किसके पास है 7 साल की पाकिस्तानी हिंदू बच्ची प्रिया

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तारीख: 19 अगस्त, 2021
जगह: पाकिस्तान के सुक्कूर जिले का संगरार शहर
राजकुमार और उनकी पत्नी वीना मोहर्रम के जुलूस में शरबत बांट रहे थे। 7 साल की बेटी प्रिया भी मम्मी-पापा के साथ ही काम में लगी थी। अचानक राजकुमार और वीना का ध्यान गया तो प्रिया गायब थी, आस-पास पूछा तो किसी को नहीं पता था वो कहां है।

प्रिया की तलाश शुरू हुई। बौखलाए मां-बाप ने प्रिया को हर उस जगह ढूंढा, जहां उसके मिलने की जरा भी उम्मीद थी, लेकिन वो नहीं मिली। परिवार ने पुलिस स्टेशन में बेटी के किडनैप होने की शिकायत दर्ज कराई। उन्हें शक था कि किसी ने उनकी बेटी को अगवा कर लिया है।

इस बात पर उन्हें तब और यकीन हो गया, जब सिंध प्रांत के गृह मंत्री जिआउल हसन लंजर ने विधानसभा में कहा- ‘प्रिया सेफ है और जल्द ही परिवार के पास होगी।’

हालांकि, पुलिस इसे अब भी ब्लाइंड केस बता रही है। सीधा मतलब था कि प्रिया की लोकेशन मिल चुकी है, लेकिन राजकुमार और वीना को इसकी जानकारी नहीं दी जा रही।

गृह मंत्री के इस बयान के 2 महीने बाद भी प्रिया परिवार के पास नहीं पहुंची। इसी के विरोध में 19 जुलाई को प्रिया के माता-पिता, हिंदू कम्युनिटी और सिविल सोसाइटी के लोगों ने कराची में धरना दिया और उसकी रिहाई की अपील की। लोगों का आरोप है कि पाकिस्तान में हिंदू बच्चियां असुरक्षित हैं और प्रिया का केस भी इसी से जुड़ा है।

पाकिस्तान में पिछले साल बच्चों की किडनैपिंग के 1938 मामले दर्ज किए गए। वहीं, स्टेट ऑफ ह्यूमन राइट्स की रिपोर्ट के मुताबिक, जबरदस्ती धर्म परिवर्तन के पिछले एक साल में 136 केस सामने आए। पाकिस्तान में दैनिक भास्कर की टीम ने प्रिया की फैमिली और हिंदू कम्युनिटी के लीडर्स से मुलाकात कर पूरे केस को समझा।

सबसे पहले बात प्रिया के परिवार की…
पिता बोले- चंद मिनटों में बेटी कैसे गायब हुई पता ही नहीं चला

उत्तरी सिंध के सुक्कूर जिले संगरार में ज्यादातर हिंदू कम्युनिटी के ही लोग हैं। उत्तरी सिंध में हिंदू लड़कियों के कथित अपहरण की खबरें सामने आती रही हैं। साथ ही कम उम्र की लड़कियों के जबरदस्ती धर्म परिवर्तन के आरोप भी लगते रहे हैं। प्रिया के मामले ने इन आरोपों को और तूल दे दिया है।

प्रिया का परिवार संगरार में रहता है। पिता राजकुमार दुकान चलाते हैं। तीन साल पहले बेटी के अचानक गायब हो जाने की घटना को याद कर वो आज भी गमगीन हो जाते हैं। राजकुमार बताते हैं, ‘मोहर्रम के दिन जुलूस में शामिल लोगों को हम शरबत पिला रहे थे। प्रिया भी हमारे साथ थी। बस चंद मिनटों के लिए मैं घर के अंदर गया, लौटा तो प्रिया वहां नहीं मिली।’

‘पहले हमने आस-पास तलाशा। इसके बाद लोकल लोगों के साथ जाकर पुलिस स्टेशन में किडनैपिंग की रिपोर्ट दर्ज करवाई। दो महीने पहले ही सिंध के गृह मंत्री जिआउल हसन लंजर ने विधानसभा में दावा कर हमें उम्मीद दी थी कि प्रिया जिंदा है और सुरक्षित है। जल्द ही उसे परिवार को सौंप दिया जाएगा। इस बयान को दिए अब दो महीने हो चुके हैं।’

