दलित बेटी अंजना की मौत में पूर्वमंत्री भूपेन्द्र सिंह की संलिप्तता संदिग्ध*

*आखिर कब तक मध्यप्रदेश में भाजपा पोषित नेताओं के प्रभाव का शिकार होती रहेंगी दलित समाज की बेटियां*
*दलित बेटी अंजना की मौत में पूर्वमंत्री भूपेन्द्र सिंह की संलिप्तता संदिग्ध*
*सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में भूपेन्द्र सिंह ने नहीं की थी दलित वर्ग की बेटी की मदद*
*विजया पाठक, एडिटर, जगत विजन*
दलित बंधुओं को खुद का हितैषी बताने वाली केंद्र की नरेन्द्र मोदी और राज्य की मोहन यादव की सरकार के सभी वायदे दिन-प्रतिदिन खोखले साबित होते जा रहे हैं। आये दिन जिस तरह से मध्यप्रदेश में दलित वर्ग के लोगों के साथ आपराधिक घटनाएं हो रही हैं उन्हें देखकर तो ऐसा लगता है कि अब रक्षक ही भक्षक बनते जा रहे हैं। जिन्हें जनता ने अपनी सुरक्षा के लिये चुनकर संसद और विधानसभा में भेजा हैं वहीं अब जनता की रखवाली करने के बजाय उनकी जान लेने की कोशिश कर रहे हैं। ताजा मामला मध्यप्रदेश के सागर जिले का है जहां हाल ही में एक गरीब दलित परिवार की बेटी को अपनी जान से हाथ धोना पड़ा। यह वही सागर जिला है जहां कुछ दिन पूर्व ही प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी संत रविदास की स्मृति में तैयार हो रहे लोक का भूमिपूजन करने पहुंचे थे। आज वही बुंदेलखंड की भूमि एक दलित समाज की बेटी के खून से सिंचित हो गई है। समझ ही नहीं आ रहा कि आखिर मध्यप्रदेश में कब तक कमजोर वर्ग के लोगों पर इस तरह के जुल्म होते रहेंगे, कब तक यह लोग खुद को सुरक्षित महसूस करेंगे। और सबसे बड़ा सवाल तो यह है कि आखिर कब तक सत्ता के नशे में चूर नेता और कार्यकर्ता मंत्रियों के संरक्षण में इन मासूमों की असमत से खिलवाड़ करते रहेंगे।
*एक वर्ष पहले हुई थी मृतक के भाई की हत्या*
सागर में बीते साल अगस्त 2023 में नितिन अहिरवार उर्फ लालू नाम के एक दलित युवक की हत्या हुई थी। मृतक युवक की बहन अंजना अहिरवार ने पुलिस थाने में इस मामले में केस दर्ज कराया था। 2023 चुनावी वर्ष था, विधानसभा के चुनाव होने थे। ऐसे मौके पर दलित राजनीति का मौका हाथ लगा तो कांग्रेस नेता मृतक के गांव में सरकार के खिलाफ धरना देने पहुंच गए। मामला सुर्खियों में आ गया। लालू की हत्या के तीन गवाह थे… एक उसका चाचा राजेंद्र, दूसरी बहन अंजना और तीसरी उसकी मां। हाल ही में अंजना के चाचा की भी दबंगों ने पीट-पीटकर हत्या कर दी। हैरान करने वाली बात ये है कि चाचा का शव ले जा रही दलित युवती अंजना अहिरवार की भी एंबुलेंस से गिरकर मौत हो गई। जिस तरीके से युवती के भाई और चाचा की हत्या की गई, उससे इस अफवाह को भी बल मिल रहा है कि युवती की भी हत्या की गई है। पुलिस का कहना है कि युवती की मौत एंबुलेंस से गिरकर ही हुई है। घटना के वक्त युवती के परिजन भी साथ ही थे। मध्यप्रदेश का ये दलित परिवार अब किससे न्याय की उम्मीद करे। उस डर की कल्पना भी नहीं की जा सकती, जिसने अपने परिवार के 03 सदस्यों को 09 महीने के भीतर खो दिया। जबकि पहला ही मामला देश में खूब चर्चा में रहा। अपराधियों के हौंसले कितने बुलंद रहे होंगे कि पहले से ही चर्चित हत्याकांड में उन्होंने दूसरी हत्या कर दी। कहानी कुछ अजीब है लेकिन सच है। मामले में हर बार की तरह सियासत तेज हो गई है। सत्ता और विपक्ष एक दूसरे से ही सवाल कर रहे हैं लेकिन क्या ये सवाल दलित परिवार के साथ न्याय कर पाएंगे।
