प्रमोशन में आरक्षण मामले में सुनवाई आज

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प्रमोशन में आरक्षण मामले को लेकर हाईकोर्ट में दायर की गई जनहित याचिका पर मंगलवार को सुनवाई नहीं हो सकी, लिहाजा अब यह सुनवाई 14 अगस्त को होगी। इसके साथ ही चार अन्य विभागों से जुड़ी नई याचिका भी दाखिल की गई है।

इन सभी याचिकाओं पर एक साथ हाईकोर्ट सुनवाई करेगा। बता दे कि मध्यप्रदेश में नई प्रमोशन नीति 2025 पर उठे विवाद पर अनारक्षित वर्ग के कर्मियों ने याचिका दायर की है। मंगलवार को चीफ जस्टिस की डिवीजन बैंच की उपलब्धता नहीं होने के कारण सुनवाई 12 अगस्त से बढ़ाकर 14 अगस्त कर दी गई थी। मध्यप्रदेश सरकार के लोक सेवा पदोन्नति नियमों के खिलाफ हाईकोर्ट में राज्य सरकार जवाब पेश करेगी।

बताया जा रहा है, कि कोर्ट में पिछली सुनवाई के दौरान सरकार अपना पक्ष मजबूती से नहीं रख पाई थी, और जवाब पेश करने के लिए समय मांगा गया था। ऐसी कवायद भी चल रही है कि दिल्ली से सीनियर एडवोकेट के जरिए सरकार अपना पक्ष रख सकती है। हाईकोर्ट ने 7 जुलाई को मुख्य सचिव सहित अन्य को नोटिस जारी कर जवाब मांगा था। साथ ही आदेश दिया था कि इस मामले में स्थिति स्पष्ट होने तक कोई भी पदोन्नति नहीं दी जा सकेगी। इसके बाद से 31 जुलाई तक पदोन्नति दिए जाने के राज्य सरकार के तमाम प्रयास नाकाम हो गए।

नई नीति के तहत पदोन्नति नहीं दी जाएगी

कोर्ट में सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से महाधिवक्ता प्रशांत सिंह ने कोर्ट को आश्वासन दिया था कि अगली सुनवाई तक किसी को नई नीति के तहत पदोन्नति नहीं दी जाएगी। मामले में भोपाल निवासी डॉ. स्वाति तिवारी सहित अन्य याचिकाकर्ताओं ने दलील दी है कि हाईकोर्ट पहले ही साल 2002 के प्रमोशन नियमों को आरबी राय केस में रद्द कर चुका है। इसके बावजूद राज्य सरकार ने नए सिरे से वही नीति लागू कर दी जबकि मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबित है और वहां यथास्थिति बनाए रखने का आदेश जारी है।

17 जून को कैबिनेट ने दी थी मंजूरी

नए पदोन्नति नियमों को मोहन यादव कैबिनेट ने 17 जून को मंजूरी दी थी और इसके बाद सरकार ने 19 जून 2025 को नए नियम बनाकर अधिसूचना जारी कर उसे लागू कर दिया है। लेकिन न तो सुप्रीम कोर्ट में दायर विशेष अनुमति याचिका वापस ली और न ही पुराने नियम से पदोन्नत हुए कर्मचारियों को पदावनत किया।

इसी कारण जब इन नियमों के विरोध में हाई कोर्ट में याचिका दायर की गई तो कोर्ट ने नए और पुराने नियम के अंतर को स्पष्ट करने के साथ इस बात पर सरकार से जवाब मांग लिया कि सरकार की ओर से दायर याचिका सुप्रीम कोर्ट से वापस क्यों नहीं ली गई। जब नियम तैयार हो रहे थे, तब भी यह विषय उठा था लेकिन इस पर किसी ने ध्यान नहीं दिया।

अब इस मामले में सरकार द्वारा दिए जाने वाले जवाब से तय होगा कि पदोन्नति का रास्ता खुलेगा या पदोन्नति अटकी रहेगी। बताया जाता है कि सरकार कोर्ट में मजबूती से अपना पक्ष रखने के लिए गुरुवार को पूर्व अतिरिक्त सालिसिटर जनरल सीएस वैद्यनाथन को बुला सकती है।

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