सिंध प्रांत के गृहमत्री जिआउल हसन लंजर ने 19 जुलाई को प्रिया के परिवार से मिलकर फिर भरोसा दिलाया कि प्रिया जिंदा है और हमारे पास इसके सबूत हैं। पाकिस्तान के न्यूजपेपर DAWN ने इसकी खबर पब्लिश की थी।
सिंध प्रांत के गृहमत्री जिआउल हसन लंजर ने 19 जुलाई को प्रिया के परिवार से मिलकर फिर भरोसा दिलाया कि प्रिया जिंदा है और हमारे पास इसके सबूत हैं। पाकिस्तान के न्यूजपेपर DAWN ने इसकी खबर पब्लिश की थी।

राजकुमार बताते हैं, ‘कराची में प्रोटेस्ट के दिन भी सिंध के गृह मंत्री जिआउल हसन लंजर ने हमने मुलाकात की। उन्होंने फिर भरोसा दिलाया है कि प्रिया जिंदा है और स्वस्थ है।’ गृह मंत्री के बयान पर पाकिस्तान के अखबार DAWN ने ये खबर भी पब्लिश की थी।

हालांकि, इस पर प्रिया की मां वीना का कहना है कि अगर उन्हें पता है कि हमारी बेटी सुरक्षित है, तो वे ये भी जानते होंगे कि वो कहां है। वीना ने अथॉरिटीज से अपनी बेटी की रिहाई की अपील की।

वे कहती हैं, ‘दुआ के वक्त ही प्रिया बाहर गई और फिर कहां चली गई, पता ही नहीं चला। पुलिस को सब पता है कि प्रिया कहां है, लेकिन फिर भी नहीं दे रही है।’

पुलिस ने 1000 से पूछताछ की, 22 का DNA टेस्ट कराया, लेकिन कोई सुराग नहीं
सुक्कूर पुलिस के लिए प्रिया का केस चैलेंज बना हुआ है। पुलिस का कहना है कि ये बेहद मुश्किल केस है, क्योंकि प्रिया ऐसे वक्त में गायब हुई है, जब मोहर्रम के जुलूस के चलते मोबाइल फोन सर्विस बंद थी और उस दिन पब्लिक ट्रांसपोर्ट न के बराबर था। आस-पास कहीं CCTV भी नहीं था कि कोई लीड मिल सके।

केस को सुलझाने के लिए पुलिस की तरफ से की गई जांच के बारे में सुक्कूर SSP आमिर शहजाद बताते हैं कि घटना के बाद सुक्कूर पुलिस ने 1000 से ज्यादा लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ भी की। केस को सुलझाने के लिए 22 संदिग्धों के DNA सैंपल्स भी लिए गए, लेकिन कोई सुराग नहीं मिला। इसके साथ ही हमने दरगाह, मंदिरों, आस-पास खानाबदोशों और भिखारियों की बस्तियों की भी जांच की।

आमिर का कहना है कि कड़ी पूछताछ और फोरेंसिक टेस्ट्स के बावजूद अब तक कोई पुख्ता सबूत नहीं मिला है। घटना की टाइमिंग को देखते हुए हमारा शक आतंकी संगठनों पर भी जा रहा है। सिंध हाईकोर्ट ने 2021 में ही इस केस की जांच के लिए पुलिस की एक कमेटी बनाई थी। हालांकि, इस कमेटी की जांच रिपोर्ट को अभी तक सार्वजनिक नहीं किया गया है।

हर रोज हिंदू बेटियां किडनैप हो रहीं, कब तक कोर्ट-पुलिस के चक्कर काटें
अपहरण का ये केस अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में है। संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार समिति (UNHRC) भी मामले को लेकर गंभीर है। ह्यूमन राइट्स एक्टिविस्ट मुनव्वर लघारी ने सिंध में बिगड़ती कानून-व्यवस्था को लेकर चिंता जताई है।

इधर, प्रिया की सकुशल घर वापसी की मांग को लेकर सिविल सोसाइटी और हिंदू कम्युनिटी के सैकड़ों लोग कराची के तीन तलवार मॉन्युमेंट पर इकट्‌ठा हुए और रैली निकाली। प्रोटेस्ट में शामिल हुए लोगों की शिकायत है कि सिंध सरकार और पुलिस प्रिया की रिहाई कराने में नाकाम रही।

