मत आना इंदौर मोहन सरकार और राजबाड़ा तो बिल्कुल नहीं !

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मत आना इंदौर मोहन सरकार और राजबाड़ा तो बिल्कुल नहीं

 

गौरव चतुर्वेदी खबर नेशन

 

मालवा में किसी अतिथि के जाते समय पधारजो साहब कहने की संस्कृति है…….पर मैं पहली बार इंदौर के लगभग पांच लाख जनता की और से मध्यप्रदेश सरकार के मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव और उनकी सरकार को यह कहने पर मजबूर हूं कि

मत आना इंदौर मोहन सरकार और राजबाड़ा तो बिल्कुल नहीं !

आज आपकी कैबिनेट बैठक जो राजबाड़ा के गणेश हॉल में सजी थी की सुरक्षा व्यवस्था और तामझाम को लेकर इंदौर का हृदय स्थल राजबाड़ा और आसपास के इलाके की धमनियों को ठप्प कर गया।

कैबिनेट बैठक तो राजसी अंदाज में राजबाड़ा के अंदर चल रही थी लेकिन हजारों नागरिक अपने व्यापारिक संस्थान मजबूरन बंद किए बैठे थे। इनमें कई तो रोज कमाकर अपना परिवार पालने वाले लोग हैं। एक कैबिनेट बैठक के अजूबे के चलते व्यावसायिक संस्थान बंद रहे जिनसे मध्यप्रदेश के दूरदराज के व्यापारी अपना सौदा खरीदने आते है। वे व्यापारी भी परेशान रहे।

इंदौर जिले का पूरा प्रशासन सरकार की आवभगत में लगा रहा और सरकारी दफ्तरों में सन्नाटा। इन दफ्तरों के चक्कर लगा लगाकर थक चुका आम आदमी फिर एक बार फिर ठगा गया।

इस कैबिनेट बैठक की बस एक खूबी रही जितनी सरकारी गाड़ियां थी उनके ड्राइवर और मंत्री अफसरों के स्टाफ खड़ी गाड़ी का डीजल फूंकते हुए ठंडी हवा का आनंद लेते रहे।

करोड़ों रुपए खर्च कर की गई मां अहिल्या बाई होलकर को समर्पित कैबिनेट बैठक के निर्णय भोपाल के वल्लभ भवन में भी हो सकते थे, इंदौर की रेसीडेंसी कोठी पर भी लेकिन शहर को जाम करना जनता को परेशान करना रहा।

सरकार का मतलब आम जनता की तकलीफों को दूर करना है न कि बढ़ाना। और कम से कम माता अहिल्या बाई होलकर की सरकार ने ऐसा कभी नहीं किया। हां उनके नाम पर डॉक्टर मोहन यादव की सरकार आम जनता की तकलीफों को बढ़ा गई।

इसलिए फिर वही कह रहा हूं मत आना इंदौर मोहन सरकार और राजबाड़ा तो बिल्कुल नहीं ! और ऐसी कवायद किसी और शहर में भी मत कीजिएगा।

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