सिलेंडर रखकर मंत्री का रास्ता रोका

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सिलेंडर नहीं मिल रहे, मंत्री का रास्ता रोका सीधी में मंत्री राधा सिंह नारी शक्ति वंदन पदयात्रा में शामिल होने आई थीं, लेकिन नारियों ने उन्हें अपनी शक्ति दिखा दी। सड़क पर गैस सिलेंडर रखकर उनका रास्ता रोक दिया।

हुआ यूं कि एक गैस एजेंसी के सामने महिलाओं समेत कई लोग एलपीजी सिलेंडर नहीं मिलने से परेशान हो रहे थे। उसी दौरान वहां से मंत्री राधा सिंह का गुजरना हुआ। फिर क्या था, लोगों ने उनका रास्ता रोक लिया।

हालांकि मंत्री अपनी गाड़ी में ही बैठी रहीं। वे बाहर नहीं आईं। करीब 10 से 15 मिनट इंतजार के बाद कुछ लोगों ने जाम खुलवाया, जिसके बाद मंत्री वहां से रवाना हो गईं।

बाद में उन्होंने इस विरोध प्रदर्शन की बात से ही इनकार कर दिया। उन्होंने कहा कि किसी ने उनका रास्ता नहीं रोका। वे तो कुछ देर के लिए ट्रैफिक जाम में फंस गई थीं। वहीं गैस की किल्लत पर उन्होंने कहा कि ऐसी कोई भी किल्लत नहीं है।

खरी बात यह है कि जनता कह रही है- सिलेंडर नहीं मिल रहा और सिस्टम कह रहा है- सब ठीक है। तो आखिर सच कौन बोल रहा है? अब लोग कह रहे हैं कि मंत्री को लोगों की परेशानी नहीं दिख रही। जनता सब याद रखेगी।

सीधी में सिलेंडर नहीं मिलने से नाराज महिलाओं ने मंत्री राधा सिंह का रास्ता रोका।
सीधी में सिलेंडर नहीं मिलने से नाराज महिलाओं ने मंत्री राधा सिंह का रास्ता रोका।

कलेक्टर ने हथौड़ी से ठोककर जांची गुणवत्ता देवास में कलेक्टर ऋतुराज सिंह ने हथौड़ी उठा ली। फिर दीवारों और पिलरों को ठोक-ठोककर उनकी क्वालिटी चेक की। दरअसल, कलेक्टर साहब शहर में हो रहे सरकारी निर्माण कार्यों का निरीक्षण करने पहुंचे थे।

वे निर्माणाधीन आईटीआई भवन भी पहुंचे। इस दौरान उन्हें पिलर का एक कोना टूटा हुआ दिखाई दिया, तो उन्होंने इंजीनियर से सवाल किया कि यह क्यों टूटा है। जब वे इंजीनियर के जवाब से संतुष्ट नहीं हुए, तो उन्होंने हथौड़ी मंगवाई और खुद ही क्वालिटी चेक करने लगे।

उन्होंने इंजीनियर से कमियां सुधारने और अच्छी गुणवत्ता से निर्माण कार्य करने के निर्देश दिए। वैसे कलेक्टर ऋतुराज सिंह खुद भी इंजीनियर हैं, मतलब वे इंजीनियरिंग पास हैं।

देवास में कलेक्टर ने हथौड़ी से ठोककर निर्माण कार्यों की गुणवत्ता चेक की।
देवास में कलेक्टर ने हथौड़ी से ठोककर निर्माण कार्यों की गुणवत्ता चेक की।

कलेक्टर साहब को दाल में मिली तेज मिर्ची दमोह में कलेक्टर प्रताप नारायण यादव को मिर्ची लग गई। हुआ यूं कि वे गर्ल्स हॉस्टल पहुंचे थे, जहां उन्होंने छात्राओं को दिए जाने वाला खाना चेक किया। उन्होंने जैसे ही खाना खाया, तेज मिर्ची वाली दाल से उनका मुंह जल गया। इस पर उन्होंने कहा- कितनी तेज मिर्ची डाली है, बच्चे कैसे खाते होंगे।

कलेक्टर ने हॉस्टल के कुक को कम मिर्ची डालने की नसीहत दी। कलेक्टर ने यह भी पाया कि बच्चों को मेन्यू के अनुसार खाना नहीं दिया जा रहा है, साथ ही समय पर भी उपलब्ध नहीं हो रहा है। कलेक्टर साहब ने भी जब खाना खाया, तो सब्जी नहीं बनी थी, फिर उन्होंने दाल से ही खाना खाया।

इसके अलावा भी कई बदइंतजामी कलेक्टर के सामने आईं। जैसे पानी की समस्या मिली, आरओ खराब पड़ा था, छत की सीलिंग टूटी थी। बच्चों ने खुद यह समस्या उन्हें बताई। फिर कलेक्टर ने व्यवस्थाएं सुधारने के निर्देश दिए। अब हॉस्टल के बच्चे कह रहे हैं कि साहब ऐसे ही दौरे करते रहें, तो व्यवस्थाएं सुधर जाएं और शायद कभी खराब ही न हों।

दमोह में गर्ल्स हॉस्टल में खाना खा रहे कलेक्टर को दाल में तेज मिर्ची मिली।
दमोह में गर्ल्स हॉस्टल में खाना खा रहे कलेक्टर को दाल में तेज मिर्ची मिली।

एसडीएम मैडम बोलीं- मुझे दीदी मत कहना झाबुआ के पेटलावद में किसानों से बात कर रही एसडीएम तनुश्री मीणा ने खुद को दीदी कहे जाने पर ऐतराज जताया। उन्होंने किसानों से कहा कि मुझे दीदी मत कहो। आप मुझसे तनुश्री कहकर बात कीजिएगा। यह मेरा नाम है। इस पर किसानों ने कहा कि आप बड़े हैं, आपका नाम नहीं ले सकते।

दरअसल, हुआ यूं कि किसान गेहूं खरीदी को लेकर डाक बंगले पर कलेक्टर से मिलने आए थे, लेकिन वे मिले नहीं। जबकि किसानों का कहना है कि उन्हें कहा गया था कि कलेक्टर साहब आ रहे हैं, उनसे मिल लो।

मुलाकात नहीं होने पर किसान डाक बंगले में ही बैठ गए। एसडीएम तनुश्री मीणा उन्हें समझा रही थीं। उन्होंने किसानों से कहा कि उपार्जन संबंधी कोई परेशानी है, तो उसे उपार्जन केंद्र पर ही सुना जाएगा। कोई भी अधिकारी रेस्ट हाउस में वॉशरूम के लिए आया है, तो वह आपसे मिलेगा?

झाबुआ के पेटलावद में एसडीएम मैडम ने खुद को दीदी कहे जाने पर ऐतराज जताया।
झाबुआ के पेटलावद में एसडीएम मैडम ने खुद को दीदी कहे जाने पर ऐतराज जताया।

इनपुट सहयोग – मनोज शुक्ला (सीधी), महेश सोलंकी (देवास), कैलाश दुबे (दमोह), संजय पी लोढ़ा (झाबुआ)

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