आधा दर्जन लोकों के बाद एमपी मे परशुराम लोक! Sreeprakash dixet

————————————————————
मध्यप्रदेश भाजपा का बौद्धिक चेहरा रहे स्वर्गीय अनिल माधव दवे आज जिंदा होते तो पता नहीं मामा शिवराज के कार्यकाल और उन्हीं का अनुसरण करती भैया मोहन की आध्यात्म से ओतप्रोत सत्ता को किस खिताब से अलंकृत करते.? सत्तारूढ़ पार्टी से जुड़े होने की वजह से शायद मौन रहना पसंद करते.वो 2003 के विधानसभा चुनाव में भाजपा के रणनीतिकार थे और दिग्विजय सरकार को श्रीमान बंटाधार की उपाधि दी थी.मोहन यादव उज्जैन से हैं तो आध्यात्म के प्रति आसक्ति स्वाभाविक है पर महिला आरक्षण बिल पर नारी वंदन विज्ञापनबाजी से राज्य का बजट वैसे ही सहमा है.अब परशुराम लोक की विज्ञापनबाजी पर भी करोड़ों का जनधन स्वाहा कर डाला है. महाकाल,अद्वैत,पीताम्बरा,राजाराम और देवी लोकों आदि के बाद यह शायद आठवां लोक होगा.उन्होंने उस नारी शक्ति की दशा/दुर्दशा पर कोई ध्यान नहीं दिया जिसके वंदन की विज्ञापनबाजी पर करोड़ों का जनधन लुटा दिया.वह अभागी गाँव/कस्बों/शहरों में पानी जैसी बुनियादी जरूरत के लिए मीलों पैदल परेड करती है और प्राणों पर खेल कुँओं में उतरती है.सरकारी अस्पतालों में डाक्टरों की कमी से प्रसूताओं की मौत हो जाती है. इस अभागी नारी शक्ति के लिए विभागों को जनधन का अंतरण वो कब करवाएंगे,कब.?(दैनिक भास्कर/पत्रिका/नवदुनिया की खबरें)
