कांग्रेस की शिकायत पर नपी केजरीवाल टीम (श्याम चोरसिया )
भारतीय राजनीति मूल्यों,आदर्शों पर आधारित होती तो 100 करोड़ से अधिक के दारू घोटाले की शिकायत तत्कालीन LG अस्थाना से करके निष्पक्ष जांच की मांग करने वाली कांग्रेस पलटी मार कर आज केजरीवाल टीम को बचाने के लिए दलीलें नही देती। बीजेपी को आड़े हाथ ले नही कोसती।
केजरीवाल टीम न्यायालय के हस्तक्षेप से नपी। मगर आप, कांग्रेस,एनसीपी, एनसी, सपा लालू सहित गठबंधन के तमाम दल बीजेपी की बजाय न्यायालय पर हमलावर होते। मगर विभिन्न घोटालों में फंसे गठबंधन के अधिकांश शीर्ष नेता जानते है। न्यायालय को कोसने से वोट नही मिलते। वोट पक्के होंगे, सहानुभूति मिलेगी तो बीजेपी को कोसने से। लिहाजा न्यायालय की कार्यवाही को बीजेपी पर थोप अपने कारनामों को छुपाने के असफल प्रयास जारी है।
मगर गठबंधन के काग भुसन्ड ये भूल जाते है। 90% भारतीय पहले के मुकाबले ज्यादा जागरूक,चेतन्य, समय की नब्ज रखने में पारंगत हो चुका है। वह कालनेमियो की फितरत को पहचानता है।जानता है। महसूस करता है। फिर फैसला देने में देर नही करता। इसी परख ओर जोहरी पने ने भारत पर अखंड राज करने वाली कांग्रेस को क्षेत्रीय दल में बदल दिया। कभी चमकदार नेता रहे। वे विश्वसनीयता के अभाव में खारिज कर दिए गए। उनको जनता ने भाव देना,उनकी सुनना कम या बन्द कर दिया। जनता सबसे बड़ी अदालत है। ये अदालत बोलती नही बल्कि अपने वोट की शक्ति से फैसला दे बेपटरी कर देती है। यश,कीर्ति का हरण करके कालिख पोत देती है।
घोटालों का घड़ा भरने के केजरीवाल टीम का हश्र भी यही हो रहा है।
केजरीवाल के नपने के बाद भूचाल आने की धमकी देने वालों को भी मुंह की खानी पड़ी। भूचाल तो छोड़ो तेज हवा भी नही चली। केजरी खेरातो से मस्त दिल्ली ने भी केजरीवाल से पल्ला झाड़ कड़वा सबक दिया। ये अन्य सूबो के हुक्कामों के लिए सबक है। प्रदेशो का खजाना खाली करने वाली खेरातो से नवाजने वालों के हक में जनता खड़ा होना पसंद नही करती। जनता खेरातो की साथी है। मगर खेरातो से नवाजने वालों के दुर्दिनों के लिए कोई सहानुभूति नही रखती। खेरातो के एफिल टावर से मस्त दिल्ली मिसाल है
