साँप को दूध पिलाओ, तो ज़हर ही बढ़ेगा
साँप को दूध पिलाओ, तो ज़हर ही बढ़ेगा
शत्रु तो शत्रु ही रहता है। जैसा कहा जाता है— “साँप को जितना दूध पिलाओ, ज़हर उतना ही बढ़ता है।”
क्रिकेट में दक्षिण अफ्रीका पर अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट खेलने पर प्रतिबंध लगाया गया था, क्योंकि वहाँ काले लोगों से भेदभाव होता था और उनके साथ अत्याचार किया जाता था। यही कारण था कि दक्षिण अफ्रीका को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिबंध का सामना करना पड़ा।
लेकिन अगर पाकिस्तान की बात करें, तो उसकी घिनौनी हरकतें जगजाहिर हैं— आतंकवाद को बढ़ावा देना, भारत के मासूम नागरिकों की हत्या करना, शांति और सद्भाव को बिगाड़ना, दहशत का माहौल पैदा करना। भारत वैसे भी शांति प्रिय देश है, और उसकी शांति को भंग करने की कोशिशें पाकिस्तान लगातार करता आया है। क्या ये कारण पर्याप्त नहीं हैं पाकिस्तान जैसे देश को अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से प्रतिबंधित करने के लिए?
हमने न तो हाथ मिलाया और न ही ट्रॉफी उठाई। लेकिन उन्हें क्या फर्क पड़ा? करोड़ों रुपये कमाए गए; और वही पैसा आतंकवादियों के काम आएगा— बंदूकें खरीदी जाएँगी, गोलियाँ खरीदी जाएँगी। उन गोलियों पर लिखा होगा— “निर्दोष भारतीयों का नाम।”
इसी बीच भारतीय टीम ने अपनी जीत की पूरी राशि उन पीड़ित परिवारों को समर्पित कर दी, जिन्होंने पहलगाम में अपने अपनों को खो दिया था। यही अंतर है फ़रिश्तों और दानवों में।
भारतीय टीम ने ऑपरेशन सिंदूर पूरा किया। यह युद्ध न तो बंदूक़ों और तलवारों से लड़ा गया और न ही छिपकर किया गया। यह ऐसा युद्ध था जिसके गवाह 140 करोड़ भारतीय बने। हमारे गेंदबाज़ों की गेंदें मानो मिसाइल बन चुकी थीं, और इन मिसाइल-रूपी गेंदों के सामने दुश्मन लड़खड़ा रहे थे— माथे पर पसीना, चेहरे पर डर और काँपते हुए हाथ। हमने बदला लिया— एक बार नहीं, बल्कि तीन बार। इसमें कोई दो राय नहीं।
इसलिए हमें गर्व महसूस करना चाहिए और यह संदेश देना चाहिए कि हमारी जीत केवल खेल की नहीं, बल्कि इंसानियत, न्याय और सहानुभूति की भी है। हमें न केवल जश्न मनाना है बल्कि उन परिवारों के साथ भी खड़ा रहना है जिन्होंने अपने अपनों को खो दिया। उनकी मदद करना, उनकी आवाज़ बनना और यह सुनिश्चित करना कि जीत की हर एक राशि सही हाथों तक पहुँचे।
इसलिए हमें खेल को हथियार बनने से रोकना है और अपनी एकता, हौसले और संवेदनशीलता से उन दानवों के इरादों को नाकाम करना है। जिस तरह मैदान पर भारतीय खिलाड़ियों ने कड़ी मेहनत दिखाई, उसी तरह हमें समाज में सच्ची इंसानियत दिखानी होगी।
फ़रिश्तों ने बाँटी अपनी खुशियाँ ग़मगीनों में,
आतंकवाद का नाम मिटा देंगे भारत के नक्शे से।
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मोहम्मद जावेद खान
संपादक
भोपाल मेट्रो न्यूज़
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