भोपाल नें जनजागरूकता गतिविधियों के साथ मनाया गया मलेरिया दिवस

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मलेरिया उन्मूलन के प्रयासों से भोपाल जिले में मलेरिया विदाई की ओर

25 अप्रैल को विश्व मलेरिया दिवस के अवसर पर जिले में विभिन्न जागरूकता कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। ये दिवस Maleria Ends With Us: Reinvest, Reimagine, Reignite की थीम पर मनाया जा रहा है। इस अवसर पर स्कूली विद्यार्थियों को मलेरिया के लक्षणों, मलेरिया से बचाव के उपाय ,जांच एवं उपचार के साथ-साथ मलेरिया उन्मूलन के लिए शासन द्वारा किए जा रहे प्रयासों की जानकारी दी गई । स्वास्थ्य संस्थाओं, स्कूलों एवं आंगनबाड़ियों में पोस्टर एवं ड्राइंग प्रतियोगिता, जागरूकता रैली मलेरिया प्रश्नोत्तरी का आयोजन किया गया। स्वास्थ्य संस्थाओं में मलेरिया उपचार नीति के संबंध में उन्मुखीकरण किया गया।

मलेरिया उन्मूलन के प्रयासों के फलस्वरुप भोपाल जिले में स्थिति काफी बेहतर है। विगत वर्ष मलेरिया के कुल 326369 टेस्ट किए गए थे, जिनमें से 12 मलेरिया पॉजिटिव मरीज मिले थे। इस साल 43381 लोगों की मलेरिया जांच की जा चुकी है, जिनमें से कोई भी मलेरिया पॉजिटिव मरीज नहीं मिला है।

मच्छर जनित बीमारियों में मलेरिया सबसे प्रचलित बीमारी है । यह बीमारी मादा एनाफिलीज मच्छर के काटने से होती है। ठंड लगकर बुखार आना मलेरिया का सबसे प्रमुख लक्षण है । मलेरिया की जांच एवं दवाइयां सभी शासकीय स्वास्थ्य संस्थाओं में निशुल्क उपलब्ध है । आशा कार्यकर्ता से संपर्क करके भी जांच करवाई जा सकती है ।

मलेरिया दिवस के अवसर परमलेरिया कार्यालय एवं गोदरेज द्वारा संचालित एंबेड परियोजना भोपाल द्वारा समुदाय बैठक एवं मलेरिया जागरूकता हेतु शपथ कार्यक्रम किए गए। ब्लॉक स्तर पर आशा द्वारा नारे लेखन एवं जागरुकता हेतु ग्राम स्तर पर मलेरिया उन्मूलन हेतु लोगो को समझाया दी गई। विद्यालयों में बच्चों को ड्राइंग एवं पेंटिंग के माध्यम से मलेरिया से बचाव हेतु संदेश दिया। इस दौरान लगभग 700 बच्चों ने सहभागिता की। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर आशा कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षित किया गया। प्रभावित क्षेत्रों में गंबूशिया मछली का संचयन किया।

प्रदेश में मलेरिया फैलाने वाले दो परजीवी प्लाज्मोडियम फेल्सीफेरम एवं प्लाज्मोडियम वाईवेक्स है। एनाफिलीज मच्छर रुके हुए साफ पानी में पनपता है , जैसे कि धान का खेत तालाब, गड्ढे ,कृत्रिम जलाशय, छत पर बनी हुई टंकी, जल एकत्रित करने के लिए जमीन के अंदर बनी टंकी ,अनुपयोगी कुंए, जलधारा के किनारे से एकत्र जल, नदियां, हैंड पंप, नल के आसपास जमा पानी, नहर में रुके हुए पानी इत्यादि।

मलेरिया का खतरा 5 वर्ष से कम उम्र के बच्चों और गर्भवती महिलाओं को ज्यादा रहता है। तेज ठंड देकर बुखार, कंपकपी, सिर दर्द ,बदन दर्द, उल्टी होना मलेरिया को प्रमुख लक्षण है । गंभीर अवस्था में यह खून की कमी का कारण भी हो सकता है । यदि इसका शीघ्र एवं पर्याप्त उपचार नहीं लिया जाए तो मलेरिया से रोगी की मृत्यु भी हो सकती है । गर्भावस्था में मलेरिया गंभीर हो सकता है और जच्चा और बच्चा भी जान को भी खतरा हो सकता है। मलेरिया होने पर आरडीटी किट किट से जांच करवाकर मलेरिया उपचार नीति के अनुसार पूरा उपचार लेना आवश्यक होता है।

मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी भोपाल डॉ प्रभाकर तिवारी ने बताया कि मलेरिया नियंत्रण हेतु शीघ्र जांच एवं पूर्ण उपचार , घर-घर भ्रमण कर बुखार रोगियों की मलेरिया जांच हेतु सर्विलेंस, कीटनाशक युक्त मच्छरदानी का वितरण, कीटनाशक छिड़काव , लार्वा नियंत्रण हेतु गतिविधियां, प्रशिक्षण एवं सपोर्टिव सुपरविजन किया जा रहा है।मच्छर के प्रजनन पर रोक लगाने के लिए आवश्यक सावधानियां जैसे घर के आसपास अनावश्यक जल भराव को रोकने, पानी को हमेशा ढक कर रखने, व पानी के बर्तनों मटका, टंकी, कूलर आदि की हर चौथे दिन पानी बदल कर सफाई करने आदि को अपनाने के लिये आमजनों को प्रेरित किया जा रहा है।

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