“मप्र पुलिस की ग़ुलाम मानसिकता”…..❓
♦️ “21 मई को राष्ट्रीय राजमार्ग न. 8 पर एक महिला संग वायरल हुए अत्यंत अश्लील वीडियो के “नायक धाकड़ नेताजी” कल उनकी गिरफ़्तारी में असफ़ल पुलिस को चुनौती देते हुए रविवार को थाना भानपुरा में “कृपापूर्वक ख़ुद सरेंडर हो गये”⁉️
♦️ “लाचार पुलिस का दावा “उन्हें” (❗️) गिरफ़्तार किया गया, सरेंडर करने वाले “नेताजी, पुलिस अभिरक्षा में ऐसे चल रहे हैं जैसे 8-10 आतंकियों को ढेर करके आये हों, “असहाय पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी जी की बाइट ज़रूर सुनियेगा”, वे एक निकृष्ट अपराधी का “नाम तक लेने में डर रहे हैं”, एक मंत्री जी के ख़िलाफ़ दर्ज FIR में “श्री” लिखने के बाद पुलिस द्वारा उक्त “नेताजी” के लिए “उन्हें/उनको” जैसे शब्द का संबोधन”…..⁉️
? “अधिकारी जी, क्या पुलिस आम गुंडे/अपराधी, दुष्कर्म, बलात्कार के आरोपितों को भी ऐसे ही “शाब्दिक सम्मान” से नवाज़ती है, लगता है आप मप्र पुलिस विभाग में सबसे उत्कृष्ट, सुशिक्षित,सुसंस्कृत,भाषाई ज्ञान के मर्मेज्ञ अधिकारी हैं”…..काश…..⁉️
♦️*आप जैसे लोग ही पुलिस/खाखी वर्दी के सम्मान, स्वाभिमान और विश्वास को नीलाम करने के ज़िम्मेदार हैं, हार्दिक बधाईयां-शुभकामनाएं*????????
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