‘चालाकी और धूर्तता को कोई पसंद नहीं करता○○’-धीरेंद्र राहुल

लोकसभा चुनाव में इंदौर से कांग्रेस के प्रत्याशी अक्षय कांति बम ऐनटाइम पर अपना नामांकन वापस लेकर भाजपा में शामिल हो गए। भाजपा ने ऐसा खेला सूरत के बाद इंदौर में भी कर दिखाया। जाहिर है भाजपा के खेमे में खुशी की लहर है कि हमने बिना लड़े ही चुनाव जीत लिया।
नरेन्द्र मोदी एक तरफ अब की बार 400 पार का नारा लगा रहे हैं। पूछता है भारत कि जब आपके पास पहले से इतना काॅन्फिडेंस है तो फिर इतनी घटिया और अनैतिक हरकत करने की आपको क्या जरूरत आन पड़ी।
इंदौर तो वैसे भी भारतीय जनता पार्टी का हमेशा से गढ़ रहा है। जब कांग्रेस का राज था, तब भी ताई सुमित्रा महाजन आठ बार यहां से जीतती रही। अभी भी भाजपा के शंकर लालवानी वहां से सांसद हैं।
कहते हैं कि युद्ध और प्रेम में सब कुछ जायज है लेकिन लोकतंत्र में होने वाले चुनाव में भी जायज है तो यहां मैं कहूंगा नहीं।
क्योंकि यह मसला एक जिम्मेदार दल के रूप में आपकी विश्वसनीयता और प्रामाणिकता से जुड़ा है। आपके नैतिक आभा मण्डल से भी जुड़ा है।
यह मसला इंदौर के 25 – 30 लाख मतदाताओं से भी जुड़ा है जो अपने को ठगा सा महसूस कर रहे हैं। चालाकी और धूर्तता करने वाले को न लोग पसंद करते हैं और न समाज पसंद करता है। यहां तक कि परिवार में भी अगर ऐसा कोई सदस्य हो तो परिवार वाले भी उसे पसंद नहीं करते।
सन् 2014 और 2019 में नरेन्द्र मोदी की बात पर या वादे पर देशवासी जितना भरोसा करते थे, उतना आज नहीं करते। वे ग्यारंटी पर ग्यारंटी दिए जा रहे हैं लेकिन आज देश को उनकी किसी ग्यारंटी पर भरोसा नहीं है। वे अपनी विश्वसनीयता खोते जा रहे हैं। उसमें ऐसी घटनाएं आग में घी का काम कर रही हैं।
हम अटलजी की सरकार के दौरान देख चुके हैं कि शाइन इंडिया के एक झूठे विज्ञापन ने अटलबिहारी वाजपेयी जैसे लोकप्रिय नेता को सत्ता के रथ से नीचे उतार लिया था। पार्टी की साख को कैलाश विजयवर्गीय जैसे छोट्या मास्टर के हाथ नहीं छोड़ना चाहिए।
शेरशाह सूरी की तरह आपको भी न अफसोस करना पड़े कि एक मुट्ठी बाजरे के चक्कर में हिन्दुस्तान का राज खो देता। धीरेंद्र राहुल
