भोपाल के बड़ा तालाब पर 347 अवैध कब्जे,हटे सिर्फ 50

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भोपाल की लाइफ लाइन बड़ा तालाब के दायरे में आ रहे कुल 347 कब्जों को हटाने में प्रशासनिक अमले की बड़ी लापरवाही सामने आई हैं। ये कब्जे बड़ा तालाब के शहरी हिस्से में FTL यानी, फुल टैंक लेवल से 50 मीटर के दायरे में है। अब तक करीब 50 कब्जे ही हट सकते हैं, जबकि कई रसूखदारों और सरकारी कब्जों पर कार्रवाई नहीं की गई।

बता दें कि बड़ा तालाब पर अतिक्रमण की सारी हदें पार हो चुकी है। अतिक्रमणकारियों ने इसे चारों ओर से अतिक्रमण में जकड़ रखा है। सरकारी रिपोर्ट में ये सामने आ चुके हैं, पर कार्रवाई जमीन पर न होकर फाइलों में ही सिमटी रही।

एनजीटी (नेशनल ग्रीन ट्राइबल) की फटकार के बाद मार्च में अतिक्रमण लिस्टेड किए गए। कुल 347 अतिक्रमण या कब्जे सामने आए। इनमें सरकारी और प्राइवेट दोनों ही जमीनों के कब्जे शामिल हैं। सर्वे के बाद तत्कालीन कलेक्टर कौशलेंद्र विक्रम सिंह के निर्देश पर 15 दिन की टाइम लाइन तय की गई। जिसमें 6 से 21 अप्रैल तक अलग-अलग क्षेत्र में कार्रवाई करना तय हुआ।

बकायदा टीमें बना दी गईं। पुलिस और नगर निगम से को-ऑर्डिनेशन भी हो गया, लेकिन 15 अप्रैल से कार्रवाई थम गईं। वहीं, अब तक जो कार्रवाई हुई, उनमें बड़े कब्जे छोड़ दिए गए।

भोपाल के नए कलेक्टर प्रियंक मिश्रा ने एक दिन पहले गुरुवार को मीडिया से चर्चा में कहा था कि भोज वेटलैंड राजधानी भोपाल की शान है। हमारी जो भी भूमिका है, उसे बेहतर करेंगे। अच्छा काम आगे बढ़ाएंगे और चुनौतियों को दूर करेंगे।

4 दिन में ये हुई कार्रवाई

6 अप्रैल से कार्रवाई करना तय हुआ था। इस दिन भदभदा की झुग्गियों और दुकानों को हटाया गया। 10 अप्रैल को तहसीलदार हर्षविक्रम सिंह की टीम ने हलालपुरा स्थित तालाब किनारे पर कार्रवाई की। एक मैरिज गार्डन के आगे एक फार्म हाउस पर कर्रवाई की गई।

हलालपुरा बस स्टैंड गुलशन गार्डन के पीछे अवैध रूप से बने 25 टीन के शेड व पक्के कमरे, बाउंड्रीवॉल और करबला क्षेत्र में अवैध रूप से बनी टीन की शटर वाली 6 दुकानों को भी जेसीबी के माध्यम से तोड़ा। 13 अप्रैल को सेवनिया गोंड और गौरागांव में कार्रवाई करते कुछ कब्जों की बाउंड्रीवॉल तोड़ दी गई।

अब तक हुई तीन कार्रवाई की 3 तस्वीरें, देखिए…

भदभदा क्षेत्र में 6 अप्रैल को हुई थी कार्रवाई।
भदभदा क्षेत्र में 6 अप्रैल को हुई थी कार्रवाई।
10 अप्रैल को हलालपुरा में कार्रवाई की गई थी।।
10 अप्रैल को हलालपुरा में कार्रवाई की गई थी।।
सेवनिया गोंड, गौरागांव में 13 अप्रैलको बाउंड्रीवॉल समेत पक्के निर्माण तोड़े गए थे।
सेवनिया गोंड, गौरागांव में 13 अप्रैलको बाउंड्रीवॉल समेत पक्के निर्माण तोड़े गए थे।

यहां अब तक कार्रवाई नहीं

11 अप्रैल को बैरागढ़ में काशियाना बंगले के पीछे कार्रवाई करना प्रस्तावित था। वहीं, 15-16 अप्रैल को बैरागढ़-मकान, मैरिज गार्डन सहित निर्माण हटाने और 17 अप्रैल को हुजूर तहसील की सरकारी जमीन से कब्जे हटाए जाने थे, लेकिन चारों दिन प्रशासन ने कार्रवाई नहीं की।

