हमास के अटैक के सालभर बाद भी इजराइली बस्तियां खाली

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‘मेरी बीवी और बच्चे 49 दिन हमास की कैद में गुजारकर आए हैं। 16 दिन तक एक गंदे बंकर में रहे। वहां रोशनी तक नहीं थी। उनका दम घुटता था। 10 महीने से ज्यादा वक्त हो गया, लेकिन बीवी आज भी उस मेंटल ट्रॉमा से बाहर नहीं निकल पाई है। रात में डरकर उठ जाती है। बच्चे सायरन की आवाज सुनकर सहम जाते हैं।’

इजराइल के योनी एशर और उनके परिवार की जिंदगी 7 अक्टूबर, 2023 के बाद पहले जैसी नहीं रही। इसी दिन शाम करीब 4 बजे हमास के सैकड़ों आतंकी गाजा पट्टी के रास्ते साउथ इजराइल में घुस गए। अंधाधुंध फायरिंग की। 1139 लोगों को मार दिया और 251 लोगों को अगवा करके ले गए। इन्हीं में योनी एशर का परिवार भी था।

योनी की पत्नी वीकेंड पर बच्चों के साथ अपनी मां से मिलने गाजा से सटे निर ओज गांव आई थीं। योनी उस वक्त तेल अवीव में थे। उन्हें बीवी-बच्चों के अगवा होने का पता एक वायरल वीडियो से चला।

वीडियो में योनी की पत्नी डोरोन, बेटी आविव का हाथ थामे हुए हैं। दूसरी बेटी रज ने गुलाबी ड्रेस पहनी हुई है। दादी इफरत रज को गले लगाए हुए हैं।
वीडियो में योनी की पत्नी डोरोन, बेटी आविव का हाथ थामे हुए हैं। दूसरी बेटी रज ने गुलाबी ड्रेस पहनी हुई है। दादी इफरत रज को गले लगाए हुए हैं।

इस हमले से भड़के इजराइल ने गाजा में हमास के ठिकानों पर हमले शुरू कर दिए। 8 अक्टूबर 2023 के बाद से अब तक गाजा में 41 हजार से ज्यादा फिलिस्तीनी और हमास आतंकी मारे गए हैं। ये जंग एक साल बाद भी चल रही है। गाजा का हाल ऐसा हो गया है कि फिलिस्तीन के PM मोहम्मद शतायेह ने इसे ‘ब्लड वैली’ नाम दे दिया। दावा किया कि अब यहां लाशों को दफनाने की जगह नहीं बची है।

इजराइल के नॉर्थ और साउथ बॉर्डर आज भी शांत नहीं हैं। इजराइल और हमास के बीच शुरू हुई जंग अब बढ़ते-बढ़ते लेबनान और ईरान तक पहुंच गई है।

एक साल बाद इजराइल और गाजा में क्या हालात हैं? दोनों तरफ के आम लोगों की जिंदगी कितनी बदली? इन सवालों के जवाब तलाशने के लिए हमने वहां रह रहे कुछ लोगों, एक्सपर्ट्स और इजराइली सेना के अफसरों से बात की।

सबसे पहले बात इजराइल की… हमास के आतंकी हमेशा घेरे रहते थे, 49 दिन उनकी कैद में रहा परिवार तेल अवीव में रहने वाले योनी की पत्नी डोरोन, 5 साल की बेटी रज और 2 साल की बेटी आविव 49 दिन हमास की कैद में रहीं। 24 नवंबर, 2023 को आतंकियों के कब्जे से छूटकर अपने घर पहुंचीं।

योनी बताते हैं, ‘मेरी पत्नी और बच्चों को दो जगह रखा गया। 16 दिन बंकर में, फिर उन्हें एक हॉस्पिटल में शिफ्ट कर दिया गया। इसे हमास ने एक्सप्लोसिव से घेर रखा था। मेरी पत्नी और बच्चे अब भी नॉर्मल लाइफ नहीं जी पाते। मैं उन्हें नॉर्मल करने के लिए हॉलिडे पर ले जाता हूं, लेकिन उस हादसे की यादें अब भी उन्हें परेशान करती हैं।’

योनी बताते हैं, ‘मेरे लिए हर दिन डरावना था। आज भी मैं उन परिवारों के कॉन्टैक्ट में हूं, जिनके अपने अब भी बंधक हैं।’