ये तस्वीर कराची के तीन तलवार मॉन्युमेंट की है। 19 जुलाई को प्रिया के माता-पिता, हिंदू कम्युनिटी और सिविल सोसाइटी के लोगों ने कराची में धरना दिया और उसकी रिहाई की अपील की।
ये तस्वीर कराची के तीन तलवार मॉन्युमेंट की है। 19 जुलाई को प्रिया के माता-पिता, हिंदू कम्युनिटी और सिविल सोसाइटी के लोगों ने कराची में धरना दिया और उसकी रिहाई की अपील की।

सुक्कूर जिले की हिंदू पंचायत के अध्यक्ष मुखी ईश्वर लाल माखेजा सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहते हैं, ‘500 घरों वाले छोटे से कस्बे संगरार में एक बच्ची गायब हो जाती है, वो भी तब जब त्योहार के चलते चप्पे-चप्पे पर पुलिस फोर्स तैनात थी। लोगों की सुरक्षा के लिहाज से ये एक गंभीर मामला है।’

माखेजा की मांग है कि पाकिस्तानी हिंदुओं को भी सुरक्षा मिले, ताकि वे भी देश के सम्मानजनक नागरिकों की तरह जिंदगी गुजार सकें।

माइनॉरिटी राइट एक्टिविस्ट गजाला शफीक पाकिस्तान में माइनॉरिटीज, खास तौर पर महिलाओं और लड़कियों की बुरी स्थिति पर कहती हैं, ‘हर रोज हमारी बेटियां किडनैप की जा रही हैं। हमारा पूरा दिन कोर्ट और पुलिस स्टेशन के चक्कर काटते हुए बीत जाता है।’

सोशल एक्टिविस्ट प्रियंका कपूर भी प्रिया की रिहाई के लिए निकाली गई रैली में शामिल हुईं। प्रियंका कहती हैं, ‘माइनॉरिटी के तौर पर यहां हम अपने रीति-रिवाज तो मनाते हैं, लेकिन कहीं न कहीं असुरक्षित महसूस करते हैं। जब बात हमारी सुरक्षा की आती है तो हमें हमेशा डर रहता है कि कहीं हमारे साथ कोई हादसा न हो जाए, कहीं किडनैप न कर लिया जाए।’

‘मुझे नहीं लगता कि यहां की माइनॉरिटी खुद को मुस्लिम अवाम की तरह सुरक्षित महसूस करती है।’

ह्यूमन राइट एक्टिविस्ट शीमा किरमानी हिंदुओं के साथ हो रहे भेदभाव को लेकर सरकार पर सवाल उठाती हैं। वे कहती हैं, ‘जो हम पर शासन चला रहे हैं, उन्हें इस बात की जरा भी चिंता नहीं है कि हमारे साथ क्या हो रहा है। हर रोज हमारी बेटियां गायब हो रही हैं, उठा ली जा रही हैं, लेकिन कोई हमारा हाल पूछने वाला भी नहीं है।’

प्रिया को सुरक्षित फैमिली को सौंपना स्टेट की जिम्मेदारी
इस केस को लेकर हमने ह्यूमन राइट कमीशन के वाइस चेयरमैन काजी खिजरे से भी मुलाकात की। वो प्रिया के केस को सुलझाने में हो रही देरी को लेकर सिंध प्रशासन की आलोचना करते हैं। वे कहते हैं, ‘प्रिया का केस कोई सामान्य केस नहीं है। इस मामले में स्टेट एजेंसीज ये जानती हैं कि बच्ची कहां है। इसलिए ये स्टेट की जिम्मेदारी बनती है कि वो प्रिया को सुरक्षित उसके परिवार को लौटाए।

एक्टिविस्ट्स प्रिया की रिहाई को लेकर अथॉरिटी पर दबाव बना रहे हैं और सोशल मीडिया पर भी कैंपेन चला रहे हैं। इसी दबाव के चलते सिंध सरकार ने अप्रैल में एक जॉइंट इन्वेस्टिगेशन टीम बनाई। नए सिरे से मामले की जांच शुरू होने के बाद भी अथॉरिटी अब तक प्रिया का पता नहीं लगा सकी है।

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