परम पूज्य “सद्गुरुदेव” जी ने कहा* – ज्ञान ज्योति का तात्पर्य

*??सादर हरि ऊँ?* *परम पूज्य “सद्गुरुदेव” जी ने कहा* – ज्ञान ज्योति का तात्पर्य है – सत्य पथ की यात्रा, यह यात्रा तभी पूर्ण होती है, जब व्यक्ति अंधकार से प्रकाश, असत्य से सत्य, अज्ञान से ज्ञान की ओर अग्रसर हो और मनुष्य मोहनिद्रा का त्याग करे। जीव, जगत और ब्रह्म के भेद को समझे। इसीलिए भगवान श्रीकृष्ण श्रीमद्भगवद्गीता में अर्जुन को सन्देश देते हुए कहते हैं कि जिसे मैं स्वयं का ज्ञान कराना चाहता हूँ, उसे प्रज्ञाबुद्धि प्रदान करता हूँ। यह प्रज्ञा चक्षु भी वस्तुत: उसे ही मिल पाते हैं, जिस पर परमपिता परमेश्वर की अनन्त कृपा होती है, क्योंकि व्यक्ति एक शक्ति तो हो सकता है, लेकिन महाशक्ति नहीं। *?श्री गुरूचरणकमलेभ्यों नमः?*