*भूपेन्द्र सिंह के इशारे पर दलित बेटे की कर दी थी हत्या।*
अगस्त 2023 में सागर जिले में एक दलित युवक की पीट-पीटकर हत्या कर दी गई। उसकी मां को निर्वस्त्र कर घुमाया गया। इस घटना से पूरे प्रदेश में जनता ने खूब गुस्सा दिखाया। सूत्रों के अनुसार यह पूरी घटना को पूर्व मंत्री भूपेन्द्र सिंह के इशारे पर अंजाम दिया गया। इस बीच राजनीतिक दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया। अब युवक के चाचा की हत्या और बहन की संदिग्ध मौत पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। पूरे मामले में कांग्रेस ने प्रदेश की मोहन सरकार को घेरा है। कांग्रेस का आरोप है कि मध्य प्रदेश में दलित होना गुनाह हो गया है। मध्यप्रदेश सरकार के पूर्वमंत्री व शिवराज सिंह चौहान के करीबी मंत्रियों में शामिल भूपेन्द्र सिंह को इस पूरी घटना का मास्टर माइंड बताया जा रहा है। सोशल मीडिया में जारी एक वीडियो में साफ दिखाई पड़ रहा है कि भूपेन्द्र सिंह से मृतका ने अपने भाई की मौत के साजिशकर्ताओं के खिलाफ एफआईआर दर्ज करवाने की गुहार लगाई थी, लेकिन मंत्री जी ने उसे नकार दिया और उसे बंगले से बाहर निकालने के लिये कहा। खास बात यह है कि जिस समय भूपेन्द्र सिंह से मृतका गुहार लगाने पहुंची थी उस समय भूपेन्द्र सिंह मंत्री पद पर थे और उनकी आंखें भ्रष्टाचार, अनाचार रूपी पट्टी से पूरी तरह बंद थी। अब जब मंत्री पद चला गया तो भूपेन्द्र सिंह मुख्यमंत्री मोहन यादव के साथ उस दलित परिवार के घर पहुंचकर उन्हें ढंढास बंधाने का ढोंग करते दिखाई दिये। सवाल यह है कि क्या मोहन सरकार भूपेन्द्र सिंह की संलिप्तता पर जांच बैठाएगी, या इस पूरे मामले को एसटीएफ को सौंपा जायेगा। अगर ऐसा मोहन सरकार द्वारा कदम उठाया जाता है और भूपेन्द्र सिंह को दोषी पाने पर कार्यवाही की जाती है तो यह दलित समुदाय के लिये भाजपा सरकार का बड़ा संदेश होगा।
*पहले भी कई घटनाओं को अंजाम दिला चुके हैं भूपेन्द्र सिंह*
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जंगलराज में सरेआम कानून की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। बेटियों का उत्पीड़न हो रहा है और समझौता न करने पर आपकी पार्टी के लोग हत्या करवा रहे हैं। आपने देश को बेटियों के लिए सबसे ज्यादा असुरक्षित बना दिया है। चर्चा इस बात को लेकर भी है कि सागर जिले के खुरई में विधानसभा क्षेत्र में पिछले 10 सालों के दौरान जो भी बड़ी दलित समुदाय के लोगों के साथ घटनाएं हुई हैं उनमें प्रमुख हाथ भूपेन्द्र सिंह का है। भूपेन्द्र सिंह किसी भी तरह से अपना प्रभाव कम नहीं होने देना चाहते हैं और उन्हें इस बात का भय है कि अगर कमजोर वर्ग के लोग पढ़ लिख गये तो आने वाले समय में उनका प्रभाव बढ़ जायेगा और मंत्री जी का प्रभाव कम होगा। यही कारण है कि वे इस तरह की घटनाओं को पिछले 10 सालों से अंजाम दे रहे हैं।
*कमलनाथ ने साधा निशाना*
पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने बीजेपी पर मामले में संलिप्तता का आरोप लगाया। उन्होंने कहा ‘मध्यप्रदेश के सागर जिले के ग्राम बरोदिया नोनागिर में दलित युवती अंजना अहिरवार द्वारा छेड़छाड़ की शिकायत से खिन्न गुंडों ने युवती के भाई नितिन अहिरवार की पिछले वर्ष अगस्त माह में हत्या कर दी थी। हत्या में बीजेपी नेताओं की संलिप्तता सामने आई थी। हत्या के बाद पीड़ित परिवार पर समझौते के लिए लगातार दबाव बनाया जा रहा था। पीड़ित परिवार समझौते के लिये तैयार नहीं हुआ तो दो दिन पूर्व पीड़िता के चाचा राजेंद्र अहिरवार की भी हत्या कर दी गई।