सूत्र बताते हैं कि 12 अप्रैल को कलेक्टर के तबादले के बाद मामला ठंडा हो गया। जिम्मेदार अफसरों ने पुराने कलेक्टर के जाते ही कार्रवाई रोक दी। खास बात ये है कि 15 दिन की कार्रवाई के शेड्यूल में 18-19 अप्रैल को टीटी नगर-शेष कब्जे हटाने, 20 अप्रैल को बैरागढ़ में बचा अतिक्रमण तोड़ने और 21 अप्रैल को हुजूर तहसील की अंतिम कार्रवाई प्रस्तावित है।

इन बड़े अतिक्रमण पर अब तक कार्रवाई नहीं हुई

बड़ा तालाब की हद जानने इनका सीमांकन भी

सूत्रों के अनुसार, वन विहार रोड स्थित होटल रंजीत, होटल टोरकस, अन्नतास गार्डन, लेक हाउस का कुछ हिस्सा आ रहा है। वहीं, मैथलीशरण गुप्ता, कीर्ति जैन, पीएस भटनागर, मोहिनी देवी, बसंत कौर, सौम्या श्रीवास्तव, प्रकाश चंदेल, मुकेश शर्मा आदि के निर्माण भी जद में आ रहे हैं। इसके अलावा बैरागढ़ तहसील क्षेत्र में शामिल बड़ा तालाब का काफी हिस्सा भी जद में है।

भास्कर पड़ताल में देखिए, तालाब की हद में बने आलिशान घर

दैनिक भास्कर ने 200 फीट की ऊंचाई से भोपाल की लाइफ लाइन से खिलवाड़ करने वाले अतिक्रमण को ड्रोन कैमरे में कैद किया। करीब 9 महीने पहले ही एफटीएल से जुड़कर ही एक 2 मंजिला मकान बना दिया गया। इसी में स्वीमिंग पूल भी है। इसे टीटी नगर एसडीएम वृत की टीम ने लिस्टेड किया है।

इन अतिक्रमण की जद में रसूखदारों के साथ-साथ होटल जहांनुमा, सायाजी, वन विहार समेत नगर निगम के सरकारी निर्माण भी हैं। बावजूद अब तक इन्हें नहीं हटाया गया है।

बड़े तालाब के नजदीक स्विमिंग पूल और बंगला।
बड़े तालाब के नजदीक स्विमिंग पूल और बंगला।
तालाब के किनारे लोगों ने प्लॉट काट दिए हैं।
तालाब के किनारे लोगों ने प्लॉट काट दिए हैं।
बड़ा तालाब के कैचमेंट एरिया में फार्म हाउस भी बने हैं।
बड़ा तालाब के कैचमेंट एरिया में फार्म हाउस भी बने हैं।
तालाब के किनारे बनी कॉलोनियां और बढ़ती आबादी।
तालाब के किनारे बनी कॉलोनियां और बढ़ती आबादी।

प्राइवेट के साथ सरकारी अतिक्रमण भी

बता दें कि पिछले महीने हुए सर्वे में प्राइवेट के साथ सरकारी अतिक्रमण भी सामने आए हैं। एफटीएल के 50 मीटर के दायरे में सैर सपाटा, बोट क्लब, विंड एंड वेव्स होटल और वन विहार का कुछ हिस्सा भी आ रहा है।

इन जगहों पर ज्यादा अतिक्रमण

बैरागढ़ सर्किल में 220 अतिक्रमण हैं। टीटी नगर में 127 अतिक्रमण चिह्नित कर नोटिस जारी किए जा चुके हैं। इनमें 59 निजी और 78 सरकारी शामिल हैं। प्रशासन ने सेवनिया गोंड, प्रेमपुरा सहित अन्य क्षेत्रों में भी सीमांकन किया था।

वन विहार के पास जॉक रेस्टोरेंट, लहर रेस्टोरेंट, विंड्स एंड वेब, होटल रंजीत लेकव्यू, फूड जोन की 26 दुकानें, गेम जोन, कचरा कैफे, सुलभ कॉम्प्लेक्स और लहर जिम सहित अन्य निर्माण शामिल हैं।एक्सपर्ट राशिद नूर ने बताया, शहरी सीमा में 50 मीटर और ग्रामीण सीमा में 250 मीटर के दायरे में कोई निर्माण नहीं होना चाहिए, लेकिन एफटीएल मुनार से सटकर ही पक्के निर्माण बना दिए गए हैं।

सिलसिलेवार जानिए, अब तक क्या हुआ…

पहला सर्वे: साल 2016 में डीजीपीएस सर्वे, पर रिपोर्ट सामने नहीं आई

साल 2016 में नगर निगम ने डीजीपीएस (डिफरेंशियल ग्लोबल पोजिशनिंग सिस्टम) सर्वे कराया था। यह जमीन का सटीक माप करने की तकनीक है, जो जीपीएस की तुलना में ज्यादा जानकारी सामने लाती है। जमीन की सीमा, आकार का सटीक डेटा इकट्ठा करती है।

