चुने पत्रकार होते थे जो वो बताते थे हमे वही सच लगता था तब वो दौर ओर था तब जनता इतनी सूझवान नही थी लेकिन अब समय बदल चुका है

अब पत्रकारों की भरमार है हर कोई किसी दूसरे का हाथ पकड़ कर बाद मे उसी के कंधे पर अपने पैर रख कर ऊंचाईयां हासिल करना चाहता है पत्रकार वही जो किसी न किसी पार्टी के पक्ष मे बोले कहने का मतलब चाटुकारिता भरपूर होना यह योग्यता अब के पत्रकार में होना जरूरी है

दोमुंही बात पर स्टैंड लेना एक ही राजनीतिक पार्टी के लिए यह भी जरूरी है तो मतलब यह है कि पत्रकार अब एक मोहरा मात्र रह गया है वह वो ही लिखेगा छपेगा या बोलेगा पक्ष मे जो उसे उसके राजनीतिज्ञ आका कहेंगे…?

आपको एक कहनी के तौर पर शायद वर्तमान पत्रकारिता के मायने समझ आए ..
जितनी पुरानी सभ्यता है,उतना ही पुराना इतिहास है। पुराने जमाने में रुपए तो होते नहीं थे इसलिए चोर पशुओं को ही चुरा लेते थे। आमतौर पर पशुओं के मालिक चौकन्ना होकर सोते थे, लेकिन चोर बहुत ही शातिर होते थे ।

इससे एक कदम आगे बढ़ते हुए पशु मालिकों ने एक रास्ता निकाला की भैंसों के गले में एक घंटा बांध दिया जाता था जिससे जब भी भैंस गर्दन हिलाती वह घंटा बजता था जो इस बात का संकेत था कि भैंस अपनी जगह खूंटे से बंधी हुई है । अब चोरों ने एक नई जुगत निकाली जब चोर भैंस को खोलते थे तो उसके गले से घंटा भी खोल लेते थे और 1 चोर घंटा लेकर एक दिशा में जाता और दूसरा भैंस को लेकर उल्टी दिशा में चला जाता था ।जो घंटा लेकर जाता था वह थोड़ी थोड़ी देर में उसे बजाता रहता था जिससे पशु मालिक को यह भ्रम हो कि पशु वहीं पर है । काफी दूर जाने के बाद जब मालिक कोई पता चलता कि भैंस अपने स्थान पर नहीं है तो कई लोग मिलकर उसे ढूंढने के लिए अंधेरे में पीछा करते । ऐसे में चोर द्वारा बजाई भी घंटे की आवाज भ्रम पैदा करती थी और लोग उसी दिशा में बढ़ जाते की भैंस उधर ही कहीं गई है। जबकि भैंस तो दूसरी दिशा में जा चुकी । कुछ देर के बाद चोर इस घंटे को कहीं फेंक देता था । लोग जब आते तो भैंस तो मिलती नहीं वह घंटा मिलता था । आप किसी चीज की कोशिश कर रहे हैं और पूरी उम्मीद से ऐसा कर रहे हैं लेकिन आखिर मैं आपको निराशा हाथ लगे तो कहते हैं कि घंटा मिला । बेइज्जती करने के लिए इसका इस्तेमाल नहीं किया जाता बल्कि यह कहने के लिए किया जाता है कि आपको कुछ नहीं मिलने वाला…..?

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