कूनो, गांधीसागर के बाद चीतों का मप्र में तीसरा ठिकाना

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कूनो में चीता पवन। - Dainik Bhaskar

प्रदेश में चीतों का तीसरा ठिकाना सागर जिले का नौरादेही अभयारण्य बनेगा। कूनो राष्ट्रीय उद्यान और गांधी सागर वन्यजीव अभयारण्य के बाद यहां चीतों की बसाहट के लिए वन विभाग की टीम काम में जुट गई है। इसको लेकर राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (एनटीसीए) की एक टीम मई में अभयारण्य का विजिट कर चुकी है और इस टीम ने अभयारण्य के दायरे में आने वाले मोहली, झापा और सिंगपुर की तीन श्रेणियों में फैले 30 किलोमीटर के क्षेत्र को चीतों के लिए तैयार करने का फैसला किया है।

सागर और दमोह जिलों के पठारी इलाके में स्थित नौरादेही अभयारण्य साल, सागौन, महुआ, बांस और बेल के पेड़ों से भरा एक पर्णपाती जंगल है, यहां घास के मैदान हैं जो शाकाहारी जानवरों के लिए उत्तम चारागाह है। यहां मृग और जंगली सुअर जैसे अन्य जानवरों सहित पर्याप्त शिकार है। इसके साथ ही वन विभाग पेंच और कान्हा टाइगर रिजर्व से चीतल या चित्तीदार हिरणों के शिफ्टिंग की व्यवस्था में भी जुटा है। नौरादेही वर्ष 2010 में चीतों के लिए प्राथमिकता वाले स्थलों में शामिल था लेकिन बाद में इसे हटा दिया गया था। अब फिर इसको लेकर कवायद तेज हुई है। चीफ वाइल्ड लाइफ वार्डन शुभरंजन सेन ने इसकी पुष्टि की है।

कान्हा टाइगर रिजर्व से चीतल किए जाएंगे शिफ्ट।
कान्हा टाइगर रिजर्व से चीतल किए जाएंगे शिफ्ट।

13 गांव होंगे विस्थापित

एनटीसीए में वन उप महानिरीक्षक वैभव माथुर की मौजूदगी वाली निरीक्षण टीम जिन तीन रेंज मोहली, झापा और सिंगपुर को चीतों के रहवास के लिए उचित माना है, उसमें कुल 13 गांव हैं जहां के लोगों का पुनर्वास किया जाएगा। यहां 30 किलोमीटर के क्षेत्र को बाड़ेबंदी भी की जाएगी। वन टीम ने इन 13 गांवों के पुनर्वास के लिए 150 करोड़ रुपए की अतिरिक्त राशि मांगी है। अभयारण्य में रिक्त पदों को भरने के लिए नौरादेही में पशु चिकित्सकों की भी तैनाती की जाएगी।

अधिकारियों के अनुसार नौरादेही अभयारण्य में कुल 93 गांव थे, जिनमें से 44 को बाहर स्थानांतरित कर दिया गया है। 49 गांव अभी भी अभयारण्य के भीतर हैं। वन विभाग वर्तमान में तीन और गांवों के लोगों के पुनर्वास का काम कर रहा है जबकि मोहली गांव सहित सात अन्य गांवों को इस साल के अंत में पुनर्वास के लिए चुना जाएगा।

2022-23 में कूनो में लाए गए हैं चीते

वर्ष 1952 में भारत में चीतों के विलुप्त होने के बाद सितंबर 2022 में नामीबिया से 8 चीतों को लाया गया था। फरवरी 2023 में दक्षिण अफ्रीका से और 12 चीतों को लाया गया। इन्हें भी कूनो में रखा गया जिससे भारत में चीतों की कुल संख्या 20 हो गई। पिछले दो वर्षों में इन चीतों ने कुल 26 शावकों को जन्म दिया, लेकिन केवल 19 ही जीवित बचे।

12 वयस्क और 19 शावकों के साथ, भारत में चीतों की कुल संख्या वर्तमान में 31 है। इस साल अप्रैल में दक्षिण अफ्रीका से लाए गए 12 चीतों में से दो वयस्क नर चीते, पवन और प्रभास को गांधी सागर वन्यजीव अभयारण्य में स्थानांतरित कर दिया गया था जिसे देश में बड़ी बिल्लियों के लिए दूसरे घर के रूप में विकसित किया गया है।

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