*दलित के साथ यह घटना दोहरे चरित्र का प्रमाण है*
मध्य प्रदेश के सागर में जहां अभी हाल ही में पीएम नरेंद्र मोदी ने संतगुरु रविदास जी का स्मारक बनाने की नींव बड़े तामझाम से रखी, उसी क्षेत्र में उनके भक्तों के साथ जुल्म-ज्यादती चरम सीमा पर है, जो भाजपा और उनकी सरकार के दोहरे चरित्र का जीता-जागता प्रमाण है। खुरई विधानसभा क्षेत्र में पूर्व मंत्री भूपेन्द्र सिंह के गुर्गे दलित लड़की के साथ छेड़छाड़ के बाद राजीनामा न करने पर युवक की पीटकर हत्या कर देते हैं। मां को निर्वस्त्र कर हाथ तोड़ देते हैं। बहन के साथ मारपीट कर घर को ढहा देते हैं। इस प्रकार की क्रूर जातिवादी घटनाओं की जितनी भी निंदा की जाए वह कम है। मध्यप्रदेश सरकार में ऐसी और भी जघन्य घटनाएं लगातार होती रही हैं, किंतु न तो भाजपा और न ही उनकी सरकार इसकी रोकथाम के लिए गंभीर नजर आती है। यह अति दु:खद, निंदनीय और चिंतनीय है।
*इस घटना ने अनेक घटनाओं को जिंदा कर दिया*
दलित वर्ग के युवा-युवतियों के साथ अभद्रता आये दिनों की बात है। फिर चाहे वह इंदौर में दलितों को बंधक बनाकर घंटों पिटाई करने का मामला हो या शिवपुरी जिले का मैला खिलाने का मामला। इन वीडियो ने न सिर्फ मानवता को शर्मसार किया है बल्कि आजादी के इतने सालों बाद भी भारत में दलितों के साथ हो रहे भेदभाव पर एक तीखी बहस छेड़ दी है। कुछ दिन पहले ही छतरपुर जिले के महाराजपुर थाना इलाके के विकोरा गांव के एक बुजुर्ग को गिरफ्तार किया गया। आरोप है कि उसने एक दलित युवक के शरीर और मुंह पर मैला फेंका।
*दलितों के साथ अपराध में मध्यप्रदेश आगे*
मध्यप्रदेश में एक महीने में दलित-आदिवासी अत्याचार की दूसरी बेहद निंदनीय और पीड़ादायक वारदात हुई है, जो मानवता को शर्मसार करने वाली है। एनसीआरबी रिपोर्ट 2021 के मुताबिक बीजेपी शासित मध्यप्रदेश में दलितों के खिलाफ अपराधों का रेट सबसे ज्यादा है। आदिवासियों के खिलाफ सबसे ज्यादा अपराध हुआ हैं, हर दिन 07 से ज्यादा अपराध हुए। मध्यप्रदेश के हमारे दलित, आदिवासी और पिछड़े वर्ग के नागरिक दशकों से भाजपाई कुशासन में अपमान का घूंट पी रहे हैं।
*क्या कहते हैं आंकड़े*
नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो ने साल 2021 में दलितों के साथ हो रहे अपराध को लेकर एक डाटा जारी किया था। जिसके अनुसार अनुसूचित जाति के खिलाफ सबसे ज्यादा अपराध होने वाले राज्यों की लिस्ट में पहले स्थान पर मध्यप्रदेश है। 2020 के डाटा के अनुसार भी मध्यप्रदेश ही पहले स्थान पर था। जबकि 2019 में दलितों के साथ सबसे ज्यादा अपराध किए जाने वाले राज्यों की लिस्ट में पहले स्थान पर राजस्थान था और मध्यप्रदेश दूसरे स्थान पर है। आंकड़ों के अनुसार मध्यप्रदेश में साल 2018 से लेकर साल 2021 के बीच दलितों पर हुए अपराधों के दर्ज मामलों को देखें तो इन तीन सालों में 51.7% मामलों की वृद्धि हुई है। साल 2021 में भारत में अनुसूचित जाति के खिलाफ 50,900 अपराध की घटनाएं हुईं थी। जबकि केवल मध्यप्रदेश में 7,214 दलितों के साथ अपराध की घटना हुई। वहीं एससी/एसटी अत्याचार निवारण अधिनियम के दलितों के साथ हुए अपराधों की संख्या देखें तो देश भर में में 45,610 और मध्यप्रदेश में 7,211 घटनाएं हुई थी। प्रदेश में एक लाख आबादी पर 63 से ज्यादा अपराध अनुसूचित जातियों पर हो रहे हैं।