इजराइल ने बॉर्डर से 1.2 लाख लोगों को सेफ जगह शिफ्ट किया इजराइल की सीनियर जर्नलिस्ट शीर कोरेन बताती हैं, ‘हमास के हमले और उससे जंग शुरू होने के बाद इजराइल के साउथ और नॉर्थ एरिया से 1.2 लाख से ज्यादा लोगों को सेफ जगह पर शिफ्ट किया गया है। साउथ में तो ज्यादातर घर अब खाली हैं। लोगों के सामान अब भी यार्ड में बिखरे पड़े हैं। हालांकि, हमास के खिलाफ लड़ाई को पूरे देश का सपोर्ट है।‘

‘7 अक्टूबर को हुए नरसंहार के एक साल बाद इजराइल के लोग एक तरह से नई जिंदगी जी रहे हैं। रोज जंग का खतरा रहता है। हमास की कैद में रह रहे बंधकों की जिंदगी को लेकर डर रहता है। उनके परिवार के लोगों के लिए हर दिन डरावना है।‘ शीर कोरेने कहती हैं

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ये परिवार चाहते हैं कि सरकार जंग की बजाय बंधकों को वापस लाने की कोशिश करे। हमास की कैद से छूटे बंधकों को नॉर्मल लाइफ में वापस लाना भी एक चुनौती है।

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‘हमास के हमले ने पूरे मिडिल ईस्ट को अस्थिर कर दिया है। नॉर्थ इजराइल में हिजबुल्लाह, लेबनानी उग्रवादी समूह और ईरान के सपोर्ट वाले आतंकी रॉकेट और मिसाइल से हमले कर रहे हैं। बॉर्डर के दोनों ओर रहने वाले खुद को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं। बॉर्डर एरिया में बीच सड़क पर कॉन्क्रीट की 20 फीट ऊंची प्रोटेक्टिव वॉल बनाई गई है।‘

‘इजराइल का मकसद ईरान के सपोर्ट से चल रहे आतंकी संगठन हिजबुल्लाह, हमास, इराकी मिलिशिया और यमन में हूती संगठनों को खत्म करना है। ईरान पहले से न्यूक्लियर हथियार बनाने के करीब है। अगर ईरान और इजराइल के बीच जंग होती है, तो इसके नतीजे भयावह होंगे।‘

शीर आगे कहती हैं, ‘इजराइल ने हिजबुल्लाह पर हमले कर उसके चीफ हसन नसरल्लाह समेत कई बड़े लीडर्स को मार गिराया। 20 सितंबर को हिजबुल्लाह की लड़ाकू यूनिट राडवान ब्रिगेड के कमांडर इब्राहिम अकल को मार डाला।‘

सिर्फ 17% इजराइली लोगों को सरकार पर भरोसा शीर कोरेन बताती हैं, ‘पिछले एक साल के दौरान कई सर्वे हुए। इनमें दावा किया गया कि युद्ध खत्म करने के लिए सरकार की कोशिशों से लोग निराश हैं। इजराइल डेमोक्रेसी इंस्टीट्यूट के एक सर्वे के मुताबिक, सिर्फ 17% इजराइलियों ने सरकार पर भरोसा जताया।

अब बात इजराइल में रहे रहे भारतीयों की… हमलों की वजह से तनाव बढ़ा, लेकिन काम के मौके भी मिले हमास और हिजबुल्लाह से चल रही जंग का इजराइल में रह रहे भारतीयों पर क्या असर हुआ है। ये जानने के लिए हमने कुछ भारतीयों से बात की। नरेन थापा 14 साल से इजराइल में हैं।

वे बताते हैं, ’पिछले एक साल में मैंने जितना डर महसूस किया है, पहले कभी नहीं किया। हमास के अटैक के बाद इजराइल में भारतीयों की तादाद बढ़ी है। खास तौर से कंस्ट्रक्शन, एग्रीकल्चर और केयरटेकर सेक्टर में डिमांड बढ़ी है। पहले से रह रहे भारतीयों में तो अब उतना डर नहीं है, लेकिन नए आ रहे लोग घबराए हुए हैं। इंडियन ऐंबैसी ने सभी को एकजुट किया है, ताकि वे सेफ रह सकें।’

नरेन थापा कहते हैं, ’लोगों को सेफ जोन और बंकरों तक पहुंचाते हैं। ये नेटवर्क सिर्फ भारतीयों तक सीमित नहीं है, बल्कि नेपाल, श्रीलंका, फिलीपींस और बाकी पड़ोसी देश के लोगों की भी मदद की जाती है।’

