आने वाले चुनावों में दो अग्रवालों में से कौन सा अग्रवाल होगा निहाल वाली सस्पेंस स्टोरी है
अग्रवाल and अग्रवाल
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यह किसी फर्म का नाम नहीं , आने वाले चुनावों में दो अग्रवालों में से कौन सा अग्रवाल होगा निहाल वाली सस्पेंस स्टोरी है
चुनाव चाहे जितना दूर हों पर चुनावी राजनीति की तैयारी निरंतर चलानी पड़ती है
एक अग्रवाल बंधु का स्वागत शो आज किसी बड़े नेता के रोड शो से कम नहीं रहा
इवेंट मैनेजमेंट भी एक कला है , चाहे खर्चीली है पर जिसपर खर्च करने को है तो सब अरेंज हो जाता है
राजनीति में जब आए है तो चुनावी राजनीति में भी उतरने से परहेज क्यों खास कर जब संसाधनों के कोई कमी न हो
दूसरे अग्रवाल बंधु पिछले कई वर्षों से व्यापारी हितों की रक्षक संस्था में बहुत सक्रिय हैं , सफल भी है
सरकारी बैठक में महाराज के लाइन वाली कुर्सी पर भी विराजने की हैसियत प्राप्त कर ली है । शहर के एक मंत्री की ऊर्जा भी हैं , ग्रे मैटर भी हैं
इतिहास भी गवाह है कि बड़े महाराज भी व्यापारी संस्था के एक अग्रवाल को विधायक बनने का सौभाग्य प्राप्त करा चुके हैं । योग्यता उनकी पूर्ण निष्ठा मात्र थी ।
इस बार यदि फिर छोटे महाराज व्यापारी कोटे से जातिगत समीकरणों के आधार पर टिकट देते हैं तो यह अग्रवाल बंधु फिट हैं ।
इस बार इनके पास निष्ठा के साथ साथ बुद्धि भी है।
पर संभव तभी होगा जब पार्टी महाराज को अधिकृत करेगी की वो तय करें कि शहर की राजनीति के उनके दरबारी कौन होंगे
दोनों अग्रवाल बंधु साफ छवि के हैं , भाषा भी सदैव कर्ण प्रिय और मर्यादित ही सुनने को मिली है पर चुनावी राजनीति के लिए पैसा पानी की तरह चाहिए उसमें बहाने में दोनों बंधुओं में निश्चित आज के रोड शो वाले बहुत आगे है ।
पर फिर वही बात , राजनीति सस्पेंस का खेल है । पार्टियां अंत तक सस्पेंस कायम रखती हैं
तब तक दोनों अग्रवाल and अग्रवाल को शुभकामनाएं …..
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सुधीर सप्रा
स्वतंत्र विचार नागरिक
