*त्रिदिवसीय राजयोग शिविर “स्वास्थ्य समृद्धि एवं खुशी का रहस्य”*का आयोजन।
सादर प्रकाशनार्थ
*त्रिदिवसीय राजयोग शिविर “स्वास्थ्य समृद्धि एवं खुशी का रहस्य”*का आयोजन।
प्रथम दिवस “अपने अंदर के हीरो को पहचाने” विषय पर हुआ सत्र*
“संपूर्ण सत्य की पहचान- वह तीनों ही कालों में एक जैसा तथा सबके लिए एक समान” है
प्रथम दिवस पर मुंबई से पधारे प्रोफेसर गिरीश ने सत्य पर अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि
सत्य को परखने की दो कसौटियां 2 ही हैं, 6प्रथम-वह *तीनों कालों में एक समान रहता है, दूसरा- सबके लिए एक जैसा ही होता हैl
जैसे कि गुरुत्वाकर्षण बल, जैसा पहले था आज भी वही है तथा कल भी वही रहेगा। एवं सभी लोगों के लिए एक समान ही है,चाहे वह किसी भी धर्म, किसी भी जाति या मजहब का हो या कोई भी आयु का हो किसी भी देश का हो। इतिहास गवाह है आज तक एक भी युद्ध अथवा विवाद गुरुत्वाकर्षण बल क्यों है, इसपर नहीं हुआ क्योंकि वह सब को स्वीकार्य है, मान्य है। इसी प्रकार यदि सृष्टि तथा जीवन के अन्य मूलभूत शाश्वत सत्य नियमों को मनुष्य समझ जाए और स्वीकार कर ले तो जीवन के अनेक उलझन से, अनेक प्रश्नों से पार होकर वह एक संतुष्ट एवं खुशहाल जीवन जी सकता है।
उन्होंने अपने सत्य स्वरूप पर सबके मन को एकाग्र करते हुए आत्मा के शाश्वत गुण शांति,पवित्रता, प्रेम,आनंद, खुशी, शक्ति आदि की अनुभूति सभी को ध्यान के माध्यम से कराई। तथा सभी को अगले 24 घंटे के लिए खुश रहकर हर परिस्थिति में मुस्कुराते रहने एवं खुशहाल रहने का होमवर्क भी दिया।
आने वाले सभी जिज्ञासुओं ने कार्यक्रम की बहुत-बहुत प्रशंसा की एवं भारी मात्रा में लोगों ने कार्यक्रम में हिस्सा लिया।
साथ ही आने वाले सत्रों में वे जीवन के इन्हीं कुछ सत्य एवं शाश्वत नियमों पर प्रकाश डालेंगे जिससे सच्चे मायने में अपने जीवन में हीरो बनकर ही हम जिएं।
