जेपी का नया भवन तैयार नहीं, पर दबाव हैंडओवर का

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जेपी अस्पताल का नए भवन के नाम पर अधूरे वादों का प्रतीक बन गया है। 26 करोड़ की लागत से बनने वाला यह भवन दिसंबर 2024 तक तैयार होना था। लेकिन, अब तक चार बार डेडलाइन बढ़ाई जा चुकी है। डिप्टी सीएम और स्वास्थ्य मंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने हाल ही में निर्देश दिए कि नए भवन में जल्द इलाज शुरू किया जाए, पर हकीकत यह है कि उपरी दो मंजिलों की छत से वायर और अन्य केबल लटक रही हैं। कार्डियक यूनिट, जिससे गरीब मरीजों को बड़ी राहत मिलने वाली थी। वो गायब हो चुकी है। ओटी अब तक नहीं बन सका है।

ग्राउंड से लेकर तीसरे फ्लोर तक सिविल वर्क तो पूरा हो गया है, लेकिन जरूरी फर्नीचर, मॉनिटरिंग डिवाइस, ओपीडी चैम्बर के लिए उपकरण और ट्रॉमा यूनिट की मशीनें अब तक नहीं लगी हैं। चौथे फ्लोर पर फॉल्स सीलिंग तक नहीं बनी और इलेक्ट्रिकल वायरिंग खुले में लटक रही है। पांचवें फ्लोर की हालत तो और भी खराब है—यहां सिविल वर्क अधूरा और इलेक्ट्रिकल फिटिंग शुरू भी नहीं हुई।

कार्डियक सेंटर हो गया गायब जेपी अस्पताल का नया भवन इसलिए खास था क्योंकि इसमें सरकारी मॉडर्न कार्डियक यूनिट बनना था। इसमें 30 बेड की व्यवस्था और एक अत्याधुनिक कैथलैब लगाने की योजना थी, ताकि दिल के मरीजों को सरकारी अस्पताल में एंजियोग्राफी और एंजियोप्लास्टी जैसी सुविधाएं मिल सकें। लेकिन विभाग ने अचानक यह पूरा प्रोजेक्ट रद्द कर दिया। टेंडर प्रक्रिया शुरू हुई, इसके लिए आवेदन भी आए, फिर फाइल बंद कर दी गई। कारण अब तक स्पष्ट नहीं है।

गरीब मरीजों पर पड़ेगा असर दिल की बीमारियों से जूझ रहे गरीब मरीजों के लिए जेपी अस्पताल ही सबसे सस्ता विकल्प था। लेकिन अब उन्हें एंजियोप्लास्टी जैसी जांचें निजी अस्पतालों में एक से डेढ़ लाख रुपए खर्च कर करवानी पड़ेंगी। वहीं सरकारी स्तर पर मुफ्त इलाज का वादा फिलहाल अधूरे भवन में फंसा पड़ा है।

प्रत्येक फ्लोर की स्थिति

  • ग्राउंड फ्लोर: यहां इमरजेंसी वार्ड बनाया गया है, जिसमें 30 बेड होंगे। 10 बेड का फीमेल वार्ड, 10 बेड मेल वार्ड और 10 बेड का आइसोलेशन वार्ड होगा। लेकिन, मॉनिटरिंग सिस्टम और ट्रॉमा मरीजों के इलाज के लिए जरूरी इक्विपमेंट अब तक नहीं लगे हैं। पुराने अस्पताल से कनेक्टिविटी के लिए बीच में मौजूद नाले पर ब्रिज बनाया गया है। लेकिन, आस पास कोई बाउंड्री नहीं है।
  • फर्स्ट फ्लोर: यहां 41 बेड हैं, जिनमें महिला सर्जिकल और पुरुष आइसोलेशन वार्ड शामिल हैं। फर्नीचर अब तक नहीं आया है। पुराने अस्पताल से कनेक्टिविटी के लिए जरूरी ब्रिज का काम शुरू नहीं हुआ।
  • सेकंड और थर्ड फ्लोर: दोनों मंजिलों पर मेल और फीमेल सर्जिकल वार्ड हैं। नौ प्राइवेट बेड और चार ओटी प्रस्तावित हैं, पर मॉड्यूलर ओटी का काम शुरू भी नहीं हुआ।
  • फोर्थ फ्लोर: यहां सीलिंग और लाइटिंग अधूरी है।
  • फिफ्थ फ्लोर: यहां ब्लड बैंक और 33 बेड का वार्ड बनाया जाना है, लेकिन निर्माण एजेंसी ने अभी तक वॉल पार्टीशन और वायरिंग पूरी नहीं की।

हैंडओवर का दबाव बना रही एजेंसी

अस्पताल के कर्मचारियों के अनुसार, निर्माण एजेंसी दबाव बना रही है कि अस्पताल प्रबंधन किसी तरह अधूरे भवन का हैंडओवर ले ले, ताकि उनका बिल पास हो सके। जबकि प्रबंधन का कहना है कि बिना पूर्ण कार्य और सुरक्षा जांच के हैंडओवर नहीं लिया जा सकता। अब अधूरे कार्यों के लिए नए सिरे से कोटेशन तैयार किए जा रहे हैं।

तीन फ्लोर के साथ अस्पताल होगा शुरू, ऊपर चलेगा काम

स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का कहना है कि भवन निर्माण एजेंसी के साथ पूर्व में कई बैठक हुई हैं। जेपी अस्पताल के सिविल सर्जन डॉ. संजय जैन ने कहा कि वे नए भवन को लेकर एजेंसी और इंजीनियर से संपर्क में हैं। शुक्रवार को भवन का दौरा किया गया। जो काम अधूरे हैं, उन्हें जल्द पूरा करने के आदेश भी दिए गए हैं। शुरुआत में भवन को ग्राउंड, फर्स्ट, सेकेंड और थर्ड फ्लोर पर शुरू किया जाएगा। अन्य दो मंजिलों पर काम पूरा होने के बाद उनमें सुविधाओं का विस्तार किया जाएगा।

वहीं, विशेषज्ञों का कहना है कि जिस बिल्डिंग में मरीजों का इलाज हो वहां कंस्ट्रक्शन का काम जारी रखना इन्फेक्शन से लेकर अन्य समस्या का कारण बन सकता है।

रोज ढाई हजार मरीज पहुंचते हैं अस्पताल जेपी अस्पताल भोपाल का सबसे बड़ा जिला अस्पताल है। यहां रोजाना 2500 से ज्यादा मरीज इलाज के लिए आते हैं। पुराने भवन में जगह की कमी और सीमित ऑपरेशन थिएटरों के कारण मरीजों को घंटों इंतजार करना पड़ता है। यही वजह थी कि नया भवन तेजी से तैयार करने का निर्णय लिया गया था। लेकिन अब अधूरा ढांचा अस्पताल प्रबंधन के लिए सिरदर्द बन गया है।

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