एक सुल्तानपुर यह भी

रायसेन जिले में जनसंपर्क अधिकारी रहते हुए साल 1993 में एक कार्यक्रम का संयोजन किया गया था। प्रख्यात गीतकार मजरूह सुल्तानपुरी मुंबई से आए थे। तत्कालीन कलेक्टर श्री देवेंद्र सिंह राय ने उनका स्वागत किया। रायसेन के शायर मरहूम मजहर सईद ने मजरुह सुल्तानपुरी जी को सेंट फ्रांसिस कान्वेंट स्कूल के मंच पर जब बुलाया तो उसे छोटे से नगर के कला और संगीत प्रेमी आह्लादित हो गए थे।देर रात्रि भोपाल से मुंबई की फ्लाइट से मजरूह सुल्तानपुरी जी को वापस जाना था। जब रायसेन से भोपाल के लिए वापसी हो रही थी तो मैंने मजरूह सुल्तानपुरी जी से कहा कि एक सुल्तानपुर उत्तर प्रदेश में है जो आपका नगर है। एक सुल्तानपुर इस जिले में भी है तो उन्होंने पूछा कितने किलोमीटर दूर है ? मैंने बताया महज 35 किलोमीटर। वे चलने को तत्पर हो गए थे लेकिन फिर यह सोचकर कि भोपाल से मुंबई की फ्लाइट छूट जाएगी, उन्होंने अपने कदम रोक लिए थे ।
वर्ष 1994 के बाद 31 साल में मुझे सुल्तानपुर के मित्रों ने कई बार बुलाया लेकिन संयोग नहीं हुआ। इस महीने छिंदधाम बरेली जाते हुए मैंने सुल्तानपुर के मित्र राधा कृष्ण आडवाणी जी की चाय का निमंत्रण स्वीकार किया।
समय के साथ स्मृतियां धुंधली हो सकती हैं, लेकिन संबंध और भी गहरे हो जाते हैं।
अपनेपन को दुनिया में तलाशना नहीं पड़ता, वह सहज मिल जाता है।
Ashok manbani