‘इजराइल के साउथ और सेंट्रल हिस्से में पहले ज्यादा तनाव था, लेकिन अब हालात सामान्य हैं। अब इजराइल के नॉर्थ हिस्से में तनाव है। लेबनान के हालात का असर वहां दिख रहा है। नॉर्थ में रह रहे लोग बेहद डरे हुए हैं, क्योंकि वहां कभी भी कुछ हो सकता है।’

इजराइल ने डेवलप किया डिफेंस सिस्टम, अटैक से दो मिनट पहले अलर्ट हमास, हिजबुल्लाह के बाद ईरान के हमलों ने भारतीयों में तनाव बढ़ा दिया है। उन्हें लगता है कि अगर ईरान ने युद्ध शुरू किया, तो हालात खराब हो सकते हैं। बहुत से भारतीय अब लौटने के बारे में सोच रहे हैं।

नरेन बताते हैं, ’लोगों की सुरक्षा के लिए इजराइल डिफेंस फोर्स ने नया सिस्टम डेवलप किया है। मिसाइल से अटैक होने पर हमारे फोन पर एक से दो मिनट पहले ही अलर्ट आ जाता है। फिर सायरन बजने लगते हैं। हमारे पास खुद को सेफ करने और बंकर तक पहुंचने के लिए 30 सेकेंड होते हैं। ये बहुत कारगर सिस्टम है। हम लोगों को समझा रहे हैं कि वे डर की वजह से इजराइल न छोड़ें।’

अब बात गाजा की… एक साल में गाजा तबाह, न स्कूल बचे, न अस्पताल इजराइल के यरुशलम में रहने वाले भारतीय मूल के एक जर्नलिस्ट बताते हैं, ‘7 अक्टूबर, 2023 से पहले भी गाजा के लोगों की जिंदगी मुश्किल थी। इसकी वजह बिजनेस और आवाजाही पर इजराइली प्रतिबंध और हमास का धार्मिक शासन था। 7 अक्टूबर के बाद से इजराइल के मिलिट्री एक्शन ने इसे और मुश्किल भरा बना दिया है।’

‘हिजबुल्लाह ने अब तक अपने सबसे हाईटेक वेपन सिस्टम यानी स्पेसिफिक गाइडेड मिसाइलों का इस्तेमाल शुरू नहीं किया है। 25 सितंबर को उसने तेल अवीव के पास इजराइली खुफिया एजेंसी मोसाद के हेडक्वार्टर्स की तरफ कादिर-1 मिसाइल दागी थी। मिसाइल को इजराइली एयर सेफ्टी सिस्टम ने रोक दिया।‘

गाजा की 2% आबादी खत्म, मलबे में दबे शव निकालने में 3 साल लगेंगे गाजा हेल्थ मिनिस्ट्री के आंकड़ों के अनुसार, गाजा में 7 अक्टूबर से अब तक 41 हजार से ज्यादा लोग मारे गए हैं। ये गाजा की आबादी का करीब 2% है। इजराइली सेना के मुताबिक, इनमें 17 से 18 हजार हमास के लड़ाके थे।

यूनाइटेड नेशन की एक संस्था ने अपनी रिपोर्ट में दावा किया है कि अब भी 10 हजार फिलिस्तीनियों की डेड बॉडीज मलबों के नीचे दबी हैं। इन्हें निकालने में तीन साल लग सकते हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, गाजा पट्टी के आधे घरों को नुकसान पहुंचा है या वे पूरी तरह से तबाह हो गए हैं। इसमें 80% कॉमर्शियल सेंटर्स और 85% स्कूल हैं। गाजा के 90% लोगों को घर छोड़ना पड़ा। जून में जारी यूनाइटेड नेशन की रिपोर्ट के अनुसार, गाजा में खाना जुटाना चुनौती बन गया है। यहां के 50,000 बच्चे गंभीर कुपोषण का शिकार हैं।

गाजा का हेल्थ सिस्टम ध्वस्त हो चुका है। इजराइल की बमबारी में गाजा के ज्यादातर अस्पताल तबाह हो चुके हैं। इजराइल दावा करता रहा है कि गाजा के हॉस्पिटल आतंकियों के लिए सेफ प्लेस हैं।