इस सर्वे में बड़ा तालाब का क्षेत्र 38.72 वर्ग किमी बताया गया था, जबकि पहले यह एरिया 32 वर्ग किमी माना जाता था। इसकी रिपोर्ट में तालाब के एफटीएल के को-ऑर्डिनेट्स दर्ज हैं। इन को-ऑर्डिनेट्स के आधार पर धरातल पर भी सीमाएं तय की जा सकती हैं।

तालाब की सीमा में आ रही निजी जमीन के मालिकाना हक का भी निर्धारण हो सकता है, लेकिन यह रिपोर्ट निगम की फाइलों में दबकर रह गई। रिपोर्ट का आज तक खुलासा नहीं हो सका।

बड़ा तालाब रामसर साइट घोषित है। यहां दुर्लभ पक्षियों का बसेरा भी है।
बड़ा तालाब रामसर साइट घोषित है। यहां दुर्लभ पक्षियों का बसेरा भी है।

दूसरा सर्वे: 141 मुनारें ही गायब हो गईं

इसी साल एनजीटी ने बड़े तालाब का सर्वे करने के निर्देश दिए थे। इसमें 943 में से 802 मुनारें ही मिली थीं। इसमें भी 337 मुनारें पानी के भीतर डूबी हुईं थीं, यानी उन्हें एफटीएल से पहले ही लगाया गया था। 141 मुनारें मौके से गायब थीं, लेकिन इसके बाद मुनारें दोबारा लगाने और अतिक्रमण रोकने की कोई ठोस पहल नहीं हुई।

सूरज नगर के पास तालाब में सीवेज बहता दिखाते एक्सपर्ट।
सूरज नगर के पास तालाब में सीवेज बहता दिखाते एक्सपर्ट।

तीसरा सर्वे: सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर सर्वे हुआ, रिपोर्ट का अता-पता नहीं

इस साल सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद सर्वे किया गया। जिला प्रशासन ने मप्र झील संरक्षण प्राधिकरण के साथ मिलकर सर्वे किया, लेकिन इसकी रिपोर्ट का कोई अता-पता नहीं है।

ये रिपोर्ट अब तक सामने नहीं आई है। न ही सरकार के किसी दस्तावेज में यह जिक्र आया है कि इस सर्वे का क्या हुआ? एक मोबाइल ऐप पर इसकी रिपोर्ट दर्ज होने की बात कही जाती है। जब तक यह दस्तावेज में नहीं आएगा तब तक धरातल पर सीमांकन नहीं हो सकता।

सांसद आलोक शर्मा बड़ा तालाब के अतिक्रमण और मास्टर प्लान बनाने की बात कह चुके हैं।
सांसद आलोक शर्मा बड़ा तालाब के अतिक्रमण और मास्टर प्लान बनाने की बात कह चुके हैं।

6 महीने पहले CM दे चुके निर्देश, सांसद ने कहा-मास्टर प्लान बने

बड़ा तालाब को लेकर सरकार तो गंभीर है, लेकिन जिम्मेदार अधिकारियों की लापरवाही सामने आ रही है। करीब छह महीने पहले सीएम डॉ. मोहन यादव ने तालाब के आसपास के अतिक्रमण का नए सिरे से सर्वे करने के निर्देश नगरीय आवास एवं विकास विभाग की बैठक में दिए थे।

वहीं, कुछ समय पहले भोपाल सांसद आलोक शर्मा ने बड़ा तालाब का मास्टर प्लान बनाने की पैरवी की थी। कहा था कि मास्टर प्लान बनने से तालाब को सुरक्षित किया जा सकेगा। बड़ा तालाब के 50 मीटर के दायरे में 1300 से ज्यादा अतिक्रमण सामने आया था।

भदभदा बस्ती से सैकड़ों घर दो साल पहले ही तोड़े गए थे। अतिक्रमण के नाम पर यही बड़ी कार्रवाई की गई है।
भदभदा बस्ती से सैकड़ों घर दो साल पहले ही तोड़े गए थे। अतिक्रमण के नाम पर यही बड़ी कार्रवाई की गई है।

10 साल में सिर्फ 1 बड़ी कार्रवाई, महीनों तक विस्थापन नहीं

करीब दो साल पहले भदभदा झुग्गी बस्ती से कुल 386 घरों को हटाया गया था। एनजीटी ने कार्रवाई के आदेश दिए थे। बड़ा तालाब के कैचमेंट एरिया में अतिक्रमण की 10 साल में यही बड़ी कार्रवाई थी। इसके बाद प्लान बने, लेकिन जमीन पर नहीं आए।

 

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