नाथ के सुन्नत कराते ही मप्र कांग्रेस पर राजा दिग्गी का अखंड राज (श्याम चोरसिया)
मप्र कांग्रेस के शुक्राचार्य पूर्व cm राजा दिग्गी ने अपने पुत्र पूर्व काबीना मन्त्री जयवर्धन सिह के cm बनने के रास्ते के काटे पूर्व cm कमलनाथ एंड टीम को भी सीनियर लोकप्रिय नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया की तरह बीजेपी के तंबू में धकेल,साफ करते दिखते है। मप्र कांग्रेस में अब राघोगढ़ किले के लिए अब कोई अंदरूनी चुनोती नही बची है। गुटबाजी की इतिश्री होती लगती है।यदि कोई नाथ का एक आध चेला बच भी जाता है तो मप्र कांग्रेस चीफ जीतू पटवारी को उसे अंगुलियों पर नचाने का हुनर याद है। अब प्रतिपक्षी नेता उमंग सिंघार जैसे नेताओं के अवसर बढ़ गए।
दिल्ली में मप्र कांग्रेस की राजनीति में जबरजस्त उबाल आने के बाद लगभग नाथ ओर उनके सांसद पुत्र मुकुल नाथ एंड टीम के सुन्नत कराना अंतिम चरण में है। यदि राष्ट्रीय बीजेपी राष्ट्रीय कार्यकारणी की मैराथन बैठक में व्यस्त न होती तो महाराष्ट्र के पूर्व cm अशोक चौहान की तरह नाथ भी केशरिया हो चुके होते। नाथ का केशरिया धारण करना तय सा है।शुभ चौघड़िया का इंतजार है।
मप्र बीजेपी में भले ही ज्योतिरादित्य सिंधिया की टीम समरस हो चुकी है। सिंधिया ने कोई अलग शक्ति पीठ न बनाया हो। मगर नाथ के प्रवेश लेते ही नाथ वाजिब हिस्सेदारी की तुरई बजा असल भाजपाइयों की तपस्या का क्षरण कर सकते है। इस खतरे से मप्र बीजेपी के अनेक दिग्गज हलकान लगते है। राजधानी भोपाल में राजनीति के बदलते मिजाज ओर समीकरणों को लेकर दिलचस्प कटाक्ष जारी है। उनमें सबसे मोजू बीजेपी भारत को कांग्रेस मुक्त करते करते खुद कांग्रेस युक्त होती जा रही है। यदि असम के हेमंत विस्वा सरमा की तरह मप्र में नाथ,महाराष्ट्र में अशोक चौहान, मुरली देवड़ा,उत्तराखंड में पूर्व cm विजय बहुगुणा,कर्नाटक में पूर्व काबीना मन्त्री कृष्णा,गोवा,up के पूर्व cm को भी अहम जिम्मेदारियां दे दी तो क्या वे बीजेपी की जड़/नींव को सरमा की तरह मजबूत कर पाएंगे? शायद उनका गुटीय मोह ओर आचरण उन्हें ऐसा करने नही देगा। ये भय असल भाजपाइयों को सत्ता रहा है। इस भय की सर्जरी ओर ग्यारंटी भी जरूरी लगती है।
सूत्रों के मुताबिक नाथ कांग्रेस की दो फाक करके राजा दिग्गी को अपने साथ किए अन्याय का जबाब देना चाहते है।सनद रहे। नाथ के विदेश दौरे के दौरान ही राजा दिग्गी अपने चेले जीतू पटवारी को नाथ की जगह मप्र अध्यक्ष तैनात कराने में कामयाब हो गए थे। सूतक में लगे इस दाव से आहत नाथ के पास हलाहल पी,समय का इंतजार करने के सिवा कोई विकल्प नही बचा था।
नाथ राजा दिग्गी पर चौथ वसूल विधानसभा के टिकिट बाटने के आरोप जड़ते आ रहे थे। मप्र में कांग्रेस की करारी हार के बाद नाथ ओर राजा दिग्गी के बीच खटास बढ़ती जा रही थी। करारी हार से आहत राजा दिग्गी के अनुज पूर्व विधायक/सांसद लक्ष्मण सिंह ने भी नाथ के सुर में सुर मिला राजा दिग्गी पर छीटाकासी की थी।राजा दिग्गी जैसे दूरदर्शी जौहरी ये भाप गए थे कि नाथ को निपटाए बिना बीजेपी से मुकाबला सम्भव नही है । शायद 10,जनपद को यही घुटी पिला कर नाथ के पर कतर दिए।नाथ की 10,जनपद के चौके चूल्हे तक कि 05 दशक पुरानी नजदीकियों/सेवाओँ का जनाजा निकाल दिया।
भले ही राजा दिग्गी मल्हम लगाने के लिए अब नाथ की 10,जनपद से बेमिसाल निष्ठा,विश्ववास का बखान करे ।
पल पल बदल रहे घटनाक्रम पर नजर रखने वाले राजा दिग्गी की अनेक कलिंगियो में से एक पूर्व विधायक रामचन्द्र दांगी ने अपने ही पूर्व cm नाथ के पाला बदलने से कांग्रेस के और मजबूत होने का दावा किया है।दांगी अपने ही राष्ट्रीय अध्यक्ष खरगे की खग चाल के उलट पाशा फेक रहे है।खरगे राहुल की भारत जोड़ो न्याय यात्रा के दौरान कांग्रेस के टूटने,बिखने,फूटने से बेहद हदप्रद है।दुखी है।मगर हे लाचार।बेबस । न निगलते न उगलते बन रहा है।
जैसी की आशंका मप्र में कांग्रेस के दो फाड़ होने की बलवती है।नाथ के पीछे 22 विधायक उनमें बम्होरी विधायक अग्रवाल, 32 पूर्व विधायक,11 जिला अध्यक्ष सहित सज्जन सिह वर्मा जैसे अनेक दिग्गज नेता भी सुन्नत करा केशरिया परचम थामने के लिए बेताब लगते है।
