इस साल 3 गुना ज्यादा हीटवेव; क्यों बदला पैटर्न, कब आएगी राहत की फुहार

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श के कई राज्य गर्मी से उबल रहे हैं। पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़, दिल्ली, UP, गुजरात और राजस्थान में 17 मई से लगातार हीटवेव की स्थिति बनी हुई है। नॉर्थ-वेस्ट और सेंट्रल इंडिया में अगले 4-5 दिन अधिकतम तापमान सामान्य से 2-3 डिग्री ऊपर रहने की आशंका है।

मौसम विभाग के अनुसार पूरे मई 2024 में मध्य प्रदेश, राजस्थान, महाराष्ट्र और गुजरात में 8 से 11 दिन तक हीटवेव की स्थिति रहेगी। आमतौर पर यहां मई में 2-3 दिन ही हीटवेव चलती है। 1901 के बाद 2024 दूसरा ऐसा साल है, जब इतनी भीषण गर्मी पड़ रही है। 21 मई को दिल्ली से सटे नजफगढ़ में रिकॉर्ड 47.8 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज किया गया।

गर्मी के कहर से परेशान लोग सोच रहे हैं कि राहत कब मिलेगी, जून में हीटवेव की स्थिति क्या रहेगी और क्या इस बार गर्मी का ट्रेंड बदला है? भास्कर एक्सप्लेनर में ऐसे ही 8 जरूरी सवालों के जवाब जानेंगे…

सवाल 1: देश में भयंकर गर्मी और हीटवेव का सबसे ज्यादा असर कहां दिख रहा है?
जवाब
: बीते दो दिनों से हरियाणा, दिल्ली, पंजाब, पश्चिमी उत्तर प्रदेश, राजस्थान, मध्य प्रदेश के पश्चिमी हिस्से और गुजरात में तापमान 43 डिग्री से 47 डिग्री सेल्सियस तक रहा है। वहीं, छत्तीसगढ़, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और बिहार के भी ज्यादातर हिस्सों में तापमान 40 डिग्री से 42 डिग्री के रिकॉर्ड किया गया। पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, सौराष्ट्र और राजस्थान जैसे क्षेत्रों में 5-6 दिनों से लगातार हीटवेव चल रही है।

सवाल 2: अगले तीन दिनों में मौसम का क्या मिजाज रहेगा, क्या गर्मी से कुछ राहत मिलेगी?
जवाब
: मौसम वैज्ञानिक आरके जेनामनी का कहना है कि IMD ने फिलहाल 24 मई तक के लिए मौसम का अनुमान लगाया है। 24 मई तक पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़, दिल्ली, पश्चिमी उत्तर प्रदेश, पूर्वी राजस्थान, जम्मू, हिमाचल प्रदेश, ओडिशा, गुजरात में हीटवेव चलेगी। हीटवेव को लेकर मौसम विभाग 5 से 7 दिनों का ही अनुमान लगाता है।

सवाल 3: देश में भीषण गर्मी से कब तक राहत मिलने की संभावना है?
जवाब
: मौसम वैज्ञानिक आरके जेनामनी का कहना है कि हीटवेव या गर्मी से तभी राहत मिलती है, जब बारिश हो। मानसूनी हवा देश के जिस-जिस हिस्से से मूव करती है, वहां हीटवेव और गर्मी से राहत मिलती है।

20 जून के आस-पास मानसूनी हवा मध्य प्रदेश, राजस्थान, दिल्ली या आसपास के राज्यों में पहुंचती है। कई बार मानसूनी हवा कुछ दिन लेट भी पहुंचती है।

IMD का अनुमान था कि इस बार मई में दिल्ली, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, मध्य प्रदेश, पंजाब, छत्तीसगढ़, गुजरात, महाराष्ट्र, गोवा, कर्नाटक, केरल, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, ओडिशा, पश्चिम बंगाल में सामान्य से ज्यादा हीटवेव चलेगी। मतलब साफ है कि इस महीने हीटवेव प्रोन स्टेट (हीटवेव से सबसे ज्यादा प्रभावित राज्य) में राहत मिलने की संभावना काफी कम है।

IMD रायपुर की मौसम वैज्ञानिक डॉ गायत्री वाणी कंचिभोटला ने बताया कि अलनीनो की वजह से अगले महीने देश के ज्यादातर हिस्से में 10 से 20 दिन तक हीटवेव चलने की आशंका है। आमतौर पर इतने समय में 4 से 8 दिन ही हीटवेव चलती हैं। अगर छत्तीसगढ़ की बात करें तो यहां मई 2024 में 2-4 दिन हीटवेव रहने की आशंका है।

सवाल 4: आमतौर पर भारत में गर्मी का मौसम कब से कब तक रहता है?
जवाब
: देश में गर्मी के मौसम को तीन हिस्सों में बांटा जा सकता है…

1. प्री समर सीजन: मार्च और अप्रैल तक गर्मी की शुरुआत होती है। अप्रैल के पहले सप्ताह से लू चलने के साथ ही गर्मी की शुरुआत मानी जाती है।

