जहां से मकान तोड़कर हटाया था, वहीं फिर से रहवासियों ने डेरा जमाना शुरू किया

भदभदा बस्ती से हटाए गए रहवासियों ने यहां पर दोबारा अपना डेरा जमाना शुरू कर दिया है। यह स्थिति जिम्मेदारों की ओर से स्थिति स्पष्ट नहीं किए जाने के कारण बन रही है। दरअसल, फरवरी में यहां 386 मकानों को हटाया गया था। तब जिम्मेदारों ने इन्हें हाउसिंग फॉर ऑल के तहत बनाए जा रहे मकान देने का आश्वासन दिया था।
लेकिन अब तक इन लोगों को मकान नहीं मिले हैं। यही वजह है कि यह लोग हफ्तेभर से हररोज यहां आकर बैठते हैं। सोमवार को तीन डंपर काली मिट्टी लेकर यहां पहुंचे थे, लेकिन यहां भारी तादाद में जुटे झुग्गी बस्तियों के रहवासियों ने इन डंपर को खाली नहीं होने दिया। लोगों का विरोध देखते हुए डंपर बिना मिट्टी खाली किए ही वापस लौट गए।
मालीखेड़ी मल्टी में रहने से किया इंकार
इससे पहले शुक्रवार को भी कुछ डंपर यहां से मलबा उठाने पहुंचे थे, लेकिन रहवासियों ने इनको मलबा भी नहीं उठाने दिया था। यहां विरोध जैसे हालात बने तो क्षेत्रीय एसडीएम अर्चना शर्मा मौके पर पहुंची थीं। उन्होंने रहवासियों और नगर निगम के जिम्मेदारों को सोमवार को चर्चा के लिए बुलाया था। इस दौरान लोगों को विदिशा रोड पर मालीखेड़ी में बन रही मल्टी में मकान देने की बात कही। लेकिन रहवासियों का तर्क है कि वे इतनी दूर गए तो उनके कामधंधे छूट जाएंगे। ऐसे में उन्होंने वहां जाने से ही इनकार कर दिया।
अब आला अधिकारियों से लेंगे राय
रहवासी कलखेड़ा में बन रहे मकान देने की मांग कर रहे हैं। जब तक मकान नहीं बनते आसपास जमीन देकर अस्थाई विस्थापन करने की मांग है। इस संबंध में एसडीएम शर्मा का कहना है कि कलखेड़ा में तो अभी मकान बनना शुरू भी नहीं हुए हैं। वहां मकान देने और अस्थाई विस्थापन के संबंध में आला अधिकारियों से बात करेंगे इसके बाद भी कुछ भी निर्णय हो पाएगा।
