अंतहीन दर्द और अन्याय बयां करती ‘किताब कठघरे में सांसें’

अंतहीन दर्द और अन्याय बयां करती ‘किताब कठघरे में सांसें’
दुनिया की सबसे बड़ी औद्योगिक त्रासदी भोपाल गैस काण्ड के 40 वर्ष बीत गए हैं। इस भीषण त्रासदी ने मानवता की क्रूर हत्या की थी। इसके ज़ख़्म आज भी पीड़ितों की यादों में, जेहन में ताजा हैं। झीलों की सुंदर नगरी भोपाल ने इन चार दशकों में खुद को सम्भाल तो लिया है लेकिन उस भयानक रात का दर्द पीड़ितों के दिल में जस का तब बना हुआ है।
भोपाल गैस त्रासदी के दर्द को बयां करती, न्याय पर सवाल उठाती किताब ‘कठघरे में सांसें- भोपाल गैस त्रासदी के चार दशक’ का विमोचन रविवार को हुआ। विभूति झा द्वारा लिखी इस किताब का संपादन राजेश बादल और वन्या झा ने किया है, समीक्षा राजेश जोशी ने की है। इस त्रासदी की तस्वीरें आज भी झकझोर देती हैं। इस पुस्तक में प्रदेश के जाने-माने फोटो जर्नलिस्ट आर सी साहू द्वारा खींची गई तस्वीरें हैं, जिन्हें देखकर दुर्घटना का मंजर आंखों के सामने आ जाता है। आर सी साहू वो पत्रकार हैं, जो इस त्रासदी के दौरान दिन-रात हाथों में कैमरा लिए एक-एक क्षण कैद करते रहे। भास्कर ने उन्हें दुनिया का इकलौता ऐसा फोटोग्राफर माना है, जिन्होंने भोपाल गैस काण्ड का सच दुनिया तक लाने में बड़ी भूमिका निभाई। आर सी साहू 50 वर्षों से फोटोग्राफी कर रहे हैं। वे कहते हैं कि ट्रकों से भरी हुई लाशें, रोते-बिलखते लोग और शहर की उखड़ती सांसें आज भी उनके रोंगटे खड़े कर देती हैं। इस अवसर पर फोटोग्राफर आर सी साहू को सम्मानित भी किया गया।
इस किताब के 15 अध्याय उस काली रात से लेकर नाइंसाफी की दास्तान तक आपको झकझोर देंगे।
