क्या सच में ज़िम्मेदारी से काम करते है भारत के ये तीनों अंग …?

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झोला छाप ख़बरी

क्या सच में ज़िम्मेदारी से काम करते है भारत के ये तीनों अंग …?

भारत सरकार के कोई भी कर्मचारी हो या अधिकारी उनको पद पर नियुक्ति के समय एकब शपथ दिलाई जाती है और वह शपथ उसकी सेवा पुस्तिका में भी रखी जाती है। आईएएस हो या आईपीएस ये अधिकारी भी इसी नियम से बंधे है।
यह शपथ विधि द्वारा स्थापित नियमों की सत्यनिष्ठा से पालना, भारत की एकता को अक्षुण रखना है।

लेक़िन कितने अधिकारी है जो इस शपथ को पूरे जीवन गांठ बढ़कर निभाते हैं । वैसे तो एक आईएएस अधिकारी भारत सरकार के पूरे विभागों और मंत्रालयों का नेतृत्व का कार्य देखते हैं सरल शब्द में यह भी कह सकते हैं की सरकार की नीतियों को लागू कराने का कार्य और इसमें कोई व्यवधान उत्पन्न न हो इसका ध्यान रखना एक आईएएस अधिकारी का कार्य है।

लेक़िन अब नेताओं की गुलामी इन्हें ज्यादा पसंद आ रही है क्योंकि सरकारी तनख्वा से इनका घर नही चलता और योजनों के नाम पर जो घपले होटे है । उसी से इनकी आलीशान हवेलियां तैयार होती है …?

वैसे लोकतंत्र की सबसे सरल परिभाषा अमेरिकी राष्ट्रपति अब्राहम लिंकन ने दी है जिसके अनुसार “वह शासन पद्धति जो जनता की; जनता के लिए ;जनता के द्वारा संचालित हो” … हमारी संवैधानिक व्यवस्था में इन शब्दों को पूरी तरह अंगीकार किया गया है। हमारी शासन व्यवस्था के तीन अंग महत्वपूर्ण माने गये हैं …. 1.व्यवस्थापिका 2. कार्यपालिका और 3.न्यायपालिका
व्यवस्थापिका को संविधान द्वारा नियम-कानून बनाने की शक्ति दी गई है और ये कानून निर्माता जनता के द्वारा ही चुने जायेंगे । इसके पीछे भी संविधान निर्माताओं की यह भावना रही ; कि वे जनता के प्रतिनिधि यानी दुख- दर्द और समस्या को ज्यादा अच्छी तरह से जानने वाले होंगे। इसके लिए कोई शैक्षणिक योग्यता या मापदंड निर्धारित नहीं किये गये हैं।

दूसरी तरफ संविधान निर्माताओं को यह भी आभास रहा होगा; कि व्यवस्थापिका द्वारा बनाये गये कानूनों का सही तरह से लागू करवाने के लिए एक योग्य और कुशल कार्यपालक मण्डल की आवश्यकता होगी ..इसके लिए उन्होंने आई ए एस व आई पी एस जैसी प्रशासनिक सेवाओं का गठन किया। जिसके लिए उच्च शिक्षा के साथ-साथ कठिन प्रतियोगिता परीक्षाओं को पार करना होता है।

मेरे अभिमतानुसार यही मुख्य कारण है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में व्यवस्थापिका यानी मंत्री सांसद विधायक कार्यपालिका से ऊपर है। इसी कारण से उच्च शिक्षित आई ए एस और आई पी एस प्रोटोकॉल के कारण अनपढ़ और अशिक्षित मंत्री के सामने हाथ बांधकर खड़े रहते हैं।… ऐसे अनेकों उदाहरण हमारी शासन व्यवस्था में भरे पड़े हैं ?

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