2. पीक समर सीजन: मई और मध्य जून में गर्मी पीक पर होता है। इस समय सूर्य भूमध्य रेखा से कर्क रेखा की ओर बढ़ता है, जिससे पूरे देश में गर्मी तेजी से बढ़ने लगती है।

3. पोस्ट समर सीजन: जून के आखिरी सप्ताह से गर्मी थोड़ी कम होने लगती है। जैसे-जैसे मानसूनी हवाएं देश के एक हिस्से से दूसरे हिस्से में जाती है, लोगों को गर्मी से राहत मिलती है। कई बार मानसून चक्र में बदलाव की वजह से जुलाई महीने में भी भीषण गर्मी पड़ती है।

सवाल 5: क्या इस साल भीषण गर्मी यानी हीटवेव जल्दी आ गई, तापमान में कैसे बदलाव आया?
जवाब
: नहीं, IMD के मौसम वैज्ञानिक आरके जेनामनी के मुताबिक पिछले साल और उससे पहले भी देश के कुछ हिस्से में अप्रैल महीने से हीटवेव चलनी शुरू हो गई थी। इस बार फर्क सिर्फ इतना है कि पिछले साल से 3 गुना ज्यादा हीटवेव देश के अलग-अलग राज्यों में चल रही है।

IMD के महानिदेशक मृत्युंजय महापात्र के अनुसार, इस बार देश में दो वजहों से एक्सट्रीम हीटवेव और तापमान में बदलाव देखने को मिल रहा है…

1. इस साल अलनीनो एक्टिव होने का असर है। इसकी वजह से प्रशांत महासागर की सतह पर बहने वाली हवा और पानी के पैटर्न में बदलाव हो जाता है। भारत में हिंद महासागर और अरब सागर की ओर से आने वाली मानसूनी हवाएं कमजोर होती है। इससे भयानक सूखा या तेज गर्मी पड़ती है।

अलनीनो का असर किसी साल ज्यादा होता है तो किसी साल कम, लेकिन हर बार मानसून पर इसका बुरा ही असर पड़ता है। इस साल हीटवेव और ज्यादा गर्मी पड़ने की एक वजह इसे भी माना जा रहा है।

2. दूसरी वजह यह भी है कि दक्षिण भारत के राज्य आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, केरल, तमिलनाडु और तेलंगाना के ऊपर एंटी साइक्लोन सिस्टम एक्टिव है। जमीन से करीब तीन किलोमीटर की ऊंचाई पर एक्टिव यह सिस्टम करीब 1000 KM से 2000 KM तक फैला है।

यह एंटी साइक्लोन गर्म होकर ऊपर उठने वाली हवा को वापस जमीन की तरफ धकेलता है। इसकी वजह से देश के कई राज्यों में हीटवेव की परिस्थिति बनी है।

सवाल 6: हीटवेव क्या है और IMD इसकी घोषणा कब करता है?
जवाब
: IMD के मौसम वैज्ञानिक आरके जेनामनी के मुताबिक, जब किसी क्षेत्र में तापमान सामान्य से ज्यादा हो जाए और वहां तेज लू चलने लगे तो उसे हीटवेव माना जाता है। इतनी ज्यादा लू लगातार दो या ज्यादा दिन तक रह सकती है। हीटवेव के लिए फिक्स तापमान अलग-अलग देशों के लिए अलग-अलग हो सकता है।

IMD के मुताबिक, आमतौर पर देश में हीटवेव तब चलती है जब मैदानी इलाकों में तापमान 40 डिग्री सेल्सियस, समुद्र तटीय इलाकों में 37 डिग्री सेल्सियस और पहाड़ी इलाकों में 30 डिग्री सेल्सियस या इससे ज्यादा हो जाए।

किसी क्षेत्र में तापमान, सामान्य से 4.5 डिग्री सेल्सियस ज्यादा होने पर हीटवेव और 6.4 डिग्री सेल्सियस ज्यादा होने पर सीवियर हीटवेव कहलाती है।

सवाल 7: हीटवेव प्रोन स्टेट यानी हीटवेव से सबसे ज्यादा प्रभावित राज्य कौन से हैं, वहां इस बार क्या स्थिति है?
जवाब: मौसम विभाग ने देश के 13 प्रदेशों को हीटवेव प्रोन स्टेट माना है। इस लिस्ट में राजस्थान, पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़ , दिल्ली, पश्चिम मध्य प्रदेश , उत्तर प्रदेश , छत्तीसगढ़, ओडिशा, महाराष्ट्र में विदर्भ, गंगा के तटवर्ती पश्चिम बंगाल के कुछ हिस्से, तटीय आंध्र प्रदेश और तेलंगाना शामिल हैं।

आमतौर पर कोर हीटवेव जोन यानी CHZ में मार्च से जून तक भीषण गर्मी पड़ती है। कई बार जुलाई महीने में भी हीटवेव और लू चलने की आशंका है। इस बार यहां अप्रैल में ही हीटवेव का रिकॉर्ड टूट गया था।