डॉक्टर्स विदाउट बॉर्डर्स की अप्रैल की एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि युद्ध से पहले यहां डायरिया के मामले 25 गुना बढ़े हैं। इंटरनेशनल क्राइसिस ग्रुप की रिपोर्ट के मुताबिक, 7 अक्टूबर से अब तक इजराइलियों ने फिलिस्तीनियों पर 1 हजार से ज्यादा हमले किए।

2024 में इजराइल सरकार ने फिलिस्तीन की 9 वर्ग मील से ज्यादा जमीन कब्जा कर ली। 1990 के दशक में हुए ओस्लो समझौते के बाद से कब्जा की गई ये सबसे ज्यादा जमीन है।

रिपोर्ट में दावा- 36% फिलिस्तीनी अब भी हमास के सपोर्ट में एक सर्वे रिपोर्ट में दावा किया गया है कि फिलिस्तीनियों के बीच हमास के लिए अब भी 36% सपोर्ट है। उसके प्रतिद्वंद्वी ग्रुप ‘फतह’ को 21% लोग सपोर्ट करते हैं। वॉर से पहले फतह के पास इससे ज्यादा समर्थन था।

गाजा के जमीनी बॉर्डर पर इजराइली सेना का कंट्रोल इजराइल डिफेंस फोर्स के स्पोक्सपर्सन रियर एडमिरल डेनियल हगारी ने दैनिक भास्कर से बातचीत में बताया कि हमने गाजा-मिस्र बॉर्डर के आसपास बफर जोन पर कंट्रोल कर लिया है। इसे फिलाडेल्फिया कॉरिडोर कहा जाता है। इसका मतलब है कि अब हम गाजा के पूरे लैंड बॉर्डर को कंट्रोल कर रहे है।’

फिलाडेल्फिया कॉरिडोर एक बफर जोन है, जो कुछ हिस्सों में सिर्फ 100 मीटर चौड़ा है। ये मिस्र के साथ 13 किमी की सीमा साझा करता है।

डेनियल बताते हैं, ‘सेना ने राफा और गाजा में ऑपरेशन जारी रखा है। इसमें आतंकी ठिकानों पर हवाई हमले भी शामिल हैं। इजराइली एयरफोर्स भी एक्शन में है। हम अमेरिकी एयर डिफेंस सिस्टम का भी इस्तेमाल कर रहे हैं। हमास सिर्फ संगठन नहीं, विचार है। हमें उस विचार को खत्म करना है।’

इजराइल ने मजबूत की आयरन वॉल IDF के स्पोक्सपर्सन बताते हैं, ‘7 अक्टूबर, 2023 के बाद हमने अपनी ‘आयरन वॉल’ को और ज्यादा मजबूत किया है। ये एक स्मार्ट फेंसिंग तकनीक है। इसमें हाई फ्रीक्वेंसी के सेंसर सिस्टम, ऑटोमेटिक मशीन गन और वॉच टावर शामिल हैं।’

‘गाजा पट्टी के हर इंच पर ड्रोन, सैटेलाइट और स्पाई बलून के जरिए निगरानी की जा रही है। फिलिस्तीनी आतंकी समूह फेंसिंग के ऊपर से रॉकेट दागने की कोशिश करते हैं। इससे मिसाइल डिफेंस सिस्टम निपटता है। इसे हम ‘आयरन डोम’ कहते हैं।’

इजराइली प्रधानमंत्री बोले- बंधकों की रिहाई तक लड़ाई खत्म नहीं होगी इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा है कि इजराइल गाजा को आतंकियों से मुक्त कराना चाहता है। सभी इजराइली बंधकों के रिहा होने तक संघर्ष जारी रहेगा।

इस बीच, यमन के हूती विद्रोहियों ने हमास का समर्थन करते हुए इजराइल के खिलाफ युद्ध छेड़ दिया है। वे लाल सागर में इजराइली जहाजों पर हमला कर रहे हैं।

मिसाइल और ड्रोन अटैक की वजह से नवंबर, 2023 में इजराइल को ईलाट पोर्ट बंद करना पड़ा। सितंबर, 2024 में हूती विद्रोहियों ने सेंट्रल इजराइल पर मिसाइल हमला किया। इसके अलावा लेबनान की उत्तरी सीमा पर हिजबुल्लाह की बमबारी से 60 हजार से ज्यादा इजराइली विस्थापित हुए हैं।

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