बसों की टैक्स चोरी में EOW डीजी से जवाब मांगा

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यात्री बसों की टैक्स चोरी के मामले में दर्ज एफआईआर को लेकर मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW) की कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं। कोर्ट ने आश्चर्य जताते हुए कहा कि टैक्स नहीं चुकाने के मामले में सीधे भ्रष्टाचार से जुड़ी धाराओं में एफआईआर कैसे दर्ज कर ली। मामले में कोर्ट ने आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ के डीजी से जवाब तलब किया है। अगली सुनवाई 17 मार्च को होगी।

मामले की बुधवार को सुनवाई करते हुए जस्टिस विवेक अग्रवाल एवं जस्टिस आरसीएस बिसेन की डिवीजन बेंच ने ईओडब्ल्यू के डीजी और उनके लीगल एडवाइजर को व्यक्तिगत हलफनामे के साथ जवाब प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने कहा कि उन्हें यह भी बताना होगा कि टैक्स वसूली से जुड़े मामले में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धाराओं में प्रकरण कैसे दर्ज किया गया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि अगली सुनवाई से पहले शपथ पत्र प्रस्तुत नहीं किया गया तो दोनों अधिकारियों की व्यक्तिगत उपस्थिति के आदेश दिए जाएंगे।

करीब 13 दिन पहले ईओडब्ल्यू जबलपुर की टीम ने यात्री बसों की टैक्स चोरी के मामले में डिंडोरी जिले के बस संचालक संजय केशवानी और साधना केशवानी के साथ ही जिला परिवहन कार्यालय डिंडोरी के (वर्तमान में नरसिंहपुर में पदस्थ) लिपिक पुष्प कुमार प्रधान के खिलाफ एफआईआर दर्ज की थी। मामला करीब 9 करोड़ रुपए की टैक्स चोरी से जुड़ा बताया गया है।

टैक्स दिए बगैर परमिट और फिटनेस प्रमाण पत्र जारी

ईओडब्ल्यू को भोपाल से शिकायत मिली थी कि संजय और साधना केशवानी के नाम पर पंजीकृत यात्री बसों पर भारी टैक्स बकाया होने के बावजूद उन्हें परमिट और फिटनेस प्रमाण पत्र जारी किए गए। दोनों के नाम पर 16 बसें पंजीकृत थीं, जो डिंडोरी, जबलपुर, शहडोल, मंडला और बालाघाट जिलों में रजिस्टर्ड थीं। इन बसों का संचालन डिंडोरी-जबलपुर, डिंडोरी-बम्हनी, बिछिया-डिंडोरी और अमरकंटक-मलाजखंड मार्गों पर किया जा रहा था।

2006 से 2025 तक टैक्स जमा नहीं किया

जांच में सामने आया कि 16 में से कई बसों का वर्ष 2006 से 2025 तक का टैक्स जमा नहीं किया गया था। वाहन मालिकों ने बसों को कबाड़ में बेच देने की सूचना परिवहन कार्यालय को देने के बाद वर्ष 2006 से टैक्स भुगतान बंद कर दिया था।

लिपिक पर फाइलें गायब करने का आरोप

बताया गया कि वर्ष 2017 में जिला परिवहन कार्यालय डिंडोरी ने टैक्स वसूली की प्रक्रिया शुरू की थी। इसी दौरान लिपिक पुष्प कुमार प्रधान पर बसों से जुड़ी टैक्स फाइलें गायब करने का आरोप लगा। फाइलें गुम होने के कारण परिवहन विभाग बकाया वसूली नहीं कर सका, जिससे शासन को लगभग 9 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ। ईओडब्ल्यू के अनुसार बस संचालकों और परिवहन विभाग के कर्मचारी के बीच आपराधिक षड्यंत्र रचा गया और कुछ वाहनों को बिना अनुमति नष्ट कर दिया गया।

हालांकि बस संचालकों ने ईओडब्ल्यू की कार्रवाई को हाईकोर्ट में चुनौती दी है। याचिका में कहा गया है कि बसों के टैक्स बकाया की वसूली मोटरयान कराधान अधिनियम के प्रावधानों के तहत की जा सकती है। आरटीओ डिंडोरी द्वारा टैक्स डिमांड नोटिस जारी किया गया था, जिसे याचिकाकर्ताओं ने चुनौती दी है। इसके बावजूद ईओडब्ल्यू ने कथित रूप से फर्जी शिकायत के आधार पर एफआईआर दर्ज कर ली।

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