इस साल अप्रैल में पश्चिम बंगाल में बीते 15 साल में और ओडिशा में बीते 9 साल में हीटवेव वाले दिनों की संख्या सबसे ज्यादा रही। ओडिशा में भी साल 2016 के बाद से अब तक इस साल अप्रैल में सबसे ज्यादा 16 दिन तक हीटवेव चली।

दक्षिण भारत में अप्रैल का औसतन अधिकतम तापमान 31 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो 123 साल के बाद दूसरा सबसे अधिक तापमान था। पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत में अप्रैल का औसत न्यूनतम तापमान 22 डिग्री सेल्सियस रहा। ये भी 1901 के बाद से सबसे अधिक था।

अब एक ग्राफिक्स के जरिए जानिए पिछले साल से कितना ज्यादा इस साल अप्रैल महीने में हीटवेव चली है…

सवाल 8: दुनिया में औसत से ज्यादा हीटवेव चलने या गर्मी बढ़ने से क्या असर होता है?
जवाब: गर्मी ज्यादा बढ़ने का असर कुछ इस तरह से देखने को मिलता है…

वाटर क्राइसिस: हीटवेव की वजह से आंध्र प्रदेश और कर्नाटक जैसे दक्षिणी राज्य, जल भंडारण में भारी कमी का सामना कर रहे हैं और बेंगलुरु जैसे शहर गंभीर जल संकट से जूझ रहे हैं। बेंगलुरु जल निगम ने शहर में 257 जगहों को ड्राई स्पॉट बताकर, कहा है कि वहां पीने के पानी की भी भारी किल्लत है।

मौसम के पैटर्न में हुए बदलाव की वजह से देश के 150 से ज्यादा प्रमुख वाटर रिजर्वायर में पानी कुल स्टोरेज क्षमता से 30% तक कम हो गया है।

पूर्वी और दक्षिणी भारत में गर्मी की वजह से सबसे तेजी से जल स्तर घट रहा है। केंद्रीय जल आयोग के मुताबिक देश के पूर्वी और दक्षिणी क्षेत्रों के वाटर रिजर्वायर में जल स्तर गिरकर क्रमश: 39% और 17% रह गया है।

फसलों पर असर: मौसम विभाग ने पिछले महीने चेतावनी जारी की थी कि अप्रैल से जून के दौरान देश के अधिकांश क्षेत्रों में तापमान सामान्य से ज्यादा रहेगा। इसकी वजह से उत्तर प्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल, छत्तीसगढ़, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक में ग्रीष्मकालीन फसलों पर बुरा असर पड़ने की आशंका है।

तापमान बढ़ने से अप्रैल में कटाई के लिए तैयार गेहूं पर भले ही ज्यादा असर न पड़े, लेकिन गेहूं की जो फसल पकनी बाकी थी, गर्मी ज्यादा होने की वजह से वह मुरझा सकती है।

इसके अलावा सब्जियों, दालों और गन्ने की फसल पर भी तापमान बढ़ने का बुरा असर हो सकता है। अगर ज्यादा गर्मी की वजह से मवेशियों के लिए चारा उत्पादन प्रभावित होता है, तो दूध का उत्पादन भी घट सकता है।

खाने-पीने के चीजों की कीमतें और महंगाई बढ़ेंगी: DBS रिसर्च ग्रुप की इकोनॉमिस्ट राधिका राव के अनुसार अगर मई में सामान्य से ज्यादा दिनों तक हीटवेव चलती है तो महंगाई में 30 से 50 बेसिस पाइंट तक वृद्धि हो सकती है।

इसका परिणाम ये होगा कि जो सब्जी पिछले साल 20 रुपए किलो मिल रही थी, वह इस बार 30 से 35 रुपए किलो मिलेगी। मतलब महंगाई पिछले साल की तुलना में इस सीजन 50% से 80% तक बढ़ जाएगी।

वहीं, केयरएज की चीफ इकोनॉमिस्ट रजनी सिन्हा ने बताया कि हीटवेव का सीधा असर तीन चीजों पर देखने को मिल सकता है- 1. ग्रामीण क्षेत्र में रहने वाले लोगों की इनकम पर 2. खाने-पीने के चीजों की कीमतों पर 3. ग्रामीण भारत में रहने वाले लोगों के स्वास्थ्य पर।

सिन्हा आगे बताती हैं कि एक ओर मार्च 2024 में जहां कंज्यूमर इंफ्लेशन 10 महीने में सबसे कम 4.9% हो गया है। वहीं, इस महीने खाने-पीने के चीजों की कीमत 8.5% तक ज्यादा रही। ऐसे में साफ है कि हीटवेव की वजह से फूड इंफ्लेशन और ज्यादा बढ़ेगा। खासकर हरे साग-सब्जियों के दाम पर गर्मी का असर पड़ना तय है।

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