अलीराजपुर की प्राचीन बावड़ी को मिल गया नया जीवन

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प्रदेश में ‘जल गंगा संवर्धन’ अभियान चलाया जा रहा है। अभियान में प्राचीन बावड़ी एवं जल-संरचनाओं का जीर्णोद्धार किया जा रहा है। अलीराजपुर जिले में जोबट स्थित देव स्थान पर बनी प्राचीन बावड़ी का सफाई और जीर्णोद्धार किया गया।

बावड़ी में लम्बे समय से गाद, मिट्टी और कचरा निकालने का कार्य जिला प्रशासन, सामाजिक संगठनों एवं आम नागरिकों के सामूहिक प्रयासों से किया गया। प्राचीन बावड़ी में लगे पीपल के पौधों को सुरक्षित निकाल कर अन्य स्थान पर रोपण किया गया। करीब 60 फीट गहरी बावड़ी वर्ष 1906 की है। प्राप्त शिलालेख के अनुसार बावड़ी का निर्माण तत्कालीन नगर कोतवाल ने कराया था। बावड़ी के सफाई कार्य में 10 ट्रॉली गाद और कचरा निकाला गया है।

बावड़ी का जीर्णोद्धार किया गया है। सुरक्षा के लिये मुंडेर बनाई गई है। इसके साथ ही हैण्डपंप भी लगाया गया है। हैण्डपंप से अब मंदिर परिसर में भक्तों को साफ पानी मिल रहा है। बावड़ी की सीढ़ियों पर जाली लगाकर उसे और सुरक्षित किया गया है।

इंदौर संभाग में कमिश्नर श्री दीपक सिंह के मार्गदर्शन में संभाग के सभी जिलों में प्राचीन बावड़ी और जल संरचनाओं के जीर्णोद्धार का कार्य किया जा रहा है। अलीराजपुर कलेक्टर डॉ. अभय अरविंद बेडेकर ने बताया कि अलीराजपुर में अनेक प्राचीन बावड़ियां हैं, इन्हें चिन्हित कर इनके जीर्णोद्धार के लिये कार्य-योजना बनाकर काम शुरू कर दिया गया है।

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