अमेरिका से आए बच्चों ने सिद्धदाता आश्रम में धारण किया यज्ञोपवीत

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जगदगुरु स्वामी पुरुषोत्तमाचार्य महाराज ने गायत्री मंत्र फूंककर पूर्ण की विधि

अमेरिका में रहने वाले ज्योतिष और अमन ने आज श्री सिद्धदाता आश्रम में अपना यज्ञोपवीत संस्कार करवाया है। दोनों चचेरे भाई हैं और दोनों बहुत प्रसन्न नजर आते हैं। आश्रम के अधिपति अनंतश्री विभूषित इंद्रप्रस्थ एवं हरियाणा पीठाधीश्वर श्रीमद जगदगुरु रामानुजाचार्य स्वामी श्री पुरुषोत्तमाचार्य जी महाराज ने दोनों के कान में गायत्री मंत्र देकर यज्ञोपवीत की विधि पूर्ण की। दोनों बच्चों ने सनातन पद्धति से हवन किया और भविष्य में सभी व्यसनों से दूर रहने और परंपरागत रूप से गुरु का वरण किया।

दिनेश अमेरिका में रहते हैं और वहीं कैट से विवाह किया। उनके दो बच्चे हैं ज्योतिष और जैस्मीन। दिनेश एक दशक से अधिक समय से फरीदाबाद स्थित श्री सिद्धदाता आश्रम आते हैं और यहां से दीक्षा ले रखी है। उन्हें लगा कि अमेरिकी संस्कृति में रहने हुए भी अपनी सनातन धर्म की परिपाटी अच्छी है तो बेटे ज्योतिष के यज्ञोपवीत का निर्णय लिया। उनके छोटे भाई आशीष ने भी अपने बेटे अमन का यज्ञोपवीत साथ कराने का निर्णय लिया। आशीष मुंबई में ही रहते हैं।

आज दोनों के परिवार आश्रम पहुंचे और विधि विधान से यज्ञोपवीत धारण किया। सभी के चेहरों पर प्रसन्नता और सुकून था। कैट ने कहा कि वह अपने बच्चों को इस नए रूप में देखकर बहुत खुश हैं। वहीं ज्योतिष स्वयं भी बहुत दिव्य महसूस कर रहे हैं। अमन ने कहा कि वह आगे सनातन परंपरा को निभाने का प्रयास करेंगे। जैस्मीन दोनों भाइयों को देखकर बहुत प्रसन्न थीं। उन्होंने कहा कि ऐसा मैंने पहले कभी नहीं देखा था।

इस अवसर पर जगद्गुरु रामानुजाचार्य स्वामी श्री पुरुषोत्तमाचार्य जी महाराज ने कहा कि यज्ञोपवीत सनातन परंपरा में बहुत ही महत्वपूर्ण संस्कार है। यह हमारे 16 संस्कारों में 11 वां है जिसके बाद बच्चों को गुरुकुल शिक्षा के लिए भेजने की परंपरा रही है। आज अमेरिका की धरती पर रहने के बावजूद दिनेश, आशीष और उनके परिवार ने अपने बच्चों का यज्ञोपवीत आश्रम में करवाकर अच्छा कार्य किया है। यह अन्य लोगों के लिए प्रेरणा बनेगा।

उन्होंने कहा कि आज जिस प्रकार दुनिया में दूरियां घट रही हैं, वहीं सांस्कृतिक प्रदूषण भी फैल रहा है। हमें अपने बच्चों को संस्कारित कर ऐसे प्रदूषण से बचाने का प्रयास करना चाहिए। बच्चों को बताना होगा कि उनके जीवन में क्या सही है और क्या गलत है और यह बात गुरु के सान्निध्य में आने पर ही पता चलती है। उन्होंने सभी को आशीर्वाद दिया और प्रतीक रूप में गुरु आश्रम के लिए बच्चों द्वारा मांगी गई भिक्षा को बच्चों को ही निजी उपयोग के लिए दे दिया।
गौरतलब है कि फरीदाबाद के सूरजकुंड मार्ग पर स्थित श्री सिद्धदाता आश्रम वर्ष 1989 में स्थापना के बाद ही देश दुनिया में रहने वाले धर्माग्रहियों को लुभा रहा है और उनके जीवन में आशातीत परिवर्तन कर रहा है। यहां न केवल अध्यात्म के वचन बल्कि सेवा का आग्रह भी भक्तों को लुभा रहा है वहीं चमत्कारिक ढंग से लोगों को अपने जीवन के आदि दैहिक, आदि भौतिक और आर्दि दैविक कष्टों से भी मुक्ति मिल रही